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इंदौर की बेटी ने जीता पैराताइक्वांडो में चौथा नेशनल गोल्ड:सपना शर्मा ने दिव्यांगता को बनाया ताकत; चार बार की नेशनल चैंपियन बनीं

इंदौर की बेटी ने जीता पैराताइक्वांडो में चौथा नेशनल गोल्ड:सपना शर्मा ने दिव्यांगता को बनाया ताकत; चार बार की नेशनल चैंपियन बनीं

मध्य प्रदेश की पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी सपना शर्मा (35) ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका लगातार चौथा नेशनल गोल्ड है। वह देश की पहली ऐसी दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। इस जीत ने इंदौर सहित पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 28-29 मार्च को बेंगलुरू के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता में 70 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। फाइनल मुकाबले में सपना ने बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास के साथ अपने प्रतिद्वंद्वियों को पराजित किया। तेलंगाना की ममता को रजत पदक और कृष्णवेणी को कांस्य पदक प्राप्त हुआ। सपना का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा और उन्होंने हर मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद नहीं मानी हार सपना शर्मा की सफलता के पीछे संघर्ष और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है। दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। टेबल टेनिस में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने आर्म रेसलिंग में भी पदक जीता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वे अपनी पहचान बना चुकी हैं और कई सम्मान हासिल कर चुकी हैं। आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने निरंतर अभ्यास जारी रखा। सपना का कहना है कि मजबूत हौसलों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती, और उनका लक्ष्य देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीतना है। हर मुश्किल को बनाया ताकत सपना का कहना है कि मेरे जीवन में सबसे बड़ी चुनौती मेरी शारीरिक स्थिति रही है। आर्थिक समस्याएं, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां भी थीं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित होने के बावजूद आर्थिक कारणों से नहीं जा पाई लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। हर मुश्किल को अपनी ताकत बनाया और लगातार आगे बढ़ती रही। खुद की जिंदगी और संघर्ष से सब सीखा सपना का कहना है कि मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने का जज़्बा ही मेरी सफलता का सबसे बड़ा राज है। मैं हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं। मेरा सबसे बड़ा रोल मॉडल मेरी खुद की जिंदगी और मेरा संघर्ष है। मैंने जो भी सीखा है, अपनी परिस्थितियों से सीखा है। परिवार में पति संज वर्मा और बेटी हनाया है। ये भी मेरे संघर्ष के हिस्सेदार हैं। हर मुश्किल ने मुझे मजबूत बनाया है और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। हौसले मजबूत हैं कमजोरी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती बकौल सपना अगर किसी एक व्यक्ति की बात करूं, तो मैं उन सभी खिलाड़ियों को अपना रोल मॉडल मानती हूं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए मेडल जीतते हैं। मेरे लिए असली प्रेरणा वही लोग हैं, जो हालात से हार नहीं मानते, बल्कि अपने संघर्षों को अपनी ताकत बनाकर सफलता हासिल करते हैं। अगर आपके हौसले मजबूत हैं, तो कोई भी कमजोरी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए और अपने सपनों को कभी छोटा मत समझिए।सपना का लक्ष्य है कि लक्ष्य है कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और ज्यादा गोल्ड मेडल जीतूं और देश का नाम रोशन करूं। सपना ने टेबल टेनिस और आर्म रेसलिंग में भी मप्र और भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनका कहना है कि हार मानने वालों में से नहीं हूं, मैं हर बार गिरकर और मजबूत बनकर उठती हूं।

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