पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक नई ओपिनियन पोल में मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। इस सर्वे के मुताबिक, सैद्धांतिक कांग्रेस (टीएमसी) एक बार फिर से सत्ता में वापसी करती नजर आ रही है, लेकिन इसकी मात्रा में कमी आ सकती है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रही है. वोटवाइब के ताजा सर्वे के मुताबिक, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को 294 से 174 से 184 वोट मिल सकते हैं। बहुमत का आंकड़ा 148 है, इसलिए टीएमसी आराम से सरकार बन सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह ममता बनर्जी का लगातार चौथा पद होगा, हालांकि प्रवेश पहले से कम हो सकता है।
दूसरी तरफ बीजेपी को इस बार 108 से 118 की मीटिंग का अनुमान है, जो पिछले अनुमान से ज्यादा है। इससे साफ है कि बीजेपी इस बार एक मजबूत पार्टी में शामिल हो सकती है। वहीं कांग्रेस और वाम आश्रम की स्थिति खराब बनी हुई है और उन्हें सिर्फ 0 से 4 प्रतिभागियों के मिलने का अनुमान है। इससे पहले 23 मार्च के सर्वे में टीएमसी को 184 से 194 और बीजेपी को 98 से 108 दर्शकों से मुलाकात का अनुमान था. नए सर्वे में टीएमसी के वोट कम और बीजेपी के वोट कम दिख रहे हैं।
2021 विधानसभा चुनाव के नतीजे
साल 2021 के विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो उस समय टीएमसी को 215 मंदिर मिले थे और बीजेपी को 77 मंदिर मिले थे. नए आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी अच्छी तरह से फिर से सरकार बनाएगी, लेकिन बीजेपी इस बार अधिक मजबूत होकर उभरेगी। तेलंगाना के आंकड़ों से देखें तो मिदनापुर में मुकाबला हो सकता है, जहां बीजेपी को बढ़त दिख रही है। वहीं प्रेसिडेंसी और मालदा जैसे इलाकों में टीएमसी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। मुख्यमंत्री पद के लिए ममता बनर्जी अभी भी सबसे पसंदीदा नेता हैं। सर्वे के मुताबिक, 46.4% लोग उन्हें फिर से मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, जबकि बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी को 34.9% का समर्थन मिला है। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और सीपीएम के मोहम्मद अल्लामीर काफी पीछे हैं.
सर्वेक्षण में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास
वोटवाइब सर्वे में यह भी सामने आया कि लोगों के लिए सबसे बड़ी बेरोजगारी और विकास है, जिसे 35.1% लोगों ने सबसे अहम बताया। इसके बाद कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, चुनाव से जुड़े मुद्दे और मंदी भी प्रमुख चिंताएं हैं। सरकारी मान्यता को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। करीब 53.6% लोगों का मानना है कि बेरोजगारी से छुटकारा पाने वाले युवा पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रहे हैं। प्रतिमा में भी साक्षात् झलकती दिख रही है। मुस्लिम वोटर बड़े पैमाने पर टीएमसी के साथ हैं, जबकि एससी-एसटी और दलित जाति के हिंदू वोटर बीजेपी की ओर झुकते दिख रहे हैं।
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