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जंगली दूधी घास के चमत्कारी फायदे, बाहर निकाल फेंके पेट के कीड़े, बालों को करें मजबूत, अस्थमा का देसी इलाज

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घास जैसा दिखने वाला दूधिया पौधा आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना जाता है. यह खांसी, अस्थमा, पेट के कीड़े और खाज खुजली में असरदार है. आसानी से मिलने वाला यह पौधा सस्ता और उपयोगी होने के कारण गरीबों का मेडिकल स्टोर कहलाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसे पहचान नहीं पाते.

मध्य प्रदेश के प्राकृतिक क्षेत्रों में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जिनके फायदे जानकर हैरानी होती है. इन्हीं में से एक है दूधी घास का पौधा, जो देखने में बिल्कुल साधारण घास जैसा लगता है, लेकिन इसके गुण बेहद असाधारण हैं. यह पौधा खांसी, अस्थमा से लेकर पेट और त्वचा संबंधी कई समस्याओं में कारगर माना जाता है.

आयुष अधिकारी डॉ. नरेंद्र पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि दूधी का पौधा देशभर में आसानी से मिल जाता है, बस इसकी सही पहचान होना जरूरी है. इसकी पहचान करना भी मुश्किल नहीं है, क्योंकि इसके बीच में छोटे-छोटे बीज होते हैं, जो इसे अन्य पौधों से अलग बनाते हैं. इसकी उपलब्धता और औषधीय गुणों के कारण इसे गरीबों का मेडिकल स्टोर भी कहा जाता है. हालांकि, जानकारी के अभाव में लोग इसे साधारण घास समझकर उखाड़कर फेंक देते हैं.

पेट के लिए काफी फायदेमंद
डॉ. नरेंद्र के अनुसार, बच्चों में पेट के कीड़े एक आम समस्या है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में दूधी के पत्तों का पाउडर बनाकर उसमें मिश्री और सौंफ मिलाकर रात में सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है. इसके अलावा, यह पेट को साफ रखने में भी मदद करता है. दूधी का पौधा अल्सरेटिव कोलाइटिस और रक्तस्राव जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. रोजाना करीब 3 ग्राम दूधी के पत्तों का पाउडर खाली पेट लेने से इन समस्याओं में राहत मिल सकती है.

बालों और अस्थमा के लिए बेहद कारगर औषधि
बालों के लिए भी दूधी का उपयोग फायदेमंद बताया गया है. यह बालों के झड़ने और समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने में सहायक है. गंजेपन से परेशान लोगों के लिए दूधी और कनेर के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से बालों की मजबूती बढ़ती है और झड़ना कम होता है. खांसी और अस्थमा के मरीजों के लिए भी दूधी एक उपयोगी औषधि मानी जाती है. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन करने से सांस की नली की सूजन कम होती है और खांसी में राहत मिलती है.

इसके अलावा, दूधी में मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण त्वचा रोगों जैसे दाद, खाज और खुजली को दूर करने में मदद करते हैं. इसके पौधे से निकलने वाले दूध को प्रभावित स्थान पर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं में सुधार होता है. कुल मिलाकर, दूधी घास का यह साधारण दिखने वाला पौधा कई गंभीर बीमारियों में लाभकारी साबित हो सकता है, जरूरत है तो सिर्फ इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी की.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें

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घास जैसा दिखने वाला दूधिया पौधा आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना जाता है. यह खांसी, अस्थमा, पेट के कीड़े और खाज खुजली में असरदार है. आसानी से मिलने वाला यह पौधा सस्ता और उपयोगी होने के कारण गरीबों का मेडिकल स्टोर कहलाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसे पहचान नहीं पाते.

मध्य प्रदेश के प्राकृतिक क्षेत्रों में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जिनके फायदे जानकर हैरानी होती है. इन्हीं में से एक है दूधी घास का पौधा, जो देखने में बिल्कुल साधारण घास जैसा लगता है, लेकिन इसके गुण बेहद असाधारण हैं. यह पौधा खांसी, अस्थमा से लेकर पेट और त्वचा संबंधी कई समस्याओं में कारगर माना जाता है.

आयुष अधिकारी डॉ. नरेंद्र पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि दूधी का पौधा देशभर में आसानी से मिल जाता है, बस इसकी सही पहचान होना जरूरी है. इसकी पहचान करना भी मुश्किल नहीं है, क्योंकि इसके बीच में छोटे-छोटे बीज होते हैं, जो इसे अन्य पौधों से अलग बनाते हैं. इसकी उपलब्धता और औषधीय गुणों के कारण इसे गरीबों का मेडिकल स्टोर भी कहा जाता है. हालांकि, जानकारी के अभाव में लोग इसे साधारण घास समझकर उखाड़कर फेंक देते हैं.

पेट के लिए काफी फायदेमंद
डॉ. नरेंद्र के अनुसार, बच्चों में पेट के कीड़े एक आम समस्या है, जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में दूधी के पत्तों का पाउडर बनाकर उसमें मिश्री और सौंफ मिलाकर रात में सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है. इसके अलावा, यह पेट को साफ रखने में भी मदद करता है. दूधी का पौधा अल्सरेटिव कोलाइटिस और रक्तस्राव जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. रोजाना करीब 3 ग्राम दूधी के पत्तों का पाउडर खाली पेट लेने से इन समस्याओं में राहत मिल सकती है.

बालों और अस्थमा के लिए बेहद कारगर औषधि
बालों के लिए भी दूधी का उपयोग फायदेमंद बताया गया है. यह बालों के झड़ने और समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने में सहायक है. गंजेपन से परेशान लोगों के लिए दूधी और कनेर के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से बालों की मजबूती बढ़ती है और झड़ना कम होता है. खांसी और अस्थमा के मरीजों के लिए भी दूधी एक उपयोगी औषधि मानी जाती है. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित सेवन करने से सांस की नली की सूजन कम होती है और खांसी में राहत मिलती है.

इसके अलावा, दूधी में मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण त्वचा रोगों जैसे दाद, खाज और खुजली को दूर करने में मदद करते हैं. इसके पौधे से निकलने वाले दूध को प्रभावित स्थान पर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं में सुधार होता है. कुल मिलाकर, दूधी घास का यह साधारण दिखने वाला पौधा कई गंभीर बीमारियों में लाभकारी साबित हो सकता है, जरूरत है तो सिर्फ इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी की.

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