Thursday, 22 Oct 2026 | 06:47 PM

Trending :

EXCLUSIVE

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान…बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान...बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

पांच राज्यों में चुनाव प्रचार तेजी से चल रहा है। सभी राजनीतिक दल अलग-अलग पार्टियों को लेकर नामांकित मैदानों में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में विकास के मुद्दों से लेकर स्थानीय अस्मिता का मुद्दा प्रमुख है। असम हो या पश्चिम बंगाल, केरल हो या तमिल सभी राजनीतिक दल स्थानीय अस्मिता का तेजी से चुनाव में उठान कर रहे हैं।

चुनावी प्रचार में विकास के मुद्दे गायब हैं। न सड़क, न रोजगार, न विकास। इस बार चुनाव में एंट्री हुई है अस्मिता और संस्कृति की। पश्चिम बंगाल से असम और तमिल तक, हर जगह की स्क्रिप्ट अलग, लेकिन कहानी एक पहचान की राजनीति। अब सवाल ये उठ रहा है कि वोट किसे मिलेगा. जो काम करेगा या जो इमोशन जगाएगा।

बंगाल में कौन-सा सबसे बड़ा उछाल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस बार चुनाव में सबसे बड़ा विकास विकास नहीं बल्कि पहचान बनाम पहचान बन गया है। 15 साल की सरकार का काम बैकस्टेज चल रहा है और इसमें राष्ट्रवाद, धर्म और अस्मिता की सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

बीजेपी की स्क्रिप्ट साफ है, अगर बहुसंख्यक कलाकारों के साथ आ गए तो दर्शन भी साथ आ गए। इसलिए अब भाषणों में सड़क की चर्चा कम और सीमा की अधिकांश। नौकरी की कम और घुसपैठिए की बहुमत. विकास की कम और धार्मिक संतुलन की मात्रा अधिक हो रही है।

सभी बड़े नेताओं के भाषणों में पश्चिम बंगाल की अस्मिता का ज़िक्र है। भाजपा नेता जहां एक तरफा डेमोग्राफिक बदलावों का लाभ उठा कर बंगाल अस्मिता को खतरा बता रहे हैं। जहां पर इक्विटीज का फोकस सीमा सुरक्षा और घुसपैठियों का जमावड़ा है, जिसे वो लोग इक्विटीज सभाओं में उठा रहे हैं।

असम में घुसपैठिये और यू.सी.सी. की बर्बादी

ममता बनर्जी बीजेपी की सरकार में आने के बाद मछली अंडा ना खाने का आरोप लगाया जा रहा है और बंगाल की संस्कृति और स्वभाव पर हमले की बात कर रही हैं। अब चुनाव सिर्फ धर्म नहीं भाषा, खान-पान और रीजनल प्राइड का फुल पैक बन चुका है और ये कहानी सिर्फ बंगाल की नहीं असम में भी यूसीसी और पहचान का मुद्दा जैसे तेजी से मजबूत हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा घुसपैठियों और यूसीसी के मलबे असमिया अस्मिता को बचाने की बात कर रहे हैं और मियांओं को बाहर निकलने की बात करके डेमोग्राफिक बदलावों का खजाना भी उठा रहे हैं। हालांकि हिमंता का कहना है कि उनके मियां मतलब बांग्लादेशी घुसपैठियों से हैं। कांग्रेस भी मुख्यमंत्री के इस बयान में विस्थापित असम की अस्मिता और संस्कृति पर हमला बता रही है।

तमिल और केरल में किस मुद्दे का बोलबाला?

तमिल में भी कहानी लगभग यही दिख रही है। तमिलनाडु में यूक्रेनी बनाम द्रविड़ पहचान की लड़ाई चुनाव में है। जहां हमारी भाषा, हमारी संस्कृति का लाभ उठा रही है वहीं उद्योगपतियों का नैरेटिव लेकर चुनाव में चल रही है।

केरल में भी धर्म और संस्कृति की सॉफ्ट पॉलिटिक्स चल रही है। बीजेपी हो या कांग्रेस या लेफ्ट सभी सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी का सामान उठा रहे हैं। यहां भी सभी दल केरल की संस्कृति का अध्ययन जोर शोर से चुनाव में उठा रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य बदल रहे हैं, पात्र बदले जा रहे हैं, लेकिन आश्रम की अचल संपत्तियां हैं-पहचान और अस्मिता की राजनीति।

अब जन संस्कृति और अस्मिता के मुद्दे पर किस दल की विश्वसनीयता तय होती है वो तो 4 मई के नतीजों से पता चलता है, लेकिन इस बार की चुनौती को इन विचारधारा ने दिलचस्प बना दिया है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से 4 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार:खिलौने में बम लगाकर हमले की तैयारी कर रहे थे; राम मंदिर और संसद निशाने पर था

April 18, 2026/
3:58 pm

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने...

जाकिर खान अस्पताल में एडमिट:छोटे भाई अरबाज के रमजान व्लॉग में लीलावती हॉस्पिटल में दिखे कॉमेडियन

March 15, 2026/
1:07 pm

कॉमेडियन जाकिर खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह अस्पताल में भर्ती दिखाई दिए हैं।...

