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कई बीमारियों का काल है ये पौधा, सेहत के लिए अमृत समान, सर्दी-खांसी, बुखार हमेशा रहेगा दूर – Uttarakhand News

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गिलोय, जिसे आयुर्वेद में अमृत बेल और अमृता कहा गया है. यह बेल किसी वरदान से कम नहीं क्योंकि यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर थकान मिटाने, बुखार और पाचन की समस्या को दूर करने तक हर तरह की बीमारियों में असरदार मानी जाती है. स्थानीय लोग इसे देसी डॉक्टर के नाम से भी जानते हैं. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है, जिसमें काढ़ा, चाय या जूस शामिल हैं. सुबह शाम इसका जूस लेने से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है. इसमें पाए जाने वाले तत्व लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है.

बुखार, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना आज के बदलते मौसम में आम समस्या बन चुकी है. लोग छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान रहते है और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उपाय ढूंढते है. ऐसे में आयुर्वेद की अमूल्य देन गिलोय को ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ और ‘आयुर्वेद में अमृत’ के रूप में जाना जाता है. गिलोय केवल एक औषधीय पौधा नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य के कई पहलुओं में लाभकारी साबित होती है.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि गिलोय का सेवन आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आया है. इसे आयुर्वेद की दृष्टि से कई लाभकारी गुणों वाला माना गया है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और शरीर को बाहरी संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनाता है. बदलते मौसम में जहां लोग अक्सर बुखार, सर्दी-खांसी और कमजोरी जैसी परेशानियों से जूझते है, वहीं गिलोय इन समस्याओं को कम करने में फायदेमंद हो सकती है.

अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता
गिलोय शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होती है. यह खून साफ करने और शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है. इसके सेवन से लीवर और किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसके साथ ही यह पाचन शक्ति को मजबूत करती है और गैस, कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करती है. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है. सबसे आम तरीका इसके ताजे रस का है, जिसे लोग सुबह खाली पेट पीना पसंद करते हैं. इसके अलावा गिलोय की गोलियां, चूर्ण और कैप्सूल भी उपलब्ध है.

ताकत और ऊर्जा बनाने में उपयोगी
गिलोय केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और शरीर को तरोताजा बनाए रखती है. आयुर्वेद में इसे वृद्धावस्था में शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी उपयोगी बताया गया है. इस तरह गिलोय का नियमित और सही सेवन शरीर और मन दोनों को मजबूत बनाने में सहायक होता है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

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गिलोय, जिसे आयुर्वेद में अमृत बेल और अमृता कहा गया है. यह बेल किसी वरदान से कम नहीं क्योंकि यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर थकान मिटाने, बुखार और पाचन की समस्या को दूर करने तक हर तरह की बीमारियों में असरदार मानी जाती है. स्थानीय लोग इसे देसी डॉक्टर के नाम से भी जानते हैं. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है, जिसमें काढ़ा, चाय या जूस शामिल हैं. सुबह शाम इसका जूस लेने से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है. इसमें पाए जाने वाले तत्व लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है.

बुखार, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना आज के बदलते मौसम में आम समस्या बन चुकी है. लोग छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान रहते है और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उपाय ढूंढते है. ऐसे में आयुर्वेद की अमूल्य देन गिलोय को ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ और ‘आयुर्वेद में अमृत’ के रूप में जाना जाता है. गिलोय केवल एक औषधीय पौधा नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य के कई पहलुओं में लाभकारी साबित होती है.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि गिलोय का सेवन आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आया है. इसे आयुर्वेद की दृष्टि से कई लाभकारी गुणों वाला माना गया है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और शरीर को बाहरी संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनाता है. बदलते मौसम में जहां लोग अक्सर बुखार, सर्दी-खांसी और कमजोरी जैसी परेशानियों से जूझते है, वहीं गिलोय इन समस्याओं को कम करने में फायदेमंद हो सकती है.

अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता
गिलोय शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होती है. यह खून साफ करने और शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है. इसके सेवन से लीवर और किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसके साथ ही यह पाचन शक्ति को मजबूत करती है और गैस, कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करती है. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है. सबसे आम तरीका इसके ताजे रस का है, जिसे लोग सुबह खाली पेट पीना पसंद करते हैं. इसके अलावा गिलोय की गोलियां, चूर्ण और कैप्सूल भी उपलब्ध है.

ताकत और ऊर्जा बनाने में उपयोगी
गिलोय केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और शरीर को तरोताजा बनाए रखती है. आयुर्वेद में इसे वृद्धावस्था में शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी उपयोगी बताया गया है. इस तरह गिलोय का नियमित और सही सेवन शरीर और मन दोनों को मजबूत बनाने में सहायक होता है.

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