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उड़ते पंजाब की दर्दनाक तस्वीर: 4 जवान बेटों को खोया, अब 5वें को ब‍िस्‍तर पर खत्‍म होता देख रहे मां-बाप

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Udta Punjab real Story: 60 की उम्र में अपने चार-चार जवान बेटों को पल-पल मरते देखने और उनकी लाशों को कंधा देने के बाद जोगिंदर पाल और मंजीत कौर की आंखों के आंसू सूखे भी नहीं हैं कि उनका पांचवा बेटा भी बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है. ड्रग्स और नशे की लत से बबार्द हो चुके इस परिवार के बुजुर्ग दंपत्ति की आंखों में अब सिर्फ डर, बेबसी और लाचारी बची है, जो हंसते-खेलते पंजाब की आज की असली हकीकत बयां कर रही है.

पांच-पांच तंदुरुस्त जवान बेटों के मां-बाप ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उड़ता पंजाब उनके बेटों को इस हालत में पहुंचा देगा. ड्रग्स की लत से बर्बाद हुए इस परिवार के प्रति अब सिर्फ लोगों की संवेदना बची है. पंडोरी मोहल्ले में अपने घर पर बिस्तर पर पड़े 32 साल के बेटे को देखकर मां-बाप अब सिर्फ रोते हैं क्योंकि उसका शरीर सिर्फ हड्डियों का ढांचा बनकर रह गया है और उसकी सांसें भी धीरे-धीरे थम रही हैं.

रुला देगी इस पर‍िवार की कहानी 

कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी स्थित पंडोरी मोहल्ले के जोग‍िंंदर पाल और मंजीत कौर के घर की कहानी इतनी दर्दनाक है कि जो भी सुन रहा है वह इन दंपत्ति पर तरस खा रहा है. लंबे समय से पड़ोसी बारी-बारी से इस बुजुर्ग जोड़े की मदद करने के लिए सामने आ रहे हैं अपने बेटे की मौत का इंतजार करते हुए, बेबसी से उस जवान लड़के को धीरे-धीरे खत्म होते देख रहे बुजुर्ग दंपत्ति के लिए मोहल्ले के लोगों ने आखिरकार सरकार ने गुहार लगाई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक रविवार को इस दुखी जोड़े और मोहल्ले के अन्य निवासियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार से सोनू को बचाने और इलाके को नशों से मुक्त कराने की मांग की.

प्रदर्शन के दौरान मंजीत और इलाके की अन्य महिलाओं ने आरोप लगाया कि पंजाब के हर इलाके में और खासतौर पर उनके शहर में हर गली-नुक्कड़ पर नशा खुलेआम उपलब्ध है. यहां तक कि बच्चे-बच्चे जानते हैं कि ड्रग्स कहां मिल ही है. पिछले कुछ सालों में यहां कम से कम 20 युवा नशेड़ियों की मौत हो चुकी है. मंजीत ने कहा, ‘इनमें से तीन मौतें तो सिर्फ हमारे मोहल्ले में ही हुई हैं, और वह भी सिर्फ चार-पांच महीनों के अंदर.’

चार बेटों में दो थे शादीशुदा, बिलख रहे बच्चे
उन्होंने बताया, ‘मेरे जिन दो बेटों की मौत हुई, वे शादीशुदा थे और दो कुंवारे थे. अब हमें डर है कि हमारे पांचवें बेटे का भी वही हश्र होगा. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हमसे उसे घर ले जाने के लिए कह दिया, क्योंकि उन्हें उसकी नसें नहीं मिल पा रही थीं और वे उसे सिर्फ मुंह से खाने वाली दवाएं ही दे सकते थे. सरकार को हमारे बेटे को बचाने में हमारी मदद करनी चाहिए.’

उनका सबसे छोटा बेटा करीब दो साल पहले मर गया था. उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से बीमार सोनू के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र ढाई साल और छह महीने है.

