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हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विधानसभा में आज (गुरुवार को) हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा और चिट्टा तस्करी से जुड़े लोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा बीते बुधवार को इस विधेयक को सदन में पेश किया था। चुने जाने के बाद भी जाएगी कुर्सी इस संशोधन के तहत पंचायत जनप्रतिनिधियों पर भी सख्त प्रावधान लागू होंगे। यदि कोई प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, बीडीसी सदस्य या जिला परिषद सदस्य चुने जाने के बाद चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया जाता है और उस पर आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। ग्राम सभाओं के कोरम में बड़ा बदलाव विधेयक में ग्राम सभाओं के कोरम को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है। अब तक ग्राम सभा के लिए 25 प्रतिशत परिवारों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन नए प्रावधान के तहत इसे बदल दिया गया है। अब कुल परिवारों की बजाय कुल मतदाताओं में से 10 प्रतिशत की उपस्थिति को कोरम माना जाएगा। डिफाल्टर भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना और साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को बढ़ावा देना है। 3600 पंचायतों में चुनाव से पहले बड़ा असर
प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर चुनाव में 60 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में यह संशोधन बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।गों को प्रभावित करेगा।

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हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

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संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना और साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को बढ़ावा देना है। 3600 पंचायतों में चुनाव से पहले बड़ा असर
प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर चुनाव में 60 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में यह संशोधन बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।गों को प्रभावित करेगा।

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