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Raj Babbar Birthday Interesting Facts; Insaf Ka Tarazu Rape Scene

Raj Babbar Birthday Interesting Facts; Insaf Ka Tarazu Rape Scene

13 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय

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राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को हुआ था।

महाभारत बनाने वाले बी.आर. चोपड़ा इस शो से पहले एक फिल्म बना रहे थे। नाम था ‘इंसाफ का तराजू’। कोई भी बड़ा एक्टर फिल्म में विलेन रमेश गुप्ता बनने के लिए तैयार नहीं था, जिसे जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के किरदारों का बलात्कार करते दिखाया जाना था। हर एक्टर को डर था कि यह रोल उसकी इमेज बिगाड़ देगा।

तभी एक न्यूकमर एक्टर ने इस रोल के लिए हामी भर दी। फिल्म रिलीज होते ही ब्लॉकबस्टर हो गई। उस नए एक्टर का अभिनय इतना दमदार था कि जब वह मां के साथ फिल्म के प्रीमियर पर पहुंचा, तो फिल्म देखने के बाद हर कोई उससे नफरत करने लगा।

रेप सीन का ऐसा असर हुआ कि प्रीमियर में ही नाराज लोग शक्लें बनाते हुए गालियां देने लगे। यह सब देखकर मां वहीं रो पड़ीं और कहा, “बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन ऐसे काम मत किया करो।”

वो एक्टर थे, राज बब्बर, जो आज 74 साल के हो चुके हैं। जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी और करियर से जुड़े कुछ अनसुने किस्से-

राज बब्बर का जन्म पंजाबी परिवार में हुआ

राज बब्बर का जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ। उनके दादा और पिता दोनों रेलवे में काम करते थे। परिवार विभाजन के बाद आगरा के टूंडला आ बसा था।

बचपन किराए के मकानों में बीता। उन्होंने आगरा कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से ग्रेजुएशन किया। NSD में मेथड एक्टिंग की ट्रेनिंग ने उन्हें स्ट्रीट थिएटर से लेकर बड़े पर्दे तक की राह दिखाई।

राज बब्बर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा के फैज-ए-आम इंटर कॉलेज से की थी।

राज बब्बर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा के फैज-ए-आम इंटर कॉलेज से की थी।

फिल्मों में एक्टिंग करने मुंबई आने के बाद शुरुआत में उन्होंने करीब 14 फिल्मों में बहुत छोटे-छोटे रोल किए थे। उनकी पहली फिल्म ‘शारदा’ थी, जिसमें उनका सिर्फ एक डायलॉग था।

वहीं, उन्हें बड़ा ब्रेक 1980 में बी.आर. चोपड़ा की फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ से मिला। इसमें राज बब्बर ने रेपिस्ट रमेश गुप्ता का रोल किया।

फिल्म देख नाराज थीं मां, खुशी के आंसू समझकर छू लिए पैर

फिल्म के प्रीमियर में राज बब्बर अपनी मां के साथ दिल्ली गए। रेप सीन को देखकर मां की आंखों में आंसू आ गए थे।

राज बब्बर ने टीवी शो ‘आप की अदालत’ में बताया था, “जब फिल्म का प्रीमियर हुआ, तो मैं अपनी मां के साथ विज्ञान भवन (दिल्ली) में उसे देखने के लिए गया था। जब हम फिल्म देखकर इंटरवल में बैठे थे, तो हमें किसी ने पहचाना नहीं। हम फिल्म देखते रहे। उसके बाद एंड में मुझे बहुत गालियां पड़ रही थीं। इंटरवल में भी हर आदमी मुझे गाली दे रहा था। खासकर औरतें बहुत गालियां दे रही थीं।”

उन्होंने आगे कहा था, “तो मेरी मां को बहुत बुरा लगा। जब हम टैक्सी में बैठ गए, तो मेरी मां रोने लगी। मुझे लगा कि खुशी के आंसू आ रहे हैं कि उनके बेटे ने फिल्म में काम किया है। मैंने खुशी में मां के पांव छू लिए। तब उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन तू ऐसा काम मत कर।'”

