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खतरे की घंटी! शरीर में दिखें ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकता है प्री-डायबिटीज; जानें लक्षण और बचाव का तरीका

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Signs of insulin resistance : डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो दबे पांव आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज होने से पहले हमारा शरीर हमें आगाह करता है? इस स्थिति को प्री-डायबिटीज (Prediabetes) कहा जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि प्री-डायबिटीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ की शुरुआत माना जा सकता है. हेल्‍थलाइन के मुताबिक, अगर समय रहते इसे पहचान लिया जाए, तो आप खुद को गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं प्री-डायबिटीज से जुड़ी हर जरूरी बात.
प्री-डायबिटीज में भले ही आपको बीमार महसूस न हो, लेकिन आपकी त्वचा कुछ संकेत दे सकती है.

शरीर पर दिखने वाला इकलौता संकेत:
प्री-डायबिटीज में भले ही आपको बीमार महसूस न हो, लेकिन आपकी त्वचा कुछ संकेत दे सकती है. कई लोगों में एकेंथोसिस निग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) नामक स्थिति देखी जाती है. इसमें त्वचा के कुछ हिस्से काले, मोटे और मखमली (velvety) होने लगते हैं. यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा संकेत है. यह कालापन अक्सर गर्दन के पीछे का हिस्सा, बगल (Armpits), कोहनी और घुटने, उंगलियों के जोड़ (Knuckles) दिखाई देता है.

कब प्री-डायबिटीज बन जाता है टाइप-2 डायबिटीज
अगर आपको प्री-डायबिटीज डायग्नोज़ हुआ है और आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस होने लगें, तो समझ लें कि स्थिति गंभीर हो रही है:

बार-बार प्यास लगना: गला सूखना और बहुत ज्यादा पानी पीना.
अधिक पेशाब आना: खासकर रात के समय बार-बार टॉयलेट जाना.
थकान और धुंधली दृष्टि: हर वक्त सुस्ती महसूस होना और आंखों के आगे धुंधलापन आना.
घाव का न भरना: शरीर पर लगी चोट या खरोंच के ठीक होने में लंबा समय लगना.

कैसे पहचानें? ब्लड शुगर का गणित
प्री-डायबिटीज को पहचानने के लिए आपको अपनी ब्लड शुगर रिपोर्ट को समझना होगा:

नॉर्मल (Fasting): 99 mg/dL या उससे कम.
प्री-डायबिटीज: 100 से 125 mg/dL के बीच.
डायबिटीज: 125 mg/dL से ज्यादा.

किसे है सबसे ज्यादा खतरा? (Risk Factors)
शोध बताते हैं कि प्री-डायबिटीज लाइफस्टाइल और जेनेटिक्स से गहराई से जुड़ा है. CDC के आंकड़ों के अनुसार, कुछ विशेष समूहों में इसकी दर अधिक देखी गई है:

-45 साल से अधिक उम्र और 25 से ज्यादा BMI वाले लोग.
-पुरुषों में 40 इंच और महिलाओं में 35 इंच से अधिक कमर होने पर जोखिम बढ़ जाता है.
अफ्रीकी अमेरिकी, एशियाई अमेरिकी (Asian American), हिस्पैनिक और पैसिफिक आइलैंडर समुदायों में यह दर अधिक पाई गई है, जिसका एक बड़ा कारण स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच की कमी भी हो सकता है.
-पीसीओएस (PCOS), हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैटी लीवर की समस्या.

कैसे करें बचाव? (Prevention Tips)-
अच्छी खबर यह है कि प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है. CDC के अनुसार, यदि आपका वजन अधिक है, तो अपने कुल वजन का मात्र 5% से 7% हिस्सा कम करके आप टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक टाल सकते हैं.

फाइबर युक्त भोजन: अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स शामिल करें.
मीठे से दूरी: सोडा, मीठी चाय और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स का सेवन सीमित करें.
शारीरिक सक्रियता: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट (रोजाना लगभग 30 मिनट) एक्सरसाइज करें.
तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान (Meditation) का सहारा लें.

प्री-डायबिटीज एक चेतावनी है, अंत नहीं. अगर आप अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, तो आप एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकते हैं. यदि आपको संदेह है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और ब्लड टेस्ट करवाएं.

