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कहीं आपकी किचन का नॉन स्टिक तवा जहर तो नहीं उगल रहा? इन 3 संकेतों से करें पहचान, तुरंत निकालकर फेंक दें

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Non-Stick Cookware Risks: नॉन-स्टिक तवा किचन में सुविधाजनक जरूर होता है, लेकिन खराब होने पर यह सेहत के लिए खतरनाक बन सकता है. तवा की कोटिंग निकलना, खाना चिपकना और बदबू आना इसके खराब होने के संकेत हैं. ऐसे में समय पर तवे को बदलना जरूरी है, ताकि जहरीले केमिकल्स से होने वाले नुकसान से बचा जा सके.

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नॉन-स्टिक तवा खराब हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए.

Non-Stick Pan Health Risks: एक जमाने में मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे स्टील और एलुमिनियम के बर्तनों का ट्रेंड बढ़ने लगा. अब तमाम लोग नॉन स्टिक बर्तन इस्तेमाल कर रहे हैं. आजकल लगभग हर घर की रसोई में नॉन-स्टिक तवा, कड़ाही और पैन का इस्तेमाल किया जा रहा है. कम तेल में खाना बनाना, जल्दी साफ हो जाना और समय की बचत, ये सभी वजहें इसे बेहद लोकप्रिय बनाती हैं. खासकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग नॉन-स्टिक बर्तनों को ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन सुविधा के साथ-साथ इसकी सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना भी उतना ही जरूरी है. अगर इन बर्तनों का सही तरीके से उपयोग न किया जाए या ये खराब हो जाएं, तो यही नॉन-स्टिक तवा धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए खतरा बन सकता है.

यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि नॉन-स्टिक बर्तनों की सतह पर एक खास कोटिंग होती है, जो खाना चिपकने से रोकती है और कम तेल में कुकिंग को आसान बनाती है. समय के साथ या गलत उपयोग के कारण यह कोटिंग घिसने लगती है या टूट जाती है. जब ऐसा होता है, तो इसके छोटे-छोटे कण खाने में मिल सकते हैं, जो शरीर के अंदर जाकर नुकसान पहुंचा सकते हैं. बहुत ज्यादा तापमान पर यह कोटिंग जहरीले धुएं भी छोड़ सकती है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए खराब नॉन-स्टिक बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ये 3 संकेत दिखें, तो नॉन स्टिक तवा न करें यूज

कोटिंग का छिलना या खुरचना : अगर आपके तवे की सतह पर खरोंचें दिखाई देने लगी हैं या उसकी कोटिंग जगह-जगह से उतर रही है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वह अब सुरक्षित नहीं है. यह स्थिति अक्सर मेटल के चम्मच, ज्यादा रगड़ने या लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण होती है. ऐसी हालत में कोटिंग के कण खाने में मिल सकते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं. इसलिए जैसे ही ऐसी खरोंचें दिखें, तुरंत उस तवे को बदल देना चाहिए.

खाना बार-बार चिपकना : नॉन-स्टिक तवे की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि उसमें खाना आसानी से बनता है और चिपकता नहीं. अगर आप नोटिस करें कि अब रोटी, डोसा या सब्जी तवे पर चिपकने लगी है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसकी नॉन-स्टिक कोटिंग खराब हो चुकी है. इस स्थिति में न केवल खाना खराब बनता है, बल्कि उसे निकालने के लिए ज्यादा तेल और जोर लगाना पड़ता है, जिससे बर्तन और जल्दी खराब हो सकता है.

तवे का रंग बदलना या बदबू आना : अगर आपके नॉन-स्टिक तवे का रंग फीका पड़ गया है, उस पर दाग-धब्बे दिखने लगे हैं या गर्म करने पर अजीब सी गंध आने लगती है, तो यह भी एक चेतावनी संकेत है. यह दर्शाता है कि तवे की सतह में केमिकल बदलाव हो रहे हैं. ऐसे बर्तन से निकलने वाले धुएं और गंध स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, खासकर अगर लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जाए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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नॉन-स्टिक तवा खराब हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए.

Non-Stick Pan Health Risks: एक जमाने में मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे स्टील और एलुमिनियम के बर्तनों का ट्रेंड बढ़ने लगा. अब तमाम लोग नॉन स्टिक बर्तन इस्तेमाल कर रहे हैं. आजकल लगभग हर घर की रसोई में नॉन-स्टिक तवा, कड़ाही और पैन का इस्तेमाल किया जा रहा है. कम तेल में खाना बनाना, जल्दी साफ हो जाना और समय की बचत, ये सभी वजहें इसे बेहद लोकप्रिय बनाती हैं. खासकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग नॉन-स्टिक बर्तनों को ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन सुविधा के साथ-साथ इसकी सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना भी उतना ही जरूरी है. अगर इन बर्तनों का सही तरीके से उपयोग न किया जाए या ये खराब हो जाएं, तो यही नॉन-स्टिक तवा धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए खतरा बन सकता है.

यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि नॉन-स्टिक बर्तनों की सतह पर एक खास कोटिंग होती है, जो खाना चिपकने से रोकती है और कम तेल में कुकिंग को आसान बनाती है. समय के साथ या गलत उपयोग के कारण यह कोटिंग घिसने लगती है या टूट जाती है. जब ऐसा होता है, तो इसके छोटे-छोटे कण खाने में मिल सकते हैं, जो शरीर के अंदर जाकर नुकसान पहुंचा सकते हैं. बहुत ज्यादा तापमान पर यह कोटिंग जहरीले धुएं भी छोड़ सकती है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए खराब नॉन-स्टिक बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

ये 3 संकेत दिखें, तो नॉन स्टिक तवा न करें यूज

कोटिंग का छिलना या खुरचना : अगर आपके तवे की सतह पर खरोंचें दिखाई देने लगी हैं या उसकी कोटिंग जगह-जगह से उतर रही है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वह अब सुरक्षित नहीं है. यह स्थिति अक्सर मेटल के चम्मच, ज्यादा रगड़ने या लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण होती है. ऐसी हालत में कोटिंग के कण खाने में मिल सकते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं. इसलिए जैसे ही ऐसी खरोंचें दिखें, तुरंत उस तवे को बदल देना चाहिए.

खाना बार-बार चिपकना : नॉन-स्टिक तवे की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि उसमें खाना आसानी से बनता है और चिपकता नहीं. अगर आप नोटिस करें कि अब रोटी, डोसा या सब्जी तवे पर चिपकने लगी है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसकी नॉन-स्टिक कोटिंग खराब हो चुकी है. इस स्थिति में न केवल खाना खराब बनता है, बल्कि उसे निकालने के लिए ज्यादा तेल और जोर लगाना पड़ता है, जिससे बर्तन और जल्दी खराब हो सकता है.

तवे का रंग बदलना या बदबू आना : अगर आपके नॉन-स्टिक तवे का रंग फीका पड़ गया है, उस पर दाग-धब्बे दिखने लगे हैं या गर्म करने पर अजीब सी गंध आने लगती है, तो यह भी एक चेतावनी संकेत है. यह दर्शाता है कि तवे की सतह में केमिकल बदलाव हो रहे हैं. ऐसे बर्तन से निकलने वाले धुएं और गंध स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, खासकर अगर लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जाए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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