एक्टर ने आगे कहा था, “तब मुझे लगा कि मेरी ड्रामा स्कूल की ट्रेनिंग और मेरी पूरी मेहनत सफल हो गई। मां के इन शब्दों से मुझे लगा कि मुझे कामयाबी मिल गई। मेरी मां ने भी समझा कि मैं ऐसा ही काम करता हूं। अगर ऐसा न करूं, तो मैं अपने उस रोल में सफल नहीं हुआ।”

राज बब्बर का ‘निकाह’ (1982) में सलमा आगा और दीपक पराशर के साथ निभाया गया रोल यादगार रहा। ‘आज की आवाज’ (1984) में स्मिता पाटिल के साथ प्रोफेसर का रोल, जहां वे विजिलांटे बन जाते हैं, ने उन्हें क्रिटिकल अक्लेम दिलाया। इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन मिला।

राज बब्बर अपने करियर में कई फिल्मों में विलेन के रोल में नजर आए। इनमें ‘इंसाफ का तराजू’ (1980), ‘साजिश’ (1988), ‘आंखें’ (1993), ‘दलाल’ (1993), ‘अंदाज’ (1994), ‘द गैम्बलर’ (1995), ‘याराना’ (1995), ‘बरसात’ (1995), ‘जिद्दी’ (1997), ‘गुंडागर्दी’ (1997), ‘दाग: द फायर’ (1999) और ‘इंडियन’ (2001) जैसी कई फिल्में शामिल हैं।

मुस्लिम पत्नी का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था परिवार

राज बब्बर और उनकी पहली पत्नी नादिरा जहीर की लव स्टोरी रंगमंच से शुरू होकर जीवन के कठिन इम्तिहानों तक पहुंची। NSD में हुई पहली मुलाकात धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई। उस समय नादिरा, राज बब्बर की सीनियर थीं और नाटकों का डायरेक्शन करती थीं। नादिरा के लिखे एक नाटक में राज बब्बर ने एक्टिंग की थी।

नादिरा, राज बब्बर से चार साल बड़ी थीं और मुस्लिम परिवार से थीं, जबकि राज पंजाबी हिंदू थे। शादी के समय राज बब्बर का परिवार चाहता था कि नादिरा धर्म बदलकर निर्मला या निर्देश जैसा नाम अपना ले, लेकिन राज बब्बर ने साफ कह दिया, “नादिरा हैं, तो नादिरा ही रहेंगी।”

उन्होंने न धर्म परिवर्तन कराया और न ही नाम बदला। इस फैसले में राज बब्बर के पिता ने भी उनका पूरा साथ दिया था। दोनों ने 1975 में बिना किसी धर्म परिवर्तन के गुरुद्वारे में आनंद कारज रस्म के तहत शादी की थी। इस शादी से दोनों के दो बच्चे जूही और आर्य हुए।

राज बब्बर की पत्नी नादिरा ने 'सक्कू बाई', 'दयाशंकर की डायरी', 'जी जैसी आपकी मर्जी' और 'शाबाश अनारकली' जैसे कई नाटक लिखे हैं।

राज बब्बर की पत्नी नादिरा ने ‘सक्कू बाई’, ‘दयाशंकर की डायरी’, ‘जी जैसी आपकी मर्जी’ और ‘शाबाश अनारकली’ जैसे कई नाटक लिखे हैं।

मौत से पहले ही स्मिता ने कहा था- ज्यादा दिन साथ नहीं रहूंगी

फिल्मी दुनिया में कदम रखने के बाद राज बब्बर की मुलाकात एक्ट्रेस स्मिता पाटिल से हुई। दोनों फिल्म ‘भीगी पलकें’ (1982) की शूटिंग के दौरान करीब आए। यह रिश्ता इतना गहरा हुआ कि राज बब्बर ने अपनी पहली पत्नी और बच्चों को छोड़कर 1983 में स्मिता से शादी कर ली। हालांकि, 1986 में स्मिता ने बेटे प्रतीक (प्रतीक बब्बर) को जन्म दिया और डिलीवरी के दौरान हुई दिक्कतों की वजह से उनकी मौत हो गई।

स्मिता पाटिल ने मौत से कुछ महीनों पहले ही अपनी मौत की भविष्यवाणी भी की थी। उन्होंने कई बार महेश भट्ट से कहा था कि वह ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं हैं, क्योंकि उनके हाथों की लकीरों में जीवन रेखा बहुत छोटी थी।

