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₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन-पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड:गलत ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का मौका मिलेगा, RBI ने 'किल स्विच' का सुझाव भी दिया

₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन-पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड:गलत ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का मौका मिलेगा, RBI ने 'किल स्विच' का सुझाव भी दिया

जल्द ही ऐसा हो सकता है कि आपका ₹10 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तुरंत न हो। उसमें 1 घंटे की देरी हो सकती है। इससे ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या कैंसिल करने का मौका मिलेगा। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने ये प्रस्ताव रखा है। RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, यह देरी उस दबाव को खत्म करेगी। फिलहाल ज्यादातर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता। RBI के प्रस्ताव से जुड़ी 3 अन्य बड़ी बातें 1. सीनियर सिटीजंस के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ सुविधा 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुरक्षा और सख्त होगी। 50,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक ‘ट्रस्टेड पर्सन’ (भरोसेमंद व्यक्ति) की मंजूरी जरूरी हो सकती है। यह फ्रॉड के खिलाफ सुरक्षा की एक दूसरी लेयर की तरह काम करेगा। 2. भरोसेमंद को ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल कर सकेंगे अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं, जिसे आप जानते हैं, तो आप उसे अपनी ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल कर सकते हैं। व्हाइटलिस्टेड लोगों को पेमेंट करने पर यह 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी, जिससे नियमित लेन-देन में परेशानी नहीं आएगी। 3. डिजिटल पेमेंट बंद करने के लिए ‘किल स्विच’ RBI ने एक ‘किल स्विच’ का सुझाव भी दिया है। अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। टेबल में समझिए क्या बदल जाएगा? क्यों पड़ी इसकी जरूरत? पिछले साल देश में डिजिटल फ्रॉड के कारण होने वाला नुकसान 22 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच गया। RBI के अनुसार 10 हजार रुपए से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड केस का सिर्फ 45% हैं, लेकिन कुल फ्रॉड वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 98.5% है। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 हजार की लिमिट तय की गई है। कब तक लागू हो सकता है नियम? RBI फिलहाल बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ मिलकर इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहा है। इसमें मुख्य चुनौती यह है कि डिजिटल पेमेंट की ‘रफ्तार’ और ‘सुरक्षा’ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ महीनों में इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की जा सकती है और चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा। एक्सपर्ट व्यू: सुरक्षा और स्पीड के बीच संतुलन RBI ने माना है कि डिजिटल पेमेंट का मूल सिद्धांत ‘इंस्टेंट’ यानी तुरंत पेमेंट है। अनिवार्य देरी से यूजर्स को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है। RBI ने इस चर्चा पत्र पर 8 मई तक आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। ————— लोन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रेपो रेट में बदलाव नहीं, लोन महंगे नहीं होंगे:RBI ने ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी; 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती
नए वित्त वर्ष की पहली मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव नहीं किया गया है। इसे 5.25% पर बरकरार रखा है। इससे लोन महंगे नहीं होंगे और EMI नहीं बढ़ेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 8 अप्रैल को मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी के फैसलों की जानकारी दी। पूरी खबर पढ़ें…

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