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पीएम के काफिले के रूट पर टाइमर भी मिला:तीन दिन पहले जिलेटिन की छड़ें बरामद, दावा- आरोपी जोड़ नहीं पाए; 10 मई को मोदी बेंगलुरु गए थे

पीएम के काफिले के रूट पर टाइमर भी मिला:तीन दिन पहले जिलेटिन की छड़ें बरामद, दावा- आरोपी जोड़ नहीं पाए; 10 मई को मोदी बेंगलुरु गए थे

पीएम मोदी के 10 मई को बेंगलुरु दौरे के दौरान मिलीं जिलेटिन की छड़ों के बाद अब ऐसे अतिरिक्त सामान भी बरामद हुए हैं, जिनसे धमाका ट्रिगर किया जा सकता है। पुलिस को तीन दिन बाद वहीं से एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और टाइमर मिला है। ये सामग्री एक गत्ते के डब्बे में थीं। पुलिस ने आशंका जताई कि जिन लोगों ने इसे वहां रखने की कोशिश की, वे इसे असेंबल (जोड़) नहीं पाए। प्रधानमंत्री 10 मई को बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। विस्फोटक सामग्री कार्यक्रम स्थल के पास कागलीपुरा इलाके के पास से बरामद की गई थी। पुलिस को कॉल आया कि बम लगाया है, तब जांच शुरू 10 मई को जब पीएम मोदी को बेंगलुरु में कार्यक्रम में जाना था। उसी दिन सुबह 7 बजे के करीब पुलिस को एक फोन कॉल आया। जिसमें कॉलर ने कहा कि उसने बम लगाया है। इस कॉल के आधार पर पुलिस हरकत में आई और शहर के कोरमंगला इलाके से एक व्यक्ति को अरेस्ट कर लिया। कुछ घंटों बाद, पुलिस टीम को हाईवे से कुछ मीटर की दूरी पर जिलेटिन का डिब्बा मिला। इसी रास्ते से PM मोदी की कार गुजरने वाली थी। मोदी बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस पर गए थे पीएम मोदी कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने गए थे। उन्होंने यहां मंदिर में पूजा की और एक ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही पीएम ने मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, प्रकृति संरक्षण से जुड़ी योजनाएं भी शुरू की। यह कार्यक्रम श्री श्री रवि शंकर के 70वें जन्मदिवस पर आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 182 से ज्यादा देशों से लोग जुड़े थे। 2022 में पंजाब में पीएम की सुरक्षा में चूक हुई थी, 20 मिनट रुका रहा था काफिला साल 2022 में पंजाब के फिरोजपुर जिले के एक फ्लाईओवर पर पीएम का काफिला 20 मिनट तक रुका रहा था। उनसे कुछ ही दूरी पर किसान हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे। बारिश के बीच आगे जाने का रास्ता न मिलने पर प्रधानमंत्री को बठिंडा एयरपोर्ट लौटना पड़ा। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों की सांसें थमी रहीं, कहीं PM के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए। पीएम की सुरक्षा स्पेशल प्रोटेक्शन गार्ड (SPG) के हवाले होती है। इसकी स्थापना 1988 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई। SPG कमांडो अत्याधुनिक हथियारों, बुलेटप्रूफ गियर और क्लोज-कॉम्बैट ट्रेनिंग से लैस होते हैं। PM के आसपास हमेशा “डायमंड फॉर्मेशन” में तैनाती रहती है। SPG के हथियारों और उपकरणों के बारे में जानिए…
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद SPG बनाने की हुई शुरुआत प्रधानमंत्री के पद पर रहते 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई। उसके बाद 1985 में SPG बनी। 1988 में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एक्ट, 1988 पारित करके इसका औपचारिक गठन किया गया। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल यानी CAPF और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान SPG में शामिल होने की इच्छा जता सकते हैं। केंद्रीय सशस्त्र बलों का कोई भी जवान अपने करियर में केवल एक बार 5 साल के लिए SPG में जा सकता है। SPG के जवान और अफसरों पर किसी मीडिया हाउस से संपर्क करने या SPG में अपने कार्यकाल पर कोई किताब लिखने की पाबंदी होती है। इन दिनों SPG में 3000 से ज्यादा जवान और अफसर हैं। SPG को एक IPS अफसर कमांड करता है, जो देश के कैबिनेट सेक्रेटेरिएट को रिपोर्ट करता है। —————————–

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पीएम के काफिले के रूट पर टाइमर भी मिला:तीन दिन पहले जिलेटिन की छड़ें बरामद, दावा- आरोपी जोड़ नहीं पाए; 10 मई को मोदी बेंगलुरु गए थे

पीएम मोदी के 10 मई को बेंगलुरु दौरे के दौरान मिलीं जिलेटिन की छड़ों के बाद अब ऐसे अतिरिक्त सामान भी बरामद हुए हैं, जिनसे धमाका ट्रिगर किया जा सकता है। पुलिस को तीन दिन बाद वहीं से एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और टाइमर मिला है। ये सामग्री एक गत्ते के डब्बे में थीं। पुलिस ने आशंका जताई कि जिन लोगों ने इसे वहां रखने की कोशिश की, वे इसे असेंबल (जोड़) नहीं पाए। प्रधानमंत्री 10 मई को बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। विस्फोटक सामग्री कार्यक्रम स्थल के पास कागलीपुरा इलाके के पास से बरामद की गई थी। पुलिस को कॉल आया कि बम लगाया है, तब जांच शुरू 10 मई को जब पीएम मोदी को बेंगलुरु में कार्यक्रम में जाना था। उसी दिन सुबह 7 बजे के करीब पुलिस को एक फोन कॉल आया। जिसमें कॉलर ने कहा कि उसने बम लगाया है। इस कॉल के आधार पर पुलिस हरकत में आई और शहर के कोरमंगला इलाके से एक व्यक्ति को अरेस्ट कर लिया। कुछ घंटों बाद, पुलिस टीम को हाईवे से कुछ मीटर की दूरी पर जिलेटिन का डिब्बा मिला। इसी रास्ते से PM मोदी की कार गुजरने वाली थी। मोदी बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस पर गए थे पीएम मोदी कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने गए थे। उन्होंने यहां मंदिर में पूजा की और एक ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही पीएम ने मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, प्रकृति संरक्षण से जुड़ी योजनाएं भी शुरू की। यह कार्यक्रम श्री श्री रवि शंकर के 70वें जन्मदिवस पर आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 182 से ज्यादा देशों से लोग जुड़े थे। 2022 में पंजाब में पीएम की सुरक्षा में चूक हुई थी, 20 मिनट रुका रहा था काफिला साल 2022 में पंजाब के फिरोजपुर जिले के एक फ्लाईओवर पर पीएम का काफिला 20 मिनट तक रुका रहा था। उनसे कुछ ही दूरी पर किसान हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे। बारिश के बीच आगे जाने का रास्ता न मिलने पर प्रधानमंत्री को बठिंडा एयरपोर्ट लौटना पड़ा। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों की सांसें थमी रहीं, कहीं PM के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए। पीएम की सुरक्षा स्पेशल प्रोटेक्शन गार्ड (SPG) के हवाले होती है। इसकी स्थापना 1988 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई। SPG कमांडो अत्याधुनिक हथियारों, बुलेटप्रूफ गियर और क्लोज-कॉम्बैट ट्रेनिंग से लैस होते हैं। PM के आसपास हमेशा “डायमंड फॉर्मेशन” में तैनाती रहती है। SPG के हथियारों और उपकरणों के बारे में जानिए…
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