स्मिता पति राज बब्बर से भी कहती थीं, “मैं ज्यादा दिनों तक आपका साथ नहीं निभा सकूंगी।” इस पर वह अक्सर गुस्से में उन्हें चुप करवा देते थे। ऐसे में स्मिता अपने मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत से कहती थीं, “मैं जब मर जाऊं, तो मुझे नई-नवेली दुल्हन की तरह सजाकर उठाना।”

स्मिता पाटिल के निधन ने राज बब्बर को भीतर तक झकझोर दिया। ऐसे कठिन समय में नादिरा ने शिकायतों से ऊपर उठकर, बीती कड़वाहटों को पीछे छोड़, राज बब्बर को फिर से अपने जीवन में जगह दी।

राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने 'भीगी पलकें' (1982), 'आज की आवाज' (1984), 'अंगारे' (1986) और 'वारिस' (1988) जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था।

राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने ‘भीगी पलकें’ (1982), ‘आज की आवाज’ (1984), ‘अंगारे’ (1986) और ‘वारिस’ (1988) जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था।

बेटे ने शादी में राज बब्बर को नहीं बुलाया

राज बब्बर और स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक के रिश्ते में पिछले कुछ सालों से काफी दूरियां आ गई हैं। जब स्मिता पाटिल का निधन हुआ, तब प्रतीक केवल 15 दिन के थे। जिसके बाद प्रतीक का पालन-पोषण उनके नाना-नानी ने किया।

फरवरी 2025 में प्रतीक ने एक्ट्रेस प्रिया बनर्जी से दूसरी शादी की, लेकिन इस इवेंट में उन्होंने राज बब्बर और अपने सौतेले भाई-बहनों को इनवाइट नहीं किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने नाम से ‘बब्बर’ सरनेम हटाकर आधिकारिक तौर पर ‘प्रतीक स्मिता पाटिल’ कर लिया।

हाल ही में राज बब्बर की पहली पत्नी से बेटे आर्य ने दूसरी पत्नी से बेटे प्रतीक पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पिता की संपत्ति और पैसे का फायदा उठाया।

विक्की लालवानी से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमें समझ ही नहीं आया कि अपनी पूर्व पत्नी से तलाक का मामला सुलझते ही उसने अचानक हमसे संपर्क करना क्यों बंद कर दिया। मैंने उसे कई मैसेज किए, कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।”

आर्य ने कहा था, “जब तुम्हारा (प्रतीक) करियर अच्छा नहीं चल रहा होता और गुजारा करने के लिए पापा से जेब खर्च चाहिए होता है, तब वो तुम्हारे पिता होते हैं। जब तुम्हें उस घर में रहना होता है, जो तुम्हारे पिता ने स्मिता मां के लिए खरीदा था, तब भी वो तुम्हारे पिता होते हैं। जब तुम्हें सारे फायदे चाहिए होते हैं, तब भी वो तुम्हारे पिता होते हैं, लेकिन जब समाज के सामने उन्हें अपना पिता मानने और सम्मान देने की बारी आती है, तब वो तुम्हारे पिता नहीं रह जाते।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत दुखद है कि जिस स्मिता मां के लिए मेरे पिता ने अपना परिवार छोड़ा था, आज उसी स्मिता मां का बेटा उन्हें अपना पिता मानने को तैयार नहीं है।”

प्रतीक बब्बर (बाईं) और आर्य बब्बर (दाईं) के साथ राज बब्बर की पुरानी तस्वीर।

प्रतीक बब्बर (बाईं) और आर्य बब्बर (दाईं) के साथ राज बब्बर की पुरानी तस्वीर।

शाहरुख ने राज बब्बर से मजेदार सवाल पूछा था

शाहरुख खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) की कैंटीन चलाते थे, जहां बचपन में स्कूल के बाद शाहरुख घंटों बिताते थे और वहीं उनकी मुलाकात राज बब्बर से भी होती थी। शाहरुख राज बब्बर को प्यार से ‘बब्बर शेर अंकल’ कहकर बुलाते थे।

आप की अदालत में शाहरुख ने मजाक में कहा था कि राज बब्बर से उन्होंने शरारतें करना भी सीखा था।