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Signs of insulin resistance : डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो दबे पांव आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज होने से पहले हमारा शरीर हमें आगाह करता है? इस स्थिति को प्री-डायबिटीज (Prediabetes) कहा जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि प्री-डायबिटीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ की शुरुआत माना जा सकता है. हेल्‍थलाइन के मुताबिक, अगर समय रहते इसे पहचान लिया जाए, तो आप खुद को गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं प्री-डायबिटीज से जुड़ी हर जरूरी बात.
प्री-डायबिटीज में भले ही आपको बीमार महसूस न हो, लेकिन आपकी त्वचा कुछ संकेत दे सकती है.

शरीर पर दिखने वाला इकलौता संकेत:
प्री-डायबिटीज में भले ही आपको बीमार महसूस न हो, लेकिन आपकी त्वचा कुछ संकेत दे सकती है. कई लोगों में एकेंथोसिस निग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) नामक स्थिति देखी जाती है. इसमें त्वचा के कुछ हिस्से काले, मोटे और मखमली (velvety) होने लगते हैं. यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा संकेत है. यह कालापन अक्सर गर्दन के पीछे का हिस्सा, बगल (Armpits), कोहनी और घुटने, उंगलियों के जोड़ (Knuckles) दिखाई देता है.

कब प्री-डायबिटीज बन जाता है टाइप-2 डायबिटीज
अगर आपको प्री-डायबिटीज डायग्नोज़ हुआ है और आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस होने लगें, तो समझ लें कि स्थिति गंभीर हो रही है:

बार-बार प्यास लगना: गला सूखना और बहुत ज्यादा पानी पीना.
अधिक पेशाब आना: खासकर रात के समय बार-बार टॉयलेट जाना.
थकान और धुंधली दृष्टि: हर वक्त सुस्ती महसूस होना और आंखों के आगे धुंधलापन आना.
घाव का न भरना: शरीर पर लगी चोट या खरोंच के ठीक होने में लंबा समय लगना.

कैसे पहचानें? ब्लड शुगर का गणित
प्री-डायबिटीज को पहचानने के लिए आपको अपनी ब्लड शुगर रिपोर्ट को समझना होगा:

नॉर्मल (Fasting): 99 mg/dL या उससे कम.
प्री-डायबिटीज: 100 से 125 mg/dL के बीच.
डायबिटीज: 125 mg/dL से ज्यादा.

किसे है सबसे ज्यादा खतरा? (Risk Factors)
शोध बताते हैं कि प्री-डायबिटीज लाइफस्टाइल और जेनेटिक्स से गहराई से जुड़ा है. CDC के आंकड़ों के अनुसार, कुछ विशेष समूहों में इसकी दर अधिक देखी गई है:

-45 साल से अधिक उम्र और 25 से ज्यादा BMI वाले लोग.
-पुरुषों में 40 इंच और महिलाओं में 35 इंच से अधिक कमर होने पर जोखिम बढ़ जाता है.
अफ्रीकी अमेरिकी, एशियाई अमेरिकी (Asian American), हिस्पैनिक और पैसिफिक आइलैंडर समुदायों में यह दर अधिक पाई गई है, जिसका एक बड़ा कारण स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच की कमी भी हो सकता है.
-पीसीओएस (PCOS), हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैटी लीवर की समस्या.

कैसे करें बचाव? (Prevention Tips)-
अच्छी खबर यह है कि प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है. CDC के अनुसार, यदि आपका वजन अधिक है, तो अपने कुल वजन का मात्र 5% से 7% हिस्सा कम करके आप टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक टाल सकते हैं.

फाइबर युक्त भोजन: अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स शामिल करें.
मीठे से दूरी: सोडा, मीठी चाय और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स का सेवन सीमित करें.
शारीरिक सक्रियता: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट (रोजाना लगभग 30 मिनट) एक्सरसाइज करें.
तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान (Meditation) का सहारा लें.

प्री-डायबिटीज एक चेतावनी है, अंत नहीं. अगर आप अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, तो आप एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकते हैं. यदि आपको संदेह है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और ब्लड टेस्ट करवाएं.

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