महाराष्ट्र साइबर पुलिस के समन पर हनी सिंह नहीं पहुंचे:गाड़ियों में शारीरिक संबंधों पर टिप्पणी मामले में मांगा और समय

October 6, 2026/
8:59 am

रैपर और सिंगर हनी सिंह सोमवार को महाराष्ट्र साइबर पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। उन्हें दिल्ली में कॉन्सर्ट के...

Grand Aarti with 1008 Lamps

March 30, 2026/
10:53 am

उज्जैन5 मिनट पहले कॉपी लिंक महावीर जयंती के अवसर पर शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला शुरू हो...

सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

April 22, 2026/
6:15 pm

सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा...

राजनीति

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान…बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

कहीं और कहीं कहीं स्थानीय पहचान...बंगाल, असम से लेकर तमिल तक, इन आम लोगों पर चुनाव होगा

पांच राज्यों में चुनाव प्रचार तेजी से चल रहा है। सभी राजनीतिक दल अलग-अलग पार्टियों को लेकर नामांकित मैदानों में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में विकास के मुद्दों से लेकर स्थानीय अस्मिता का मुद्दा प्रमुख है। असम हो या पश्चिम बंगाल, केरल हो या तमिल सभी राजनीतिक दल स्थानीय अस्मिता का तेजी से चुनाव में उठान कर रहे हैं।

चुनावी प्रचार में विकास के मुद्दे गायब हैं। न सड़क, न रोजगार, न विकास। इस बार चुनाव में एंट्री हुई है अस्मिता और संस्कृति की। पश्चिम बंगाल से असम और तमिल तक, हर जगह की स्क्रिप्ट अलग, लेकिन कहानी एक पहचान की राजनीति। अब सवाल ये उठ रहा है कि वोट किसे मिलेगा. जो काम करेगा या जो इमोशन जगाएगा।

बंगाल में कौन-सा सबसे बड़ा उछाल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस बार चुनाव में सबसे बड़ा विकास विकास नहीं बल्कि पहचान बनाम पहचान बन गया है। 15 साल की सरकार का काम बैकस्टेज चल रहा है और इसमें राष्ट्रवाद, धर्म और अस्मिता की सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

बीजेपी की स्क्रिप्ट साफ है, अगर बहुसंख्यक कलाकारों के साथ आ गए तो दर्शन भी साथ आ गए। इसलिए अब भाषणों में सड़क की चर्चा कम और सीमा की अधिकांश। नौकरी की कम और घुसपैठिए की बहुमत. विकास की कम और धार्मिक संतुलन की मात्रा अधिक हो रही है।

सभी बड़े नेताओं के भाषणों में पश्चिम बंगाल की अस्मिता का ज़िक्र है। भाजपा नेता जहां एक तरफा डेमोग्राफिक बदलावों का लाभ उठा कर बंगाल अस्मिता को खतरा बता रहे हैं। जहां पर इक्विटीज का फोकस सीमा सुरक्षा और घुसपैठियों का जमावड़ा है, जिसे वो लोग इक्विटीज सभाओं में उठा रहे हैं।

असम में घुसपैठिये और यू.सी.सी. की बर्बादी

ममता बनर्जी बीजेपी की सरकार में आने के बाद मछली अंडा ना खाने का आरोप लगाया जा रहा है और बंगाल की संस्कृति और स्वभाव पर हमले की बात कर रही हैं। अब चुनाव सिर्फ धर्म नहीं भाषा, खान-पान और रीजनल प्राइड का फुल पैक बन चुका है और ये कहानी सिर्फ बंगाल की नहीं असम में भी यूसीसी और पहचान का मुद्दा जैसे तेजी से मजबूत हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा घुसपैठियों और यूसीसी के मलबे असमिया अस्मिता को बचाने की बात कर रहे हैं और मियांओं को बाहर निकलने की बात करके डेमोग्राफिक बदलावों का खजाना भी उठा रहे हैं। हालांकि हिमंता का कहना है कि उनके मियां मतलब बांग्लादेशी घुसपैठियों से हैं। कांग्रेस भी मुख्यमंत्री के इस बयान में विस्थापित असम की अस्मिता और संस्कृति पर हमला बता रही है।

तमिल और केरल में किस मुद्दे का बोलबाला?

तमिल में भी कहानी लगभग यही दिख रही है। तमिलनाडु में यूक्रेनी बनाम द्रविड़ पहचान की लड़ाई चुनाव में है। जहां हमारी भाषा, हमारी संस्कृति का लाभ उठा रही है वहीं उद्योगपतियों का नैरेटिव लेकर चुनाव में चल रही है।

केरल में भी धर्म और संस्कृति की सॉफ्ट पॉलिटिक्स चल रही है। बीजेपी हो या कांग्रेस या लेफ्ट सभी सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी का सामान उठा रहे हैं। यहां भी सभी दल केरल की संस्कृति का अध्ययन जोर शोर से चुनाव में उठा रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य बदल रहे हैं, पात्र बदले जा रहे हैं, लेकिन आश्रम की अचल संपत्तियां हैं-पहचान और अस्मिता की राजनीति।

अब जन संस्कृति और अस्मिता के मुद्दे पर किस दल की विश्वसनीयता तय होती है वो तो 4 मई के नतीजों से पता चलता है, लेकिन इस बार की चुनौती को इन विचारधारा ने दिलचस्प बना दिया है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.