एक किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा था कि एक प्ले में किसिंग सीन था। वो बड़े रियल लाइफ प्ले हुआ करते थे, तो रोहिणी जी (रोहिणी हट्टंगड़ी) के साथ उनका (राज बब्बर) किसिंग सीन था। तो मैंने एक दिन उनसे बोला, “अंकल, अंकल, आप सच में उनको किस करते हो?” तो कहते, “बेटा, जाकर आंटी से पूछ लो। वो बताएंगी तुमको।”

शाहरुख ने आगे कहा था कि उन्होंने मुझे काफी प्यार किया। ये नहीं कह रहा कि उन्होंने मुझे बदमाशी सिखाई, लेकिन मुझको बहुत प्यार किया।

राज बब्बर और शाहरुख खान ने फिल्म 'माया मेमसाब' में काम किया।

राज बब्बर और शाहरुख खान ने फिल्म ‘माया मेमसाब’ में काम किया।

सलमान ने सरप्राइज में लग्जरी कार गिफ्ट की थी

सलमान खान की फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ में राज बब्बर ने करीना कपूर के पिता का किरदार निभाया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस रोल के लिए सलमान खान से कोई फीस भी नहीं ली थी। हालांकि, शूटिंग पूरी होने के आखिरी दिन सलमान ने राज बब्बर को बिना बताए एक लग्जरी फोर-व्हीलर कार गिफ्ट कर दी थी। सलमान के इस सरप्राइज और दरियादिली से राज बब्बर इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों में आंसू आ गए।

साल 2011 में आई फिल्म 'बॉडीगार्ड' में सलमान ने लवली सिंह और राज बब्बर ने सरताज राणा का किरदार निभाया था।

साल 2011 में आई फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ में सलमान ने लवली सिंह और राज बब्बर ने सरताज राणा का किरदार निभाया था।

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एक लड़का, जिसके पिता तमिल फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर थे। पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे को फिल्मों का हीरो बनना था। जब पिता ने फिल्मों में आने से मना किया, तो वह घर में एक चिट्ठी छोड़कर निकल गया-‘मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना।’ परिवार में हड़कंप मच गया। बाद में वह पास के एक थिएटर में मिला और पिता उसे घर ले आए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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Raj Babbar Birthday Interesting Facts; Insaf Ka Tarazu Rape Scene

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13 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय

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राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को हुआ था।

महाभारत बनाने वाले बी.आर. चोपड़ा इस शो से पहले एक फिल्म बना रहे थे। नाम था ‘इंसाफ का तराजू’। कोई भी बड़ा एक्टर फिल्म में विलेन रमेश गुप्ता बनने के लिए तैयार नहीं था, जिसे जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के किरदारों का बलात्कार करते दिखाया जाना था। हर एक्टर को डर था कि यह रोल उसकी इमेज बिगाड़ देगा।

तभी एक न्यूकमर एक्टर ने इस रोल के लिए हामी भर दी। फिल्म रिलीज होते ही ब्लॉकबस्टर हो गई। उस नए एक्टर का अभिनय इतना दमदार था कि जब वह मां के साथ फिल्म के प्रीमियर पर पहुंचा, तो फिल्म देखने के बाद हर कोई उससे नफरत करने लगा।

रेप सीन का ऐसा असर हुआ कि प्रीमियर में ही नाराज लोग शक्लें बनाते हुए गालियां देने लगे। यह सब देखकर मां वहीं रो पड़ीं और कहा, “बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन ऐसे काम मत किया करो।”

वो एक्टर थे, राज बब्बर, जो आज 74 साल के हो चुके हैं। जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी और करियर से जुड़े कुछ अनसुने किस्से-

राज बब्बर का जन्म पंजाबी परिवार में हुआ

राज बब्बर का जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ। उनके दादा और पिता दोनों रेलवे में काम करते थे। परिवार विभाजन के बाद आगरा के टूंडला आ बसा था।

बचपन किराए के मकानों में बीता। उन्होंने आगरा कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से ग्रेजुएशन किया। NSD में मेथड एक्टिंग की ट्रेनिंग ने उन्हें स्ट्रीट थिएटर से लेकर बड़े पर्दे तक की राह दिखाई।

राज बब्बर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा के फैज-ए-आम इंटर कॉलेज से की थी।

