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World Bank Ajay Banga & Nikhil Kamath Discuss Youth DQ Success Mantra India

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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट अजय बंगा ने कहा कि विकासशील देशों में गरीबी मिटानी है तो नौकरियां देनी होंगी। उन्होंने पीपल बाय डब्ल्यूटीएफ पर ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के सीईओ निखिल कामथ के साथ बातचीत में ग्लोबल इकोनॉमी, भारत की प्रगति और युवाओं के भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में आए बदलावों की तारीफ की, तो वहीं देश में पर्यटन की कम संख्या पर चिंता भी जताई। बंगा ने अपने करियर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक ‘आर्मी ब्रैट’ से लेकर वर्ल्ड बैंक के शीर्ष पद तक का उनका सफर लचीलेपन और सही फैसलों पर टिका रहा।

पढ़िए इस बातचीत के संपादित अंश…

सवाल: आप भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य को कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं भारत के भविष्य को लेकर बहुत आशावादी हूं। पिछले 20-25 सालों में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर-चाहे वो सड़कें हों, पोर्ट्स हों या बिजली-पानी-पूरी तरह बदल गया है। जब लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं होती हैं और वे भविष्य को लेकर सकारात्मक होते हैं, तो खपत बढ़ती है। भारत अभी उसी दौर में है जहां मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है। समृद्धि के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा ही सबसे मजबूत स्तंभ हैं और भारत सही दिशा में है।

सवाल: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए टूरिज्म सेक्टर की क्या भूमिका हो सकती है?

जवाब: भारत के पास पहाड़ों से लेकर समुद्र तट, बेहतरीन खाना और समृद्ध संस्कृति है। इसके बावजूद यहां साल भर में 2 करोड़ (20 मिलियन) से भी कम पर्यटक आते हैं। यह भारत की असली क्षमता के मुकाबले बहुत कम है। अगर हम टूरिज्म पर सही से फोकस करें, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

सवाल: आपने सफलता के लिए IQ और EQ के साथ DQ की बात की है, यह ‘DQ’ क्या है?

जवाब: पहले लोग सिर्फ बुद्धिमानी (IQ) को देखते थे, फिर टीम वर्क और भावनाओं (EQ) को समझने का दौर आया। लेकिन आज के दौर में ‘DQ’ यानी Decency Quotient (शालीनता का स्तर) सबसे जरूरी है। इसका मतलब है कि आप कितने शालीन और ईमानदार इंसान हैं। क्या लोग आपके साथ काम करना चाहते हैं? क्या आप दूसरों को आगे बढ़ने का फेयर चांस देते हैं? सादगी और दूसरों के प्रति सम्मान ही आज की सबसे बड़ी लीडरशिप स्किल है।

सवाल: नौकरी को लेकर आपके पास क्या आंकड़े हैं?

जवाब: यह एक गंभीर चुनौती है। अगले 15 सालों में उभरते बाजारों में करीब 120 करोड़ युवा कामकाजी उम्र (18 साल) के हो जाएंगे। लेकिन, वर्तमान स्थिति के हिसाब से हम सिर्फ 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा कर पाएंगे। यह 80 करोड़ नौकरियों का जो गैप है, वह दुनिया में अस्थिरता और हिंसा का कारण बन सकता है। इसीलिए वर्ल्ड बैंक का पूरा फोकस अब ‘आशा और अवसर’ पैदा करने पर है।

सवाल: वर्ल्ड बैंक कैसे काम करती है?

जवाब: वर्ल्ड बैंक सिर्फ पैसे देने वाला बैंक नहीं, बल्कि एक ‘नॉलेज बैंक’ है जिसके पास 80 साल का अनुभव है। इसके पांच मुख्य अंग हैं। IBRD मध्यम आय वाले देशों को लोन देता है, जबकि IDA सबसे गरीब देशों को अनुदान देता है। IFC प्राइवेट सेक्टर में निवेश बढ़ाता है और MIGA राजनीतिक जोखिमों का बीमा करता है। हम हर साल लगभग 120 बिलियन डॉलर बाजार में लगाते हैं। हमारी ‘ट्रिपल-A’ रेटिंग की वजह से हम बाजार से सस्ता पैसा जुटा पाते हैं।

सवाल: गरीबी दूर करने के लिए आप किस मॉडल को सबसे प्रभावी मानते हैं?

