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बच्चों में तेजी से बढ़ रही दांतों की सड़न, यहां डॉक्टर से जानिए कारण और बचाव के देसी तरीके

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अंबाला: अंबाला शहर के लोगों के लिए एक खामोश खतरा तेजी से पनप रहा है और यह खतरा कहीं बाहर नहीं, बल्कि उनके अपने मुंह के भीतर छिपा हुआ है. दरअसल, दांतों की बीमारियां अब धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक रफ्तार से बढ़ रही हैं. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अस्पतालों में रोज आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो दांतों के दर्द, सड़न और खून आने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे खतरे की जड़ मुंह में पनपने वाले बैड बैक्टीरिया हैं, जो हर बार खाने के बाद एसिड बनाते हैं. यही एसिड धीरे-धीरे दांतों की मजबूत परत को घिसता है और उन्हें अंदर से खोखला बना देता है.

तेजी से खराब हो रहे हैं बच्चों के दांत

बता दें कि शुरुआत में यह नुकसान नजर नहीं आता, लेकिन समय के साथ दांतों में छोटे-छोटे छेद बनने लगते हैं, जिन्हें आम भाषा में कीड़ा लगना कहा जाता है, क्योंकि जब तक लोगों को इसका एहसास होता है तब तक सड़न दांतों की जड़ों तक पहुंच चुकी होती है और कई बार दांत निकालने तक की नौबत आ जाती है.

खराब आदतें हैं वजह

सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब बच्चे भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं. 3 से 5 साल के मासूम बच्चों में रात को दूध की बोतल मुंह में लेकर सोने की आदत उनके दांतों को तेजी से खराब कर रही है. इससे जहां उनके आगे के दांत सड़ने लगते हैं, वहीं कई बार कम उम्र में ही टूट भी जाते हैं. वहीं, 8 साल तक के बच्चों में पीछे के दूध के दांत खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी दांतों के लिए भी खतरा बन सकते हैं.

इस बारे में जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र वर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि आजकल छोटे बच्चों में यह आम समस्या बन चुकी है, जिसमें दांत टूटना, कीड़े लगना या फिर दांत देर से आना शामिल है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में बच्चों के दांतों की देखभाल के कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनमें मां का दूध पीने वाले छोटे बच्चों के लिए मां की डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. मां को अपनी डाइट में गाय का दूध और हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए, क्योंकि इनके पोषक तत्व मां के दूध के जरिए बच्चों तक पहुंचते हैं, जो दांतों के लिए लाभदायक होते हैं.

दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगना

उन्होंने कहा कि जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाता है, तो वह बाहर की चीजें खाना पसंद करने लगता है, लेकिन यह आदत कम उम्र के बच्चों के लिए नुकसानदायक होती है. दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगने का खतरा बढ़ जाता है. आजकल कई प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दातून को सबसे ज्यादा फायदेमंद माना गया है. इसलिए नीम, बबूल, अर्जुन और खदिर की दातून का उपयोग करना चाहिए.

सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए

उन्होंने यह भी कहा कि सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे दांतों में फंसे भोजन के कण साफ हो जाते हैं. जरूरत पड़ने पर उंगलियों से भी दांतों की सफाई की जा सकती है या किसी आयुर्वेदिक टूथपेस्ट से अच्छी तरह ब्रश किया जा सकता है.

दांतों को मजबूत करने के देसी उपाय

आयुर्वेद में एक और उपाय बताया गया है, जिसमें अमरूद और सफेदे के पत्तों को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और कीड़े खत्म करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही पैक्ड फूड, फास्ट फूड और मीठे स्नैक्स का बढ़ता सेवन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. ये चीजें दांतों से चिपक जाती हैं और बैक्टीरिया को पनपने का मौका देती हैं, इसलिए बच्चों को इनका सेवन कम करना चाहिए.

उन्होंने बताया कि 20 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में संक्रमण दांतों की जड़ों तक पहुंच रहा है. मसूड़ों से खून आना, दांतों में तेज दर्द और दांतों का हिलना ये सभी संकेत हैं कि बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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तेजी से खराब हो रहे हैं बच्चों के दांत

बता दें कि शुरुआत में यह नुकसान नजर नहीं आता, लेकिन समय के साथ दांतों में छोटे-छोटे छेद बनने लगते हैं, जिन्हें आम भाषा में कीड़ा लगना कहा जाता है, क्योंकि जब तक लोगों को इसका एहसास होता है तब तक सड़न दांतों की जड़ों तक पहुंच चुकी होती है और कई बार दांत निकालने तक की नौबत आ जाती है.

खराब आदतें हैं वजह

सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब बच्चे भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं. 3 से 5 साल के मासूम बच्चों में रात को दूध की बोतल मुंह में लेकर सोने की आदत उनके दांतों को तेजी से खराब कर रही है. इससे जहां उनके आगे के दांत सड़ने लगते हैं, वहीं कई बार कम उम्र में ही टूट भी जाते हैं. वहीं, 8 साल तक के बच्चों में पीछे के दूध के दांत खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर स्थायी दांतों के लिए भी खतरा बन सकते हैं.

इस बारे में जब लोकल 18 की टीम ने अंबाला नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र वर्मा से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि आजकल छोटे बच्चों में यह आम समस्या बन चुकी है, जिसमें दांत टूटना, कीड़े लगना या फिर दांत देर से आना शामिल है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में बच्चों के दांतों की देखभाल के कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनमें मां का दूध पीने वाले छोटे बच्चों के लिए मां की डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. मां को अपनी डाइट में गाय का दूध और हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए, क्योंकि इनके पोषक तत्व मां के दूध के जरिए बच्चों तक पहुंचते हैं, जो दांतों के लिए लाभदायक होते हैं.

दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगना

उन्होंने कहा कि जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाता है, तो वह बाहर की चीजें खाना पसंद करने लगता है, लेकिन यह आदत कम उम्र के बच्चों के लिए नुकसानदायक होती है. दांतों की सही सफाई न करने के कारण कीड़ा लगने का खतरा बढ़ जाता है. आजकल कई प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दातून को सबसे ज्यादा फायदेमंद माना गया है. इसलिए नीम, बबूल, अर्जुन और खदिर की दातून का उपयोग करना चाहिए.

सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए

उन्होंने यह भी कहा कि सुबह और रात के समय खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे दांतों में फंसे भोजन के कण साफ हो जाते हैं. जरूरत पड़ने पर उंगलियों से भी दांतों की सफाई की जा सकती है या किसी आयुर्वेदिक टूथपेस्ट से अच्छी तरह ब्रश किया जा सकता है.

दांतों को मजबूत करने के देसी उपाय

आयुर्वेद में एक और उपाय बताया गया है, जिसमें अमरूद और सफेदे के पत्तों को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और कीड़े खत्म करने में मदद मिलती है. इसके साथ ही पैक्ड फूड, फास्ट फूड और मीठे स्नैक्स का बढ़ता सेवन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. ये चीजें दांतों से चिपक जाती हैं और बैक्टीरिया को पनपने का मौका देती हैं, इसलिए बच्चों को इनका सेवन कम करना चाहिए.

उन्होंने बताया कि 20 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में संक्रमण दांतों की जड़ों तक पहुंच रहा है. मसूड़ों से खून आना, दांतों में तेज दर्द और दांतों का हिलना ये सभी संकेत हैं कि बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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