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आयुर्वेद का अनमोल खजाना है गुम्मा: पीलिया को जड़ से करता है खत्म, लिवर की बीमारियां रहती हैं कोसों दूर, जानें चमत्कारी फायदे

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Health Tips: सीतामढ़ी के मशहरू आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह ने गुम्मा द्रोणपुष्पी को पीलिया लिवर और पेट के कीड़ों की सस्ती असरदार औषधि बताया. उन्होंने कहा कि अब यह पौधा खेतों से दुर्लभ होता जा रहा है. इसके चमत्कारी फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

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सीतामढ़ी: आयुर्वेद जगत में कई ऐसी औषधियां हैं. जो हमारे आस-पास ही मौजूद हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम उनसे वंचित रह जाते हैं. इन्हीं में से एक है गुम्मा (द्रोणपुष्पी), जिसे आयुर्वेद में लिवर और पेट संबंधी विकारों के लिए अमृत माना गया है. सीतामढ़ी के आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि गुम्मा एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय पौधा है, जो कभी खेतों की मेड़ों पर बहुतायत में पाया जाता था. हालांकि यह चिंता का विषय है कि आधुनिक खेती के तरीकों और रसायनों (कीटनाशकों) के बढ़ते प्रयोग के कारण यह दुर्लभ होता जा रहा है. खेतों से इस कीमती पौधे का विलुप्त होना प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के लिए एक बड़ी क्षति है.

पीलिया रोगियों के लिए है रामबाण

एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह के अनुसार पीलिया (Jaundice) के उपचार में गुम्मा का कोई सानी नहीं है. पीलिया होने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में गुम्मा की पत्तियों का ताजा रस किसी वरदान से कम नहीं है. इसका नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से लिवर की कोशिकाएं पुनर्जीवित होने लगती हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. यह न केवल पीलिया को जड़ से खत्म करने में सक्षम है. बल्कि लिवर को नई शक्ति भी प्रदान करता है, जिससे पाचन तंत्र फिर से सुचारू रूप से कार्य करने लगता है.

पेट के कीड़ों का अचूक और प्राकृतिक उपचार

बच्चों और वयस्कों में पेट के कीड़ों की समस्या एक आम बात है, जो कुपोषण और थकान का कारण बनती है. भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध रसायन युक्त दवाओं के मुकाबले गुम्मा एक सुरक्षित और अचूक उपचार है. इसकी पत्तियों के रस में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं. जो पेट के हानिकारक कीड़ों को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं. इसके कड़वे और तीखे गुणों के कारण यह पेट की कृमि (Worms) का नाश करता है और आंतों की सफाई कर भूख को बढ़ाता है. यह एक ऐसा घरेलू नुस्खा है जिसे सदियों से ग्रामीण भारत में आजमाया जाता रहा है.

संरक्षण और उपयोग की आवश्यकता

आज के दौर में जब लोग वापस प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रहे हैं. तब गुम्मा जैसे पौधों का संरक्षण बेहद अनिवार्य है. भाग्यनारायण सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तभी सार्थक है. जब हम अपने पारंपरिक ज्ञान को सहेजें. गुम्मा न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है. बल्कि यह कम लागत में असाध्य रोगों के इलाज का सामर्थ्य रखता है. यदि हम अपने खेतों और बगीचों में रसायनों का प्रयोग कम करें तो इस अमूल्य औषधि को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकता है. अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को पहचानना और अपनाना आज समय की मांग है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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सीतामढ़ी: आयुर्वेद जगत में कई ऐसी औषधियां हैं. जो हमारे आस-पास ही मौजूद हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम उनसे वंचित रह जाते हैं. इन्हीं में से एक है गुम्मा (द्रोणपुष्पी), जिसे आयुर्वेद में लिवर और पेट संबंधी विकारों के लिए अमृत माना गया है. सीतामढ़ी के आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि गुम्मा एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय पौधा है, जो कभी खेतों की मेड़ों पर बहुतायत में पाया जाता था. हालांकि यह चिंता का विषय है कि आधुनिक खेती के तरीकों और रसायनों (कीटनाशकों) के बढ़ते प्रयोग के कारण यह दुर्लभ होता जा रहा है. खेतों से इस कीमती पौधे का विलुप्त होना प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के लिए एक बड़ी क्षति है.

पीलिया रोगियों के लिए है रामबाण

एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह के अनुसार पीलिया (Jaundice) के उपचार में गुम्मा का कोई सानी नहीं है. पीलिया होने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में गुम्मा की पत्तियों का ताजा रस किसी वरदान से कम नहीं है. इसका नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से लिवर की कोशिकाएं पुनर्जीवित होने लगती हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. यह न केवल पीलिया को जड़ से खत्म करने में सक्षम है. बल्कि लिवर को नई शक्ति भी प्रदान करता है, जिससे पाचन तंत्र फिर से सुचारू रूप से कार्य करने लगता है.

पेट के कीड़ों का अचूक और प्राकृतिक उपचार

बच्चों और वयस्कों में पेट के कीड़ों की समस्या एक आम बात है, जो कुपोषण और थकान का कारण बनती है. भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध रसायन युक्त दवाओं के मुकाबले गुम्मा एक सुरक्षित और अचूक उपचार है. इसकी पत्तियों के रस में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं. जो पेट के हानिकारक कीड़ों को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं. इसके कड़वे और तीखे गुणों के कारण यह पेट की कृमि (Worms) का नाश करता है और आंतों की सफाई कर भूख को बढ़ाता है. यह एक ऐसा घरेलू नुस्खा है जिसे सदियों से ग्रामीण भारत में आजमाया जाता रहा है.

संरक्षण और उपयोग की आवश्यकता

आज के दौर में जब लोग वापस प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रहे हैं. तब गुम्मा जैसे पौधों का संरक्षण बेहद अनिवार्य है. भाग्यनारायण सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तभी सार्थक है. जब हम अपने पारंपरिक ज्ञान को सहेजें. गुम्मा न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है. बल्कि यह कम लागत में असाध्य रोगों के इलाज का सामर्थ्य रखता है. यदि हम अपने खेतों और बगीचों में रसायनों का प्रयोग कम करें तो इस अमूल्य औषधि को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकता है. अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को पहचानना और अपनाना आज समय की मांग है.

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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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