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दातून करने से दांत को मिलता है चमत्कारिक फायदा, मसूड़ों की होती है मालिश, जाने सही तरीका

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चंदौलीः आज के इस दौर में जहां टूथब्रश और टूथपेस्ट ने हमारी दिनचर्या में स्थायी जगह बना ली है. वहीं, कभी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा दातून अब धीरे-धीरे लोगों की आदतों से गायब होता जा रहा है. पहले जहां लोग नीम या बबूल के दातून से अपने दिन की शुरुआत करते थे. वहीं, अब यह परंपरा केवल गांवों या खास अवसरों तक सीमित रह गई है.

हालांकि, दातून के महत्व को लेकर विशेषज्ञ आज भी इसे बेहद उपयोगी मानते हैं. इसी विषय पर डॉक्टर रिद्धि पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दातून का इस्तेमाल केवल एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों के लिए एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी काम करता है.

नीम के दातून में होता है ये गुण

डॉक्टर पांडे ने बताया कि दातून का उपयोग अगर नियमित रूप से किया जाए, तो यह मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में बेहद प्रभावी होता है. खासतौर पर नीम का दातून एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करता है. इससे पायरिया, मसूड़ों की सूजन, दांतों की सड़न और सांसों की बदबू जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.

उन्होंने यह भी बताया कि दातून करने से मसूड़ों की हल्की मालिश होती है, जिससे उनमें मजबूती आती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इसके अलावा, दांतों पर जमा प्लाक को हटाने में भी यह सहायक साबित होता है. डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि दातून अपनाने का मतलब यह नहीं है कि ब्रश को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि अगर सुबह ब्रश से पहले दातून का उपयोग किया जाए, तो यह और भी बेहतर परिणाम दे सकता है. इससे मुंह में तुरंत ताजगी का एहसास होता है और दिनभर फ्रेशनेस बनी रहती है.

सभी दातून के होते हैं औषधीय गुण

वहीं, उन्होंने बताया कि नीम के अलावा बबूल, अमरूद और आंवला जैसे पेड़ों के दातून भी उपयोगी माने जाते हैं. हर प्रकार के दातून के अपने-अपने औषधीय गुण होते हैं, जो न सिर्फ दांतों बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग दातून का उपयोग करते हैं और उनके दांत ज्यादा स्वस्थ पाए जाते हैं. यह दर्शाता है कि पारंपरिक तरीकों में आज भी विज्ञान छिपा हुआ है.

बता दें किबदलते समय के साथ जहां हम आधुनिक सुविधाओं को अपना रहे हैं. वहीं, यह भी जरूरी है कि हम अपनी पुरानी और प्राकृतिक आदतों को पूरी तरह न भूलें. दातून को अपनी जीवनशैली में शामिल कर हम न केवल अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि कई प्रकार की मौखिक बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं.

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हालांकि, दातून के महत्व को लेकर विशेषज्ञ आज भी इसे बेहद उपयोगी मानते हैं. इसी विषय पर डॉक्टर रिद्धि पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दातून का इस्तेमाल केवल एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों के लिए एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी काम करता है.

नीम के दातून में होता है ये गुण

डॉक्टर पांडे ने बताया कि दातून का उपयोग अगर नियमित रूप से किया जाए, तो यह मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में बेहद प्रभावी होता है. खासतौर पर नीम का दातून एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करता है. इससे पायरिया, मसूड़ों की सूजन, दांतों की सड़न और सांसों की बदबू जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.

उन्होंने यह भी बताया कि दातून करने से मसूड़ों की हल्की मालिश होती है, जिससे उनमें मजबूती आती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इसके अलावा, दांतों पर जमा प्लाक को हटाने में भी यह सहायक साबित होता है. डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि दातून अपनाने का मतलब यह नहीं है कि ब्रश को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि अगर सुबह ब्रश से पहले दातून का उपयोग किया जाए, तो यह और भी बेहतर परिणाम दे सकता है. इससे मुंह में तुरंत ताजगी का एहसास होता है और दिनभर फ्रेशनेस बनी रहती है.

सभी दातून के होते हैं औषधीय गुण

वहीं, उन्होंने बताया कि नीम के अलावा बबूल, अमरूद और आंवला जैसे पेड़ों के दातून भी उपयोगी माने जाते हैं. हर प्रकार के दातून के अपने-अपने औषधीय गुण होते हैं, जो न सिर्फ दांतों बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग दातून का उपयोग करते हैं और उनके दांत ज्यादा स्वस्थ पाए जाते हैं. यह दर्शाता है कि पारंपरिक तरीकों में आज भी विज्ञान छिपा हुआ है.

बता दें किबदलते समय के साथ जहां हम आधुनिक सुविधाओं को अपना रहे हैं. वहीं, यह भी जरूरी है कि हम अपनी पुरानी और प्राकृतिक आदतों को पूरी तरह न भूलें. दातून को अपनी जीवनशैली में शामिल कर हम न केवल अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि कई प्रकार की मौखिक बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं.

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