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महिलाओं के लिए अमृत है सतावर, जानिए इसके गजब फायदे

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Shatavari Benefits For Women: झारखंड के जंगलों में पाई जाने वाली सतावर यानी शतावरी एक ऐसी औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसे आयुर्वेद में खास तौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. इसकी जड़ों में मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने, हार्मोन संतुलन बनाए रखने और प्रसव के बाद दूध बढ़ाने में मदद करते हैं. ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से इसे प्राकृतिक टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पाचन, नींद और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती है. रिपोर्ट- शशिकांत कुमार ओझा

झारखंड का बड़ा भू-भाग जंगल और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समाज आज भी पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहता है. इन्हीं जंगलों में मिलने वाला एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है सतावर, जिसे शतावरी, सतावरि, सतमूली और सरनोई जैसे कई नामों से जाना जाता है. आयुर्वेद में इस पौधे को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी बताया गया है.

हेल्थ

खासतौर पर इसकी जड़ में मौजूद औषधीय गुण महिलाओं की शारीरिक कमजोरी दूर करने, प्रसव के बाद दूध बढ़ाने और शरीर को ताकत देने में उपयोगी माने जाते हैं. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं लंबे समय से इस जड़ी-बूटी का घरेलू इलाज के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं.

हेल्थ

घरेलू महिला नीलम दीदी ने लोकल18 को बताया कि सूखी सतावर की जड़ों का बारीक चूर्ण बनाकर उसका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है. एक चम्मच सतावर चूर्ण को गर्म दूध और मिश्री के साथ सुबह-शाम लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर मजबूत बनता है. प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की कमी होने पर सतावर चूर्ण को दूध के साथ लेना काफी लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसे माताओं के लिए प्राकृतिक टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता है.

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हेल्थ

उन्होंने कहा कि सतावर पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है. इसके चूर्ण को घी में पकाकर सेवन करने से पेट की जलन, एसिडिटी और कफ की समस्या में राहत मिलती है. वहीं अनिद्रा और मानसिक तनाव से परेशान लोगों के लिए भी यह जड़ी-बूटी उपयोगी मानी जाती है.

हेल्थ

सतावर के चूर्ण को दूध में खीर की तरह पकाकर रात में खाने से अच्छी नींद आती है और तनाव कम होता है. इसके अलावा सतावर की जड़ के रस को बराबर मात्रा में गाय के दूध के साथ पीने से गुर्दे की पथरी में भी आराम मिलने की बात कही जाती है. इससे खून की कमी दूर होती है.

हेल्थ

आगे कहा कि शतावरी महिलाओं के हार्मोन संतुलन, कमजोरी दूर करने और शरीर को पोषण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. झारखंड के जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली यह जड़ी-बूटी स्थानीय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

हेल्थ

हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले जानकार वैद्य या चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सके.

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झारखंड का बड़ा भू-भाग जंगल और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समाज आज भी पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहता है. इन्हीं जंगलों में मिलने वाला एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है सतावर, जिसे शतावरी, सतावरि, सतमूली और सरनोई जैसे कई नामों से जाना जाता है. आयुर्वेद में इस पौधे को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी बताया गया है.

हेल्थ

खासतौर पर इसकी जड़ में मौजूद औषधीय गुण महिलाओं की शारीरिक कमजोरी दूर करने, प्रसव के बाद दूध बढ़ाने और शरीर को ताकत देने में उपयोगी माने जाते हैं. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं लंबे समय से इस जड़ी-बूटी का घरेलू इलाज के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं.

हेल्थ

घरेलू महिला नीलम दीदी ने लोकल18 को बताया कि सूखी सतावर की जड़ों का बारीक चूर्ण बनाकर उसका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है. एक चम्मच सतावर चूर्ण को गर्म दूध और मिश्री के साथ सुबह-शाम लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर मजबूत बनता है. प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की कमी होने पर सतावर चूर्ण को दूध के साथ लेना काफी लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसे माताओं के लिए प्राकृतिक टॉनिक के रूप में उपयोग किया जाता है.

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उन्होंने कहा कि सतावर पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है. इसके चूर्ण को घी में पकाकर सेवन करने से पेट की जलन, एसिडिटी और कफ की समस्या में राहत मिलती है. वहीं अनिद्रा और मानसिक तनाव से परेशान लोगों के लिए भी यह जड़ी-बूटी उपयोगी मानी जाती है.

हेल्थ

सतावर के चूर्ण को दूध में खीर की तरह पकाकर रात में खाने से अच्छी नींद आती है और तनाव कम होता है. इसके अलावा सतावर की जड़ के रस को बराबर मात्रा में गाय के दूध के साथ पीने से गुर्दे की पथरी में भी आराम मिलने की बात कही जाती है. इससे खून की कमी दूर होती है.

हेल्थ

आगे कहा कि शतावरी महिलाओं के हार्मोन संतुलन, कमजोरी दूर करने और शरीर को पोषण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. झारखंड के जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली यह जड़ी-बूटी स्थानीय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

हेल्थ

हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले जानकार वैद्य या चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि इसका सही और सुरक्षित लाभ मिल सके.

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