राज बब्बर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई आगरा के फैज-ए-आम इंटर कॉलेज से की थी।

फिल्मों में एक्टिंग करने मुंबई आने के बाद शुरुआत में उन्होंने करीब 14 फिल्मों में बहुत छोटे-छोटे रोल किए थे। उनकी पहली फिल्म ‘शारदा’ थी, जिसमें उनका सिर्फ एक डायलॉग था।

वहीं, उन्हें बड़ा ब्रेक 1980 में बी.आर. चोपड़ा की फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ से मिला। इसमें राज बब्बर ने रेपिस्ट रमेश गुप्ता का रोल किया।

फिल्म देख नाराज थीं मां, खुशी के आंसू समझकर छू लिए पैर

फिल्म के प्रीमियर में राज बब्बर अपनी मां के साथ दिल्ली गए। रेप सीन को देखकर मां की आंखों में आंसू आ गए थे।

राज बब्बर ने टीवी शो ‘आप की अदालत’ में बताया था, “जब फिल्म का प्रीमियर हुआ, तो मैं अपनी मां के साथ विज्ञान भवन (दिल्ली) में उसे देखने के लिए गया था। जब हम फिल्म देखकर इंटरवल में बैठे थे, तो हमें किसी ने पहचाना नहीं। हम फिल्म देखते रहे। उसके बाद एंड में मुझे बहुत गालियां पड़ रही थीं। इंटरवल में भी हर आदमी मुझे गाली दे रहा था। खासकर औरतें बहुत गालियां दे रही थीं।”

उन्होंने आगे कहा था, “तो मेरी मां को बहुत बुरा लगा। जब हम टैक्सी में बैठ गए, तो मेरी मां रोने लगी। मुझे लगा कि खुशी के आंसू आ रहे हैं कि उनके बेटे ने फिल्म में काम किया है। मैंने खुशी में मां के पांव छू लिए। तब उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन तू ऐसा काम मत कर।'”

एक्टर ने आगे कहा था, “तब मुझे लगा कि मेरी ड्रामा स्कूल की ट्रेनिंग और मेरी पूरी मेहनत सफल हो गई। मां के इन शब्दों से मुझे लगा कि मुझे कामयाबी मिल गई। मेरी मां ने भी समझा कि मैं ऐसा ही काम करता हूं। अगर ऐसा न करूं, तो मैं अपने उस रोल में सफल नहीं हुआ।”

राज बब्बर का ‘निकाह’ (1982) में सलमा आगा और दीपक पराशर के साथ निभाया गया रोल यादगार रहा। ‘आज की आवाज’ (1984) में स्मिता पाटिल के साथ प्रोफेसर का रोल, जहां वे विजिलांटे बन जाते हैं, ने उन्हें क्रिटिकल अक्लेम दिलाया। इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का नॉमिनेशन मिला।

राज बब्बर अपने करियर में कई फिल्मों में विलेन के रोल में नजर आए। इनमें ‘इंसाफ का तराजू’ (1980), ‘साजिश’ (1988), ‘आंखें’ (1993), ‘दलाल’ (1993), ‘अंदाज’ (1994), ‘द गैम्बलर’ (1995), ‘याराना’ (1995), ‘बरसात’ (1995), ‘जिद्दी’ (1997), ‘गुंडागर्दी’ (1997), ‘दाग: द फायर’ (1999) और ‘इंडियन’ (2001) जैसी कई फिल्में शामिल हैं।

मुस्लिम पत्नी का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था परिवार

राज बब्बर और उनकी पहली पत्नी नादिरा जहीर की लव स्टोरी रंगमंच से शुरू होकर जीवन के कठिन इम्तिहानों तक पहुंची। NSD में हुई पहली मुलाकात धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई। उस समय नादिरा, राज बब्बर की सीनियर थीं और नाटकों का डायरेक्शन करती थीं। नादिरा के लिखे एक नाटक में राज बब्बर ने एक्टिंग की थी।

नादिरा, राज बब्बर से चार साल बड़ी थीं और मुस्लिम परिवार से थीं, जबकि राज पंजाबी हिंदू थे। शादी के समय राज बब्बर का परिवार चाहता था कि नादिरा धर्म बदलकर निर्मला या निर्देश जैसा नाम अपना ले, लेकिन राज बब्बर ने साफ कह दिया, “नादिरा हैं, तो नादिरा ही रहेंगी।”

