खरगोन जिले में मौसम के उतार-चढ़ाव और बाजार में मांग से अधिक आवक होने के कारण तरबूज और खरबूज के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों को अपनी उपज 5 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर भी बेचना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते लागत न निकलने से परेशान किसान अब तरबूज का न्यूनतम भाव 10 रुपए प्रति किलोग्राम तय करने की मांग कर रहे हैं और फिलहाल माल केवल स्थानीय बाजारों में ही खप रहा है। 15 हजार हेक्टेयर में लगी फसल, इस बार दिल्ली नहीं जा रहा माल खरगोन जिले की नर्मदा पट्टी में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में तरबूज और खरबूज की फसल लगाई गई है। कसरावद, बड़वाह, महेश्वर, मंडलेश्वर, जामली, कुकडोल, सेल्दा, मांगरूल और नागझिरी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। आमतौर पर नर्मदा क्षेत्र का तरबूज दिल्ली तक पहुंचता है, लेकिन इस बार बाजार में मांग से अधिक तरबूज की आवक होने के कारण केवल स्थानीय कारोबारी ही खरीदारी कर रहे हैं। किसान बोले- बाहर ले जाना महंगा, इसलिए लोगों में बांटी फसल मांगरूल के किसान कृष्णलाल कुशवाह ने बताया कि तरबूज को बाहर ले जाकर बेचना महंगा पड़ रहा है। उन्होंने अपनी लागत भी नहीं निकाल पाने के कारण फसल लोगों में बांट दी। वहीं, किसान अशोक पाटीदार ने बताया कि प्रति एकड़ फसल पर 25 हजार रुपए का खर्च आया है। थोक में 5 से 6 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर लागत भी नहीं निकल पा रही है। उन्होंने मांग की कि तरबूज का न्यूनतम भाव 10 रुपए प्रति किलोग्राम तय किया जाना चाहिए। 15 अप्रैल के बाद तेज गर्मी पड़ने पर दाम बढ़ने की उम्मीद किसानों का मानना है कि जल्दी लगाई गई फसल अगले 15 दिनों में खेतों से निकल जाएगी। अभी तक ज्यादा गर्मी नहीं पड़ी है, लेकिन 15 अप्रैल से तेज गर्मी पड़ने की संभावना है। गर्मी बढ़ने से तरबूज की मांग बढ़ेगी, जिससे इसके दाम भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।














































