Friday, 06 Nov 2026 | 08:39 AM

Trending :

Swarnaprashan: 16 संस्कारों में से जरूरी है स्वर्ण बिंदु प्रसन्न संस्कार, एक घुट्टी पिलाने से बच्चे बनते हैं तेजस्वी

authorimg

Last Updated:

Swarnaprashan Benefits: स्वर्ण प्राशन का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है, जिससे वे अन्य बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं.साथ ही यह उनके संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होता है, जिससे बच्चे अधिक सक्रिय, स्वस्थ और तेजस्वी बनते हैं.

कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा में बदलती जीवनशैली के बीच पारंपरिक संस्कारों का महत्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. बच्चे के जन्म के बाद जहां परिवार विभिन्न संस्कारों को धूमधाम से निभाता है, वहीं स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्कार स्वर्ण बिंदु प्राशन अब लोगों की नजरों से ओझल होता जा रहा है. आयुर्वेद विशेषज्ञ इसे आज भी जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं.

इस विषय पर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार सनातन परंपरा के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है. यह संस्कार जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों को कराया जा सकता है और इसे बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है.

प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा तैयार किए गए स्वर्ण प्राशन के फायदे
डॉ. शर्मा के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले ही वायरस और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए एक विशेष रसायन तैयार किया था, जिसे स्वर्ण प्राशन कहा जाता है. यह रसायन सोने (स्वर्ण) के सूक्ष्म अंश के साथ शहद, ब्राह्मी, अश्वगंधा, गिलोय और शंखपुष्पी जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है. आयुर्वेद में इसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रभावी उपाय माना गया है.

इसके सेवन से बच्चों की बुद्धि, स्मरण शक्ति, पाचन क्षमता और शारीरिक बल में वृद्धि होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लगातार छह माह तक इसका सेवन कराया जाए, तो बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है. वे सुनी हुई बातों को बेहतर तरीके से याद रख पाते हैं और उनका मानसिक विकास भी तेज होता है.

प्राचीन संस्कार को अपनाने की जरूरत
इस संस्कार को कराने का भी एक विशेष समय निर्धारित है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर माह के पुष्य नक्षत्र के दिन बच्चों को यह रसायन पिलाया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ यदि पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को भी अपनाया जाए, तो बच्चों का समग्र विकास बेहतर तरीके से संभव है. इसलिए इस प्राचीन संस्कार को फिर से अपनाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त बन सके.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
तमिलनाडु चुनाव के लिए बीजेपी की लिस्ट जारी, कई दिग्गजों को टिकट, अन्नामलाई का नाम गायब

April 3, 2026/
2:43 pm

भाजपा तमिलनाडु उम्मीदवार सूची 2026: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अपनी 27 जनजातियों...

RPSC Bharti Apply Last Date July 10

June 10, 2026/
4:27 pm

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से निकाली गई राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के कुल 3...

authorimg

May 3, 2026/
3:03 pm

Last Updated:May 03, 2026, 15:03 IST Kanpur News: कानपुर में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. डॉ. चमन...

चुनाव परिणाम 2026 लाइव: बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी का बहिष्कार, बीजेपी दे रही संविधान की दुहाई

May 5, 2026/
6:44 am

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के नतीजे (विधानसभा चुनाव परिणाम 2026) आ गए हैं। बीजेपी...

ग्वालियर में तेज रफ्तार ट्रक टैंकर से टकराया:चालक केबिन में फंसा, लोहे की बॉडी काटकर निकाला गया; हाईवे पर लग गया था जाम

April 18, 2026/
12:05 am

ग्वालियर में तेज रफ्तार से आ रहे एक टैंकर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे पीछे चल रहा ट्रक...

पश्चिम बंगाल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? अमित शाह के इन दो संकेतों से साफ हो गईं पूरी तस्वीरें

May 8, 2026/
1:12 pm

पश्चिम बंगाल में आज भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक आदरणीय है। भाजपा की ओर से अमित शाह...

एक्सक्लूसिव: बंगाल चुनाव से पहले हार गए कांग्रेस नेता, शाह का बड़ा दावा- बीजेपी में आ गए सत्य!

April 22, 2026/
7:07 pm

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को सबसे पहले चरण की वोटिंग से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह...

ICAI CA Final Result 2026 Declared

June 18, 2026/
12:29 pm

11 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ICAI की ओर से ICAI CA Final Result 2026...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Swarnaprashan: 16 संस्कारों में से जरूरी है स्वर्ण बिंदु प्रसन्न संस्कार, एक घुट्टी पिलाने से बच्चे बनते हैं तेजस्वी

authorimg

Last Updated:

Swarnaprashan Benefits: स्वर्ण प्राशन का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत होती है, जिससे वे अन्य बच्चों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं.साथ ही यह उनके संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होता है, जिससे बच्चे अधिक सक्रिय, स्वस्थ और तेजस्वी बनते हैं.

कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा में बदलती जीवनशैली के बीच पारंपरिक संस्कारों का महत्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. बच्चे के जन्म के बाद जहां परिवार विभिन्न संस्कारों को धूमधाम से निभाता है, वहीं स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्कार स्वर्ण बिंदु प्राशन अब लोगों की नजरों से ओझल होता जा रहा है. आयुर्वेद विशेषज्ञ इसे आज भी जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं.

इस विषय पर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार सनातन परंपरा के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है. यह संस्कार जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों को कराया जा सकता है और इसे बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है.

प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा तैयार किए गए स्वर्ण प्राशन के फायदे
डॉ. शर्मा के अनुसार, प्राचीन ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले ही वायरस और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए एक विशेष रसायन तैयार किया था, जिसे स्वर्ण प्राशन कहा जाता है. यह रसायन सोने (स्वर्ण) के सूक्ष्म अंश के साथ शहद, ब्राह्मी, अश्वगंधा, गिलोय और शंखपुष्पी जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है. आयुर्वेद में इसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रभावी उपाय माना गया है.

इसके सेवन से बच्चों की बुद्धि, स्मरण शक्ति, पाचन क्षमता और शारीरिक बल में वृद्धि होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लगातार छह माह तक इसका सेवन कराया जाए, तो बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है. वे सुनी हुई बातों को बेहतर तरीके से याद रख पाते हैं और उनका मानसिक विकास भी तेज होता है.

प्राचीन संस्कार को अपनाने की जरूरत
इस संस्कार को कराने का भी एक विशेष समय निर्धारित है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर माह के पुष्य नक्षत्र के दिन बच्चों को यह रसायन पिलाया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ यदि पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को भी अपनाया जाए, तो बच्चों का समग्र विकास बेहतर तरीके से संभव है. इसलिए इस प्राचीन संस्कार को फिर से अपनाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त बन सके.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.