उन्होंने न धर्म परिवर्तन कराया और न ही नाम बदला। इस फैसले में राज बब्बर के पिता ने भी उनका पूरा साथ दिया था। दोनों ने 1975 में बिना किसी धर्म परिवर्तन के गुरुद्वारे में आनंद कारज रस्म के तहत शादी की थी। इस शादी से दोनों के दो बच्चे जूही और आर्य हुए।

राज बब्बर की पत्नी नादिरा ने 'सक्कू बाई', 'दयाशंकर की डायरी', 'जी जैसी आपकी मर्जी' और 'शाबाश अनारकली' जैसे कई नाटक लिखे हैं।

राज बब्बर की पत्नी नादिरा ने ‘सक्कू बाई’, ‘दयाशंकर की डायरी’, ‘जी जैसी आपकी मर्जी’ और ‘शाबाश अनारकली’ जैसे कई नाटक लिखे हैं।

मौत से पहले ही स्मिता ने कहा था- ज्यादा दिन साथ नहीं रहूंगी

फिल्मी दुनिया में कदम रखने के बाद राज बब्बर की मुलाकात एक्ट्रेस स्मिता पाटिल से हुई। दोनों फिल्म ‘भीगी पलकें’ (1982) की शूटिंग के दौरान करीब आए। यह रिश्ता इतना गहरा हुआ कि राज बब्बर ने अपनी पहली पत्नी और बच्चों को छोड़कर 1983 में स्मिता से शादी कर ली। हालांकि, 1986 में स्मिता ने बेटे प्रतीक (प्रतीक बब्बर) को जन्म दिया और डिलीवरी के दौरान हुई दिक्कतों की वजह से उनकी मौत हो गई।

स्मिता पाटिल ने मौत से कुछ महीनों पहले ही अपनी मौत की भविष्यवाणी भी की थी। उन्होंने कई बार महेश भट्ट से कहा था कि वह ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं हैं, क्योंकि उनके हाथों की लकीरों में जीवन रेखा बहुत छोटी थी।

स्मिता पति राज बब्बर से भी कहती थीं, “मैं ज्यादा दिनों तक आपका साथ नहीं निभा सकूंगी।” इस पर वह अक्सर गुस्से में उन्हें चुप करवा देते थे। ऐसे में स्मिता अपने मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत से कहती थीं, “मैं जब मर जाऊं, तो मुझे नई-नवेली दुल्हन की तरह सजाकर उठाना।”

स्मिता पाटिल के निधन ने राज बब्बर को भीतर तक झकझोर दिया। ऐसे कठिन समय में नादिरा ने शिकायतों से ऊपर उठकर, बीती कड़वाहटों को पीछे छोड़, राज बब्बर को फिर से अपने जीवन में जगह दी।

राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने 'भीगी पलकें' (1982), 'आज की आवाज' (1984), 'अंगारे' (1986) और 'वारिस' (1988) जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था।

राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने ‘भीगी पलकें’ (1982), ‘आज की आवाज’ (1984), ‘अंगारे’ (1986) और ‘वारिस’ (1988) जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया था।

बेटे ने शादी में राज बब्बर को नहीं बुलाया

राज बब्बर और स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक के रिश्ते में पिछले कुछ सालों से काफी दूरियां आ गई हैं। जब स्मिता पाटिल का निधन हुआ, तब प्रतीक केवल 15 दिन के थे। जिसके बाद प्रतीक का पालन-पोषण उनके नाना-नानी ने किया।

फरवरी 2025 में प्रतीक ने एक्ट्रेस प्रिया बनर्जी से दूसरी शादी की, लेकिन इस इवेंट में उन्होंने राज बब्बर और अपने सौतेले भाई-बहनों को इनवाइट नहीं किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने नाम से ‘बब्बर’ सरनेम हटाकर आधिकारिक तौर पर ‘प्रतीक स्मिता पाटिल’ कर लिया।

हाल ही में राज बब्बर की पहली पत्नी से बेटे आर्य ने दूसरी पत्नी से बेटे प्रतीक पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पिता की संपत्ति और पैसे का फायदा उठाया।

