रायपुरिया क्षेत्र के ग्राम माता पाड़ा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। वासुदेव के भगवान कृष्ण को टोकरी में लेकर पंडाल में प्रवेश करते ही पूरा वातावरण ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर नृत्य कर अपनी खुशी व्यक्त की। व्यास पीठ से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक बालकृष्ण नागर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेजुबान पशुओं की बलि देने से माता प्रसन्न नहीं होतीं; यह केवल एक अंधविश्वास है। नागर ने तर्क दिया कि कोई भी माता अपने बच्चों की बलि स्वीकार नहीं कर सकती। ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए सच्चे मन और निर्मल भाव की आवश्यकता होती है, जिससे वे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। नागर ने जातिवाद के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में सभी हिंदू समान हैं। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रभु ने माता शबरी के झूठे बेर खाकर समाज को समानता का पाठ पढ़ाया था। ईश्वर की दृष्टि में कोई ऊंच-नीच नहीं है और उनकी कृपा सभी भक्तों पर एक समान होती है। जन्मोत्सव के अवसर पर सारंगी, पेटलावद और आसपास के ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर अपनी खुशी व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन भगवान की आरती और माखन-मिश्री के प्रसाद वितरण के साथ हुआ।














