कई परिवार हो गए बर्बाद
कुछ अन्य लोगों ने भी अपनी-अपनी दुखभरी कहानियां सुनाईं. एक महिला ने बताया कि उसकी बहू उसके बेटे को छोड़कर चली गई, क्योंकि वह नशा छोड़ना नहीं चाहता था खासकर तब, जब नशा इतनी आसानी से उपलब्ध हो. मंजीत ने कहा कि नशों पर काबू पाने के बारे में राज्य सरकार जो दावे करती है, और जमीनी हकीकत जो है इन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है.

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पांच-पांच तंदुरुस्त जवान बेटों के मां-बाप ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उड़ता पंजाब उनके बेटों को इस हालत में पहुंचा देगा. ड्रग्स की लत से बर्बाद हुए इस परिवार के प्रति अब सिर्फ लोगों की संवेदना बची है. पंडोरी मोहल्ले में अपने घर पर बिस्तर पर पड़े 32 साल के बेटे को देखकर मां-बाप अब सिर्फ रोते हैं क्योंकि उसका शरीर सिर्फ हड्डियों का ढांचा बनकर रह गया है और उसकी सांसें भी धीरे-धीरे थम रही हैं.

रुला देगी इस पर‍िवार की कहानी 

कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी स्थित पंडोरी मोहल्ले के जोग‍िंंदर पाल और मंजीत कौर के घर की कहानी इतनी दर्दनाक है कि जो भी सुन रहा है वह इन दंपत्ति पर तरस खा रहा है. लंबे समय से पड़ोसी बारी-बारी से इस बुजुर्ग जोड़े की मदद करने के लिए सामने आ रहे हैं अपने बेटे की मौत का इंतजार करते हुए, बेबसी से उस जवान लड़के को धीरे-धीरे खत्म होते देख रहे बुजुर्ग दंपत्ति के लिए मोहल्ले के लोगों ने आखिरकार सरकार ने गुहार लगाई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक रविवार को इस दुखी जोड़े और मोहल्ले के अन्य निवासियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार से सोनू को बचाने और इलाके को नशों से मुक्त कराने की मांग की.

प्रदर्शन के दौरान मंजीत और इलाके की अन्य महिलाओं ने आरोप लगाया कि पंजाब के हर इलाके में और खासतौर पर उनके शहर में हर गली-नुक्कड़ पर नशा खुलेआम उपलब्ध है. यहां तक कि बच्चे-बच्चे जानते हैं कि ड्रग्स कहां मिल ही है. पिछले कुछ सालों में यहां कम से कम 20 युवा नशेड़ियों की मौत हो चुकी है. मंजीत ने कहा, ‘इनमें से तीन मौतें तो सिर्फ हमारे मोहल्ले में ही हुई हैं, और वह भी सिर्फ चार-पांच महीनों के अंदर.’

चार बेटों में दो थे शादीशुदा, बिलख रहे बच्चे
उन्होंने बताया, ‘मेरे जिन दो बेटों की मौत हुई, वे शादीशुदा थे और दो कुंवारे थे. अब हमें डर है कि हमारे पांचवें बेटे का भी वही हश्र होगा. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हमसे उसे घर ले जाने के लिए कह दिया, क्योंकि उन्हें उसकी नसें नहीं मिल पा रही थीं और वे उसे सिर्फ मुंह से खाने वाली दवाएं ही दे सकते थे. सरकार को हमारे बेटे को बचाने में हमारी मदद करनी चाहिए.’

उनका सबसे छोटा बेटा करीब दो साल पहले मर गया था. उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से बीमार सोनू के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र ढाई साल और छह महीने है.

कई परिवार हो गए बर्बाद
कुछ अन्य लोगों ने भी अपनी-अपनी दुखभरी कहानियां सुनाईं. एक महिला ने बताया कि उसकी बहू उसके बेटे को छोड़कर चली गई, क्योंकि वह नशा छोड़ना नहीं चाहता था खासकर तब, जब नशा इतनी आसानी से उपलब्ध हो. मंजीत ने कहा कि नशों पर काबू पाने के बारे में राज्य सरकार जो दावे करती है, और जमीनी हकीकत जो है इन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर है.

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