जवाब: गरीबी को खत्म करने का सबसे अचूक हथियार ‘नौकरी’ है। मेरा मानना है कि अमीरों से छीनकर गरीबों को देने के बजाय हमें ‘नदी का जल स्तर’ बढ़ाना चाहिए ताकि सभी नावें ऊंची उठ सकें। सरकार का काम सही नियम और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जबकि नौकरियां पैदा करना प्राइवेट सेक्टर, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों का काम है। नौकरी से सिर्फ पैसा नहीं आता, व्यक्ति में आत्मविश्वास और उम्मीद भी जगती है।

सवाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से क्या नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है?

जवाब: विकसित देशों में ‘Big AI’ सर्विस सेक्टर और कोडिंग के लिए चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए ‘स्माॉल AI’ वरदान बनेगा। ऐसा AI जो फोन पर बिना इंटरनेट के किसान को कीटनाशक की जानकारी दे सके या डॉक्टर को बीमारी पहचानने में मदद करे, वह असली बदलाव लाएगा। अगर हम युवाओं को सही स्किल्स दें, तो तकनीक बोझ नहीं, बल्कि तरक्की का रास्ता बनेगी।

सवाल: भारतीय मूल के CEO दुनिया की बड़ी कंपनियों को लीड कर रहे हैं, इसका राज क्या है?

जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हैं।

  • पहला- विविधता: भारत में हम अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच पलते हैं, जिससे हम हर तरह के लोगों के साथ काम करना सीख जाते हैं।
  • दूसरा- जुगाड़ (लचीलापन): इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के बीच हमने हमेशा ‘प्लान-बी’ और ‘प्लान-सी’ तैयार रखना सीखा है।
  • तीसरा- रिस्क लेने की क्षमता: सफलता 50% किस्मत है और 50% इस पर निर्भर है कि आप मिले हुए मौके पर कितना बड़ा रिस्क लेते हैं।

सवाल: युवाओं के लिए आपकी क्या विशेष सलाह है?

जवाब: हमेशा फ्लेक्सिबल और अडॉप्टेबल रहें। कभी भी ‘आर्मचेयर क्रिटिक’ न बनें, यानी बाहर बैठकर सिर्फ बुराई न करें, बल्कि मैदान में उतरकर बदलाव का हिस्सा बनें। और सबसे जरूरी बात-हमेशा आशावादी रहें।

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उन्होंने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में आए बदलावों की तारीफ की, तो वहीं देश में पर्यटन की कम संख्या पर चिंता भी जताई। बंगा ने अपने करियर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक ‘आर्मी ब्रैट’ से लेकर वर्ल्ड बैंक के शीर्ष पद तक का उनका सफर लचीलेपन और सही फैसलों पर टिका रहा।

पढ़िए इस बातचीत के संपादित अंश…

सवाल: आप भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य को कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं भारत के भविष्य को लेकर बहुत आशावादी हूं। पिछले 20-25 सालों में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर-चाहे वो सड़कें हों, पोर्ट्स हों या बिजली-पानी-पूरी तरह बदल गया है। जब लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं होती हैं और वे भविष्य को लेकर सकारात्मक होते हैं, तो खपत बढ़ती है। भारत अभी उसी दौर में है जहां मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है। समृद्धि के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा ही सबसे मजबूत स्तंभ हैं और भारत सही दिशा में है।

सवाल: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए टूरिज्म सेक्टर की क्या भूमिका हो सकती है?

जवाब: भारत के पास पहाड़ों से लेकर समुद्र तट, बेहतरीन खाना और समृद्ध संस्कृति है। इसके बावजूद यहां साल भर में 2 करोड़ (20 मिलियन) से भी कम पर्यटक आते हैं। यह भारत की असली क्षमता के मुकाबले बहुत कम है। अगर हम टूरिज्म पर सही से फोकस करें, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

सवाल: आपने सफलता के लिए IQ और EQ के साथ DQ की बात की है, यह ‘DQ’ क्या है?

