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रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।

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रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

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अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।

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