Friday, 17 Jul 2026 | 05:25 PM

Trending :

EXCLUSIVE

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान के फुकुओका शहर में महामारियों से बचाव के लिए ‘हाकाता गियन यामाकासा’ उत्सव हुआ। इसकी शुरुआत 1241 में मानी जाती है। मान्यता है कि महामारी के दौरान बौद्ध भिक्षु शूइची कोकुशी (एन्नी) ने पूरे शहर में पवित्र जल का छिड़काव किया, जिसके बाद बीमारी थम गई। उसी घटना की स्मृति में यह परंपरा शुरू हुई। यह उत्सव यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में दर्ज है। इसे देखने के लिए करीब 10 लाख पर्यटक जुटे। उत्सव में दो तरह की झांकियां होती हैं। काजारीयामा करीब 10 मीटर ऊंचे, भव्य और सजावटी झांकी होती हैं, जिन्हें केवल प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। वहीं काकियामा करीब 1 टन वजन की झांकी होती है, जिन्हें पुरुषों के समूह कंधों पर उठाकर शहर की सड़कों पर दौड़ते हैं। इन्हें बनाने में 55 लाख से 2 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। इसके अलावा पारंपरिक पोशाक और अन्य व्यवस्थाओं पर भी लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। गर्मी की वजह से रास्ते में खड़े लोग धावकों पर ठंडा पानी डालते हैं। इससे शरीर ठंडा रहता है और धावकों का उत्साह भी बढ़ता है। दौड़ में हिस्सा लेने वाले पुरुष केवल पारंपरिक सूती जैकेट (मिजू-हैप्पी) और शिमेकोमी नामक विशेष लंगोट पहनते हैं। ऐसा इसलिए ताकि पानी पड़ने के बाद कपड़े भारी न हों और दौड़ने में आसानी रहे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
RR vs GT Live Score: Follow scorecard and match updates from Sawai Mansingh Stadium in Jaipur. (Picture Credit: Sportzpics)

May 9, 2026/
6:21 pm

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 18:21 IST ईडी ने फर्जी जीएसटी लेनदेन से जुड़े 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले...

इंदौर में शहीदों की स्मृति में निकली मशाल यात्रा:कई मंचों से पुष्प वर्षा कर दी गई श्रद्धांजलि; देशभक्ति के नारों की गूंज

March 24, 2026/
12:37 am

शहीद दिवस के अवसर पर शहर का पश्चिम क्षेत्र देशभक्ति के जज्बे से सराबोर नजर आया। क्रांतिकारी भगतसिंह, सुखदेव थापर...

रणवीर सिंह ने क्या ध्रुव राठी को किया रोस्ट:धुरंधर की आलोचना पर पोस्टर के जरिए दिया जवाब; ससुर के साथ पहली बार एड में दिखे

April 14, 2026/
4:15 pm

रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्मों ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सफलता के बाद सुर्खियों में हैं। अब एक्टर पहली...

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल ₹5 सस्ता हुआ:पेट्रोल ₹409.78 और हाई-स्पीड डीजल ₹409.58 लीटर मिल रहा, भारत में कल ₹3 महंगे हुए थे

May 16, 2026/
1:18 pm

पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर की...

ग्वालियर में मां की लाश के साथ 5दिन रहे भाई-बहन:डेढ़ माह बाद भी कह रहे- मां हमें लेने जरूर आएगी; कीड़े पड़ने पर पुलिस ने बीमार कहकर उठाया था शव

April 8, 2026/
10:17 am

ग्वालियर के टोपी बाजार इलाके में रहने वाली रिटायर्ड क्लर्क उर्मिला भदौरिया (70) की मौत के बाद एक दर्दनाक कहानी...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान में 780 साल पुराना पारंपरिक उत्सव:1 हजार किलो की झांकी उठाकर दौड़े युवा; 10 लाख पर्यटक जुटे

जापान के फुकुओका शहर में महामारियों से बचाव के लिए ‘हाकाता गियन यामाकासा’ उत्सव हुआ। इसकी शुरुआत 1241 में मानी जाती है। मान्यता है कि महामारी के दौरान बौद्ध भिक्षु शूइची कोकुशी (एन्नी) ने पूरे शहर में पवित्र जल का छिड़काव किया, जिसके बाद बीमारी थम गई। उसी घटना की स्मृति में यह परंपरा शुरू हुई। यह उत्सव यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में दर्ज है। इसे देखने के लिए करीब 10 लाख पर्यटक जुटे। उत्सव में दो तरह की झांकियां होती हैं। काजारीयामा करीब 10 मीटर ऊंचे, भव्य और सजावटी झांकी होती हैं, जिन्हें केवल प्रदर्शन के लिए रखा जाता है। वहीं काकियामा करीब 1 टन वजन की झांकी होती है, जिन्हें पुरुषों के समूह कंधों पर उठाकर शहर की सड़कों पर दौड़ते हैं। इन्हें बनाने में 55 लाख से 2 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। इसके अलावा पारंपरिक पोशाक और अन्य व्यवस्थाओं पर भी लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। गर्मी की वजह से रास्ते में खड़े लोग धावकों पर ठंडा पानी डालते हैं। इससे शरीर ठंडा रहता है और धावकों का उत्साह भी बढ़ता है। दौड़ में हिस्सा लेने वाले पुरुष केवल पारंपरिक सूती जैकेट (मिजू-हैप्पी) और शिमेकोमी नामक विशेष लंगोट पहनते हैं। ऐसा इसलिए ताकि पानी पड़ने के बाद कपड़े भारी न हों और दौड़ने में आसानी रहे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.