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ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा।

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