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जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान के फुकुओका शहर में महामारियों से बचाव के लिए ‘हाकाता गियन यामाकासा’ उत्सव हुआ। इसकी शुरुआत 1241 में मानी जाती है। मान्यता है कि महामारी के दौरान बौद्ध भिक्षु शूइची कोकुशी (एन्नी) ने पूरे शहर में पवित्र जल का छिड़काव किया, जिसके बाद बीमारी थम गई। उसी घटना की स्मृति में यह परंपरा शुरू हुई। यह उत्सव यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में दर्ज है। इसे देखने के लिए करीब 10 लाख पर्यटक जुटे। उत्सव में दो तरह की झांकियां होती हैं। काजारीयामा करीब 10 मीटर ऊंचे, भव्य और सजावटी झांकी होती हैं, जिन्हें केवल प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। वहीं काकियामा करीब 1 टन वजन की झांकी होती है, जिन्हें पुरुषों के समूह कंधों पर उठाकर शहर की सड़कों पर दौड़ते हैं। इन्हें बनाने में 55 लाख से 2 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। इसके अलावा पारंपरिक पोशाक और अन्य व्यवस्थाओं पर भी लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। गर्मी की वजह से रास्ते में खड़े लोग धावकों पर ठंडा पानी डालते हैं। इससे शरीर ठंडा रहता है और धावकों का उत्साह भी बढ़ता है। दौड़ में हिस्सा लेने वाले पुरुष केवल पारंपरिक सूती जैकेट (मिजू-हैप्पी) और शिमेकोमी नामक विशेष लंगोट पहनते हैं। ऐसा इसलिए ताकि पानी पड़ने के बाद कपड़े भारी न हों और दौड़ने में आसानी रहे।

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