विक्की लालवानी से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमें समझ ही नहीं आया कि अपनी पूर्व पत्नी से तलाक का मामला सुलझते ही उसने अचानक हमसे संपर्क करना क्यों बंद कर दिया। मैंने उसे कई मैसेज किए, कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।”

आर्य ने कहा था, “जब तुम्हारा (प्रतीक) करियर अच्छा नहीं चल रहा होता और गुजारा करने के लिए पापा से जेब खर्च चाहिए होता है, तब वो तुम्हारे पिता होते हैं। जब तुम्हें उस घर में रहना होता है, जो तुम्हारे पिता ने स्मिता मां के लिए खरीदा था, तब भी वो तुम्हारे पिता होते हैं। जब तुम्हें सारे फायदे चाहिए होते हैं, तब भी वो तुम्हारे पिता होते हैं, लेकिन जब समाज के सामने उन्हें अपना पिता मानने और सम्मान देने की बारी आती है, तब वो तुम्हारे पिता नहीं रह जाते।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत दुखद है कि जिस स्मिता मां के लिए मेरे पिता ने अपना परिवार छोड़ा था, आज उसी स्मिता मां का बेटा उन्हें अपना पिता मानने को तैयार नहीं है।”

प्रतीक बब्बर (बाईं) और आर्य बब्बर (दाईं) के साथ राज बब्बर की पुरानी तस्वीर।

प्रतीक बब्बर (बाईं) और आर्य बब्बर (दाईं) के साथ राज बब्बर की पुरानी तस्वीर।

शाहरुख ने राज बब्बर से मजेदार सवाल पूछा था

शाहरुख खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) की कैंटीन चलाते थे, जहां बचपन में स्कूल के बाद शाहरुख घंटों बिताते थे और वहीं उनकी मुलाकात राज बब्बर से भी होती थी। शाहरुख राज बब्बर को प्यार से ‘बब्बर शेर अंकल’ कहकर बुलाते थे।

आप की अदालत में शाहरुख ने मजाक में कहा था कि राज बब्बर से उन्होंने शरारतें करना भी सीखा था।

एक किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा था कि एक प्ले में किसिंग सीन था। वो बड़े रियल लाइफ प्ले हुआ करते थे, तो रोहिणी जी (रोहिणी हट्टंगड़ी) के साथ उनका (राज बब्बर) किसिंग सीन था। तो मैंने एक दिन उनसे बोला, “अंकल, अंकल, आप सच में उनको किस करते हो?” तो कहते, “बेटा, जाकर आंटी से पूछ लो। वो बताएंगी तुमको।”

शाहरुख ने आगे कहा था कि उन्होंने मुझे काफी प्यार किया। ये नहीं कह रहा कि उन्होंने मुझे बदमाशी सिखाई, लेकिन मुझको बहुत प्यार किया।

राज बब्बर और शाहरुख खान ने फिल्म 'माया मेमसाब' में काम किया।

राज बब्बर और शाहरुख खान ने फिल्म ‘माया मेमसाब’ में काम किया।

सलमान ने सरप्राइज में लग्जरी कार गिफ्ट की थी

सलमान खान की फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ में राज बब्बर ने करीना कपूर के पिता का किरदार निभाया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस रोल के लिए सलमान खान से कोई फीस भी नहीं ली थी। हालांकि, शूटिंग पूरी होने के आखिरी दिन सलमान ने राज बब्बर को बिना बताए एक लग्जरी फोर-व्हीलर कार गिफ्ट कर दी थी। सलमान के इस सरप्राइज और दरियादिली से राज बब्बर इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों में आंसू आ गए।

साल 2011 में आई फिल्म 'बॉडीगार्ड' में सलमान ने लवली सिंह और राज बब्बर ने सरताज राणा का किरदार निभाया था।

साल 2011 में आई फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ में सलमान ने लवली सिंह और राज बब्बर ने सरताज राणा का किरदार निभाया था।

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एक लड़का, जिसके पिता तमिल फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर थे। पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे को फिल्मों का हीरो बनना था। जब पिता ने फिल्मों में आने से मना किया, तो वह घर में एक चिट्ठी छोड़कर निकल गया-‘मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना।’ परिवार में हड़कंप मच गया। बाद में वह पास के एक थिएटर में मिला और पिता उसे घर ले आए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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