Thursday, 28 May 2026 | 05:02 AM

Trending :

EXCLUSIVE

किस उम्र के बच्चों को ऑटिज्म का खतरा ज्यादा? क्या इसका परमानेंट इलाज संभव, जानें 5 बड़ी बातें

authorimg

Last Updated:

World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो छोटे बच्चों को प्रभावित करता है. डॉक्टर्स की मानें तो यह कोई लाइलाज समस्या नहीं है. सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए, तो सही थेरेपी के जरिए इस डिसऑर्डर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. हालांकि इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है.

Zoom

ऑटिज्म का सही समय पर पता लग जाए, तो थेरेपी के जरिए इस डिसऑर्डर को काफी सुधारा जा सकता है.

All About Autism Spectrum Disorder: हर साल 2 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है. यह खास दिन ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के बारे में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से सेलिब्रेट किया जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चे के दिमाग के विकास और उसके व्यवहार, सीखने, बोलने और सामाजिक जुड़ाव की क्षमता को प्रभावित करता है. यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें बच्चे दुनिया को अलग तरीके से समझते और प्रतिक्रिया देते हैं. इसके लक्षण आमतौर पर जीवन के शुरुआती 2 से 3 वर्षों में दिखाई देने लगते हैं.

नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज कुमार ने News18 को बताया कि ऑटिज्म डिसऑर्डर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन इसके पीछे कई फैक्टर्स हो सकते हैं. जेनेटिक फैक्टर इस डिसऑर्डर का खतरा बढ़ा देता है. अगर परिवार में पहले से किसी को यह समस्या हो, तो ऑटिज्म का जोखिम बढ़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क के विकास में अंतर होने से बच्चों में ऑटिज्म का रिस्क बढ़ जाता है. प्रेग्नेंसी में मां को इंफेक्शन, पोषण की कमी या कुछ दवाओं का असर हो, तो इससे बच्चे का ब्रेन डेवलपमेंट बुरी तरह प्रभावित होता है. इसके अलावा समय से पहले जन्मे बच्चे और कम वजन वाले बच्चों में इसका रिस्क ज्यादा होता है. लड़कों में ऑटिज्म लड़कियों की तुलना में ज्यादा पाया जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या इसका परमानेंट इलाज संभव है?

डॉक्टर नीरज ने बताया कि ऑटिज्म को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं है, लेकिन सही थेरेपी से बच्चे के जीवन में बड़ा सुधार लाया जा सकता है. बिहेवियरल थेरेपी बच्चों के व्यवहार और सामाजिक कौशल सुधारने में मदद करती है. स्पीच थेरेपी बोलने और समझने की क्षमता बेहतर कर सकती है. ऑक्यूपेशनल थेरेपी रोजमर्रा के काम करने की क्षमता विकसित करने के लिए दी जाती है और स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम बच्चे की जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराते हैं. जितना जल्दी ऑटिज्म के लक्षण पहचान लिए जाएं और थेरेपी शुरू की जाए, उतना बेहतर परिणाम मिलता है. सही इलाज से बच्चा सामान्य जिंदगी जी सकता है.

क्या ऑटिज्म से बचाव हो सकता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक ऑटिज्म को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है. गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार और नियमित जांच, फोलिक एसिड और जरूरी सप्लीमेंट्स का सेवन, शराब, धूम्रपान और हानिकारक दवाओं से दूरी बनाकर उसका ब्रेन डेवलपमेंट बेहतर रखा जा सकता है. इसके अलावा बच्चे के विकास पर नजर रखें और देरी होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. समय-समय पर टीकाकरण और हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी होता है. माता-पिता की जागरुकता, समय पर हस्तक्षेप और विशेषज्ञ की मदद से ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे भी खुशहाल जीवन जी सकते हैं.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ग्वालियर में युवक लापता, मां ने एसएसपी से गुहार लगाई:मारपीट के बाद गायब हुआ किशोर, फायरिंग का वीडियो भी सौंपा

April 1, 2026/
4:33 pm

ग्वालियर में एक किशोर की मारपीट के बाद लापता होने का मामला सामने आया है। शहर के लाइन नंबर 8...

रतलाम में उधारी के रुपए चुकाने बाइक चोरी की:खुद की बाइक गिरवी रखी, रतलाम का निकला चोर; 24 घंटे में पकड़ाया

April 27, 2026/
8:45 pm

रतलाम पुलिस ने एक बाइक चोर को पकड़ा है। चोर ने उधारी के रुपए चुकाने के लिए बाइक चोरी की।...

google-color.svg

May 18, 2026/
11:34 am

दूध को “संपूर्ण आहार” माना जाता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं. लेकिन...

South Africa Vs New Zealand Live Cricket Score, T20 World Cup 2026 Semifinal: Stay updated with SA vs NZ Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Kolkata. (Picture Credit: AFP)

March 4, 2026/
4:16 pm

आखरी अपडेट:मार्च 04, 2026, 16:16 IST बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने राजनीति के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे...

मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

April 11, 2026/
12:14 am

मध्य प्रदेश में विभागीय अफसरों की लापरवाही से होने वाली सरकार की फजीहत और मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना...

रैपर बादशाह पर FIR, गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित:हरियाणा पुलिस बोली- लुक आउट सर्कुलर जारी होगा; सिंगर बोले- बेटा समझकर माफ कर दो

March 7, 2026/
8:40 am

बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह पर न्यू रिलीज सॉन्ग ‘टटीरी’ को लेकर हरियाणा में 3 मामले दर्ज हुए हैं। हरियाणा पुलिस ने...

IPL 2026 Final Venue Suspense

May 5, 2026/
1:51 pm

3 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL 2026 फाइनल वेन्यू को लेकर असमंजस बना हुआ है। बेंगलुरु में राजनीतिक विवाद के...

authorimg

February 19, 2026/
2:42 pm

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में नॉर्थ-वेस्ट जिला पुलिस...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

किस उम्र के बच्चों को ऑटिज्म का खतरा ज्यादा? क्या इसका परमानेंट इलाज संभव, जानें 5 बड़ी बातें

authorimg

Last Updated:

World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो छोटे बच्चों को प्रभावित करता है. डॉक्टर्स की मानें तो यह कोई लाइलाज समस्या नहीं है. सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए, तो सही थेरेपी के जरिए इस डिसऑर्डर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. हालांकि इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है.

Zoom

ऑटिज्म का सही समय पर पता लग जाए, तो थेरेपी के जरिए इस डिसऑर्डर को काफी सुधारा जा सकता है.

All About Autism Spectrum Disorder: हर साल 2 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है. यह खास दिन ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के बारे में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से सेलिब्रेट किया जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चे के दिमाग के विकास और उसके व्यवहार, सीखने, बोलने और सामाजिक जुड़ाव की क्षमता को प्रभावित करता है. यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें बच्चे दुनिया को अलग तरीके से समझते और प्रतिक्रिया देते हैं. इसके लक्षण आमतौर पर जीवन के शुरुआती 2 से 3 वर्षों में दिखाई देने लगते हैं.

नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज कुमार ने News18 को बताया कि ऑटिज्म डिसऑर्डर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन इसके पीछे कई फैक्टर्स हो सकते हैं. जेनेटिक फैक्टर इस डिसऑर्डर का खतरा बढ़ा देता है. अगर परिवार में पहले से किसी को यह समस्या हो, तो ऑटिज्म का जोखिम बढ़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क के विकास में अंतर होने से बच्चों में ऑटिज्म का रिस्क बढ़ जाता है. प्रेग्नेंसी में मां को इंफेक्शन, पोषण की कमी या कुछ दवाओं का असर हो, तो इससे बच्चे का ब्रेन डेवलपमेंट बुरी तरह प्रभावित होता है. इसके अलावा समय से पहले जन्मे बच्चे और कम वजन वाले बच्चों में इसका रिस्क ज्यादा होता है. लड़कों में ऑटिज्म लड़कियों की तुलना में ज्यादा पाया जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या इसका परमानेंट इलाज संभव है?

डॉक्टर नीरज ने बताया कि ऑटिज्म को पूरी तरह ठीक करना संभव नहीं है, लेकिन सही थेरेपी से बच्चे के जीवन में बड़ा सुधार लाया जा सकता है. बिहेवियरल थेरेपी बच्चों के व्यवहार और सामाजिक कौशल सुधारने में मदद करती है. स्पीच थेरेपी बोलने और समझने की क्षमता बेहतर कर सकती है. ऑक्यूपेशनल थेरेपी रोजमर्रा के काम करने की क्षमता विकसित करने के लिए दी जाती है और स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम बच्चे की जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराते हैं. जितना जल्दी ऑटिज्म के लक्षण पहचान लिए जाएं और थेरेपी शुरू की जाए, उतना बेहतर परिणाम मिलता है. सही इलाज से बच्चा सामान्य जिंदगी जी सकता है.

क्या ऑटिज्म से बचाव हो सकता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक ऑटिज्म को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है. गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार और नियमित जांच, फोलिक एसिड और जरूरी सप्लीमेंट्स का सेवन, शराब, धूम्रपान और हानिकारक दवाओं से दूरी बनाकर उसका ब्रेन डेवलपमेंट बेहतर रखा जा सकता है. इसके अलावा बच्चे के विकास पर नजर रखें और देरी होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. समय-समय पर टीकाकरण और हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी होता है. माता-पिता की जागरुकता, समय पर हस्तक्षेप और विशेषज्ञ की मदद से ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे भी खुशहाल जीवन जी सकते हैं.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.