जवाब: पहले लोग सिर्फ बुद्धिमानी (IQ) को देखते थे, फिर टीम वर्क और भावनाओं (EQ) को समझने का दौर आया। लेकिन आज के दौर में ‘DQ’ यानी Decency Quotient (शालीनता का स्तर) सबसे जरूरी है। इसका मतलब है कि आप कितने शालीन और ईमानदार इंसान हैं। क्या लोग आपके साथ काम करना चाहते हैं? क्या आप दूसरों को आगे बढ़ने का फेयर चांस देते हैं? सादगी और दूसरों के प्रति सम्मान ही आज की सबसे बड़ी लीडरशिप स्किल है।

सवाल: नौकरी को लेकर आपके पास क्या आंकड़े हैं?

जवाब: यह एक गंभीर चुनौती है। अगले 15 सालों में उभरते बाजारों में करीब 120 करोड़ युवा कामकाजी उम्र (18 साल) के हो जाएंगे। लेकिन, वर्तमान स्थिति के हिसाब से हम सिर्फ 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा कर पाएंगे। यह 80 करोड़ नौकरियों का जो गैप है, वह दुनिया में अस्थिरता और हिंसा का कारण बन सकता है। इसीलिए वर्ल्ड बैंक का पूरा फोकस अब ‘आशा और अवसर’ पैदा करने पर है।

सवाल: वर्ल्ड बैंक कैसे काम करती है?

जवाब: वर्ल्ड बैंक सिर्फ पैसे देने वाला बैंक नहीं, बल्कि एक ‘नॉलेज बैंक’ है जिसके पास 80 साल का अनुभव है। इसके पांच मुख्य अंग हैं। IBRD मध्यम आय वाले देशों को लोन देता है, जबकि IDA सबसे गरीब देशों को अनुदान देता है। IFC प्राइवेट सेक्टर में निवेश बढ़ाता है और MIGA राजनीतिक जोखिमों का बीमा करता है। हम हर साल लगभग 120 बिलियन डॉलर बाजार में लगाते हैं। हमारी ‘ट्रिपल-A’ रेटिंग की वजह से हम बाजार से सस्ता पैसा जुटा पाते हैं।

सवाल: गरीबी दूर करने के लिए आप किस मॉडल को सबसे प्रभावी मानते हैं?

जवाब: गरीबी को खत्म करने का सबसे अचूक हथियार ‘नौकरी’ है। मेरा मानना है कि अमीरों से छीनकर गरीबों को देने के बजाय हमें ‘नदी का जल स्तर’ बढ़ाना चाहिए ताकि सभी नावें ऊंची उठ सकें। सरकार का काम सही नियम और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जबकि नौकरियां पैदा करना प्राइवेट सेक्टर, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों का काम है। नौकरी से सिर्फ पैसा नहीं आता, व्यक्ति में आत्मविश्वास और उम्मीद भी जगती है।

सवाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से क्या नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है?

जवाब: विकसित देशों में ‘Big AI’ सर्विस सेक्टर और कोडिंग के लिए चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए ‘स्माॉल AI’ वरदान बनेगा। ऐसा AI जो फोन पर बिना इंटरनेट के किसान को कीटनाशक की जानकारी दे सके या डॉक्टर को बीमारी पहचानने में मदद करे, वह असली बदलाव लाएगा। अगर हम युवाओं को सही स्किल्स दें, तो तकनीक बोझ नहीं, बल्कि तरक्की का रास्ता बनेगी।

सवाल: भारतीय मूल के CEO दुनिया की बड़ी कंपनियों को लीड कर रहे हैं, इसका राज क्या है?

जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हैं।

  • पहला- विविधता: भारत में हम अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के बीच पलते हैं, जिससे हम हर तरह के लोगों के साथ काम करना सीख जाते हैं।
  • दूसरा- जुगाड़ (लचीलापन): इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के बीच हमने हमेशा ‘प्लान-बी’ और ‘प्लान-सी’ तैयार रखना सीखा है।
  • तीसरा- रिस्क लेने की क्षमता: सफलता 50% किस्मत है और 50% इस पर निर्भर है कि आप मिले हुए मौके पर कितना बड़ा रिस्क लेते हैं।

सवाल: युवाओं के लिए आपकी क्या विशेष सलाह है?

जवाब: हमेशा फ्लेक्सिबल और अडॉप्टेबल रहें। कभी भी ‘आर्मचेयर क्रिटिक’ न बनें, यानी बाहर बैठकर सिर्फ बुराई न करें, बल्कि मैदान में उतरकर बदलाव का हिस्सा बनें। और सबसे जरूरी बात-हमेशा आशावादी रहें।

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