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डायबिटीज और पेट के कीड़ों का दुश्मन ‘पलाश’, फूल-बीज और छाल में छिपे औषधीय गुण

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Palash Flower Benefits: त्वचा संबंधी रोगों में पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद में बताया गया है कि पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे त्वचा का रूखापन और खुजली भी कम होती है.

सीधी. फागुन आते ही आते ही विंध्य क्षेत्र में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. इसे ग्रामीण क्षेत्र में टेसू के फूल के नाम से भी जाना जाता है. चमकीले लाल और नारंगी रंग के ये फूल दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं. हालांकि लगातार हो रही जंगलों की कटाई के कारण अब पलाश के पेड़ों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है. इसके बावजूद जहां भी पलाश के पेड़ दिखाई देते हैं, वहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है. पलाश के फूल जितने मनमोहक दिखाई देते हैं, उतने ही औषधीय गुणों से भी भरपूर माने जाते हैं. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. छोटे घाव से लेकर त्वचा संबंधी रोगों और कई अन्य समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है.

मध्य प्रदेश के सीधी के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय से ही पलाश के फूलों का उपयोग होली के प्राकृतिक रंग बनाने में किया जाता रहा है. होली के कई दिन पहले लोग इन फूलों को पानी में भिगो देते थे. इसके बाद उन्हें उबालकर ठंडा किया जाता था, जिससे हल्का नारंगी रंग तैयार हो जाता था. यह प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है.

पलाश के बीजों में एंटी वर्म
डॉ संतोष कुमार के अनुसार, पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है.

मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक
उन्होंने कहा कि पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. इससे शरीर का चयापचय बेहतर होता है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है. डॉ संतोष कुमार के मुताबिक, गलत खानपान के कारण जब रक्त दूषित होने लगता है, तब पलाश की छाल का उपयोग खून को साफ करने के लिए किया जाता है. यह शरीर के अंदर से रक्त को शुद्ध करने में मदद करती है और दूषित रक्त से होने वाली बीमारियों से बचाव करती है.

त्वचा संबंधी रोगों में उपयोगी
त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. पलाश के फूल को गुलाब जल के साथ पीसकर घाव पर लगाने से रक्तस्राव रुकने में मदद मिलती है और घाव जल्दी भरने लगता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Palash Flower Benefits: त्वचा संबंधी रोगों में पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद में बताया गया है कि पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे त्वचा का रूखापन और खुजली भी कम होती है.

सीधी. फागुन आते ही आते ही विंध्य क्षेत्र में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. इसे ग्रामीण क्षेत्र में टेसू के फूल के नाम से भी जाना जाता है. चमकीले लाल और नारंगी रंग के ये फूल दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं. हालांकि लगातार हो रही जंगलों की कटाई के कारण अब पलाश के पेड़ों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है. इसके बावजूद जहां भी पलाश के पेड़ दिखाई देते हैं, वहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है. पलाश के फूल जितने मनमोहक दिखाई देते हैं, उतने ही औषधीय गुणों से भी भरपूर माने जाते हैं. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. छोटे घाव से लेकर त्वचा संबंधी रोगों और कई अन्य समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है.

मध्य प्रदेश के सीधी के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय से ही पलाश के फूलों का उपयोग होली के प्राकृतिक रंग बनाने में किया जाता रहा है. होली के कई दिन पहले लोग इन फूलों को पानी में भिगो देते थे. इसके बाद उन्हें उबालकर ठंडा किया जाता था, जिससे हल्का नारंगी रंग तैयार हो जाता था. यह प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है.

पलाश के बीजों में एंटी वर्म
डॉ संतोष कुमार के अनुसार, पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है.

मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक
उन्होंने कहा कि पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. इससे शरीर का चयापचय बेहतर होता है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है. डॉ संतोष कुमार के मुताबिक, गलत खानपान के कारण जब रक्त दूषित होने लगता है, तब पलाश की छाल का उपयोग खून को साफ करने के लिए किया जाता है. यह शरीर के अंदर से रक्त को शुद्ध करने में मदद करती है और दूषित रक्त से होने वाली बीमारियों से बचाव करती है.

त्वचा संबंधी रोगों में उपयोगी
त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. पलाश के फूल को गुलाब जल के साथ पीसकर घाव पर लगाने से रक्तस्राव रुकने में मदद मिलती है और घाव जल्दी भरने लगता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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