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कम उम्र में बाल हो रहे हैं सफेद, तो आयुर्वेदिक डॉक्टर ने जानिए कारण और बचाव के आसान उपाय

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कम उम्र में बालों का सफेद होना आज के समय की एक तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है. पहले इसे बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण माना जाता था, लेकिन अब 14 से 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल बाहरी कारणों का परिणाम नहीं है, बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत भी हो सकता है.

कम उम्र में बाल क्यों होते हैं सफेद

आयुर्वेद में समय से पहले बाल सफेद होने को ‘अकाल पल्यता’ कहा जाता है. यह समस्या मुख्य रूप से शरीर के दोषों, विशेषकर पित्त दोष के बढ़ने से जुड़ी होती है. जब पित्त असंतुलित हो जाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ती है जिसका सीधा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है. इससे बालों को काला बनाए रखने वाला पिगमेंट कम होने लगता है और बाल धीरे-धीरे सफेद होने लगते हैं.

इस विषय पर जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी शर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि एक बार बाल सफेद होने की प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो उसे पूरी तरह पहले जैसा काला करना संभव नहीं होता, लेकिन इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि वातावरण को बदलना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन सही खानपान अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

गलत खानपान भी है कारण

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में तीन दोष होते हैं वात, पित्त और कफ. कई मामलों में बाल सफेद होने का कारण जेनेटिक फैक्टर भी होता है, लेकिन गर्मियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इस समस्या को बढ़ा देता है. गुड़, अचार, चटनी, ड्राई फ्रूट्स, चाय और कॉफी जैसे खाद्य पदार्थ पित्त को बढ़ाते हैं, जिससे बालों के सफेद होने की समस्या तेज हो सकती है.

बालों को सफेद होने से बचाने के लिए क्या खाएं

इससे बचाव के लिए ठंडी तासीर वाले, मीठे, कड़वे और कसैले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. जैसे नारियल पानी, खीरा, तरबूज, अनार, आंवला, सौंफ, धनिया, पुदीना, घी और दूध. ये शरीर को ठंडक देते हैं और पित्त दोष को संतुलित रखते हैं, जिससे जलन और एसिडिटी भी कम होती है.

डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि कई लोग सर्दियों में गर्म पानी से नहाते समय सिर पर भी गर्म पानी डालते हैं, जो सही नहीं है. इससे पित्त दोष बढ़ता है और बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं.

क्या है आयुर्वेदिक उपाय

उन्होंने सलाह दी कि बचपन से ही जल नेति अपनाने से भी बालों को सफेद होने से बचाया जा सकता है. जल नेति आयुर्वेद और योग (हठयोग) में वर्णित एक प्राचीन शुद्धिकरण प्रक्रिया है, जिसमें गुनगुने नमक वाले पानी से नासिका मार्ग को साफ किया जाता है. इसमें एक नासिका से पानी डालकर दूसरी नासिका से बाहर निकाला जाता है.

इसके अलावा अनु तेल का नियमित उपयोग भी फायदेमंद है. रोजाना नाक में 2 से 3 बूंद अनु तेल डालने से लाभ मिलता है. साथ ही, बचपन से ही भृंगराज तेल का बालों में उपयोग करने से बाल लंबे समय तक काले और स्वस्थ बने रहते हैं.

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कम उम्र में बालों का सफेद होना आज के समय की एक तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है. पहले इसे बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण माना जाता था, लेकिन अब 14 से 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल बाहरी कारणों का परिणाम नहीं है, बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत भी हो सकता है.

कम उम्र में बाल क्यों होते हैं सफेद

आयुर्वेद में समय से पहले बाल सफेद होने को ‘अकाल पल्यता’ कहा जाता है. यह समस्या मुख्य रूप से शरीर के दोषों, विशेषकर पित्त दोष के बढ़ने से जुड़ी होती है. जब पित्त असंतुलित हो जाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ती है जिसका सीधा असर बालों की जड़ों पर पड़ता है. इससे बालों को काला बनाए रखने वाला पिगमेंट कम होने लगता है और बाल धीरे-धीरे सफेद होने लगते हैं.

इस विषय पर जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी शर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि एक बार बाल सफेद होने की प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो उसे पूरी तरह पहले जैसा काला करना संभव नहीं होता, लेकिन इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि वातावरण को बदलना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन सही खानपान अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

गलत खानपान भी है कारण

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में तीन दोष होते हैं वात, पित्त और कफ. कई मामलों में बाल सफेद होने का कारण जेनेटिक फैक्टर भी होता है, लेकिन गर्मियों में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इस समस्या को बढ़ा देता है. गुड़, अचार, चटनी, ड्राई फ्रूट्स, चाय और कॉफी जैसे खाद्य पदार्थ पित्त को बढ़ाते हैं, जिससे बालों के सफेद होने की समस्या तेज हो सकती है.

बालों को सफेद होने से बचाने के लिए क्या खाएं

इससे बचाव के लिए ठंडी तासीर वाले, मीठे, कड़वे और कसैले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. जैसे नारियल पानी, खीरा, तरबूज, अनार, आंवला, सौंफ, धनिया, पुदीना, घी और दूध. ये शरीर को ठंडक देते हैं और पित्त दोष को संतुलित रखते हैं, जिससे जलन और एसिडिटी भी कम होती है.

डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि कई लोग सर्दियों में गर्म पानी से नहाते समय सिर पर भी गर्म पानी डालते हैं, जो सही नहीं है. इससे पित्त दोष बढ़ता है और बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं.

क्या है आयुर्वेदिक उपाय

उन्होंने सलाह दी कि बचपन से ही जल नेति अपनाने से भी बालों को सफेद होने से बचाया जा सकता है. जल नेति आयुर्वेद और योग (हठयोग) में वर्णित एक प्राचीन शुद्धिकरण प्रक्रिया है, जिसमें गुनगुने नमक वाले पानी से नासिका मार्ग को साफ किया जाता है. इसमें एक नासिका से पानी डालकर दूसरी नासिका से बाहर निकाला जाता है.

इसके अलावा अनु तेल का नियमित उपयोग भी फायदेमंद है. रोजाना नाक में 2 से 3 बूंद अनु तेल डालने से लाभ मिलता है. साथ ही, बचपन से ही भृंगराज तेल का बालों में उपयोग करने से बाल लंबे समय तक काले और स्वस्थ बने रहते हैं.

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