Saturday, 29 Aug 2026 | 03:53 PM

Trending :

EXCLUSIVE

मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

रेटिंग: 2/5 कास्टः राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा डायरेक्टरः विवेक दास चौधरी टोस्टर का कॉन्सेप्ट सुनने में दिलचस्प है और फिल्म की शुरुआत भी उम्मीद जगाती है। पहले कुछ मिनटों में एक अलग तरह का टोन दिखता है, जिसमें हल्की कॉमेडी के साथ एक अजीब सा सस्पेंस भी है। लेकिन यह इंटरेस्ट ज्यादा देर टिक नहीं पाता। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अपनी पकड़ खोती चली जाती है और जो शुरुआत में ताजगी लगती है, वही बाद में बोझ बन जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस इंसान है और अपनी दी हुई चीजें भी वापस लेने से नहीं हिचकता। शादी में दिया हुआ एक टोस्टर जब वह वापस मांगता है, तो वही टोस्टर एक मर्डर केस से जुड़ जाता है। इसके बाद रामाकांत उसे छुपाने और वापस पाने की कोशिश में उलझता जाता है। कहानी में मर्डर, ब्लैकमेल और सीक्रेट्स जैसे कई एलिमेंट्स आते हैं, लेकिन ये सब बार-बार रिपीट होते रहते हैं, जिससे कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूमती नजर आती है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार राव पूरी फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं और कई जगहों पर सफल भी होते हैं। उनका किरदार इरिटेटिंग होते हुए भी रिलेटेबल लगता है और कुछ सीन में वे हंसाने में कामयाब रहते हैं। सान्या मल्होत्रा का रोल सीमित है और उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन की वजह से असर नहीं छोड़ पाते। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? डायरेक्शन की बात करें तो विवेक दास चौधरी का आइडिया नया जरूर था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरह से उतारने में कमी रह गई। फिल्म का सेकेंड हाफ खिंचा हुआ लगता है और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ नजर आता है। क्लाइमैक्स में बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है, जिससे कहानी का असर खत्म हो जाता है। तकनीकी तौर पर सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को सपोर्ट नहीं कर पाते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दोनों ही कमजोर हैं और फिल्म के इमोशनल या कॉमिक मोमेंट्स को उभार नहीं पाते। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? कुल मिलाकर, टोस्टर एक अच्छा आइडिया लेकर आती है, लेकिन कमजोर लेखन और ढीले निर्देशन की वजह से असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म पूरे समय बांधे रखने में नाकाम रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Ranveer Singh Pralay Film Shooting August

May 29, 2026/
2:58 pm

25 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेता रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच चल रहे विवाद का असर उनकी आने...

निवाड़ी में सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने पर प्रदर्शन:पृथ्वीपुर और जेरोन में PM आवास और भूमि पट्टे की मांग; तहसीलदार को दिया ज्ञापन

April 30, 2026/
4:27 pm

निवाड़ी जिले की पृथ्वीपुर और जेरोन नगर परिषद के पात्र हितग्राहियों ने जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ न मिलने के विरोध...

शाहरुख खान फिर करेंगे रोमांस, विंटेज लुक में नई फिल्म:किंग के बाद रोमांटिक अंदाज में वापसी, क्लासिक कहानी को मॉडर्न टच के साथ पेश करेंगे

March 17, 2026/
7:09 pm

शाहरुख खान एक बार फिर बड़े पर्दे पर रोमांस का जादू बिखेरने की तैयारी में हैं। हाल ही में आई...

authorimg

February 26, 2026/
7:06 pm

Last Updated:February 26, 2026, 19:06 IST Post-Meal Bowel Movements: खाना खाने के तुरंत बाद शौच जाना अक्सर गैस्ट्रोकॉलिक रिफ्लेक्स के...

यात्री बस ने बाइक सवार दो को टक्कर मारी:भोपाल में हादसे के बाद एक की मौत, एक जख्मी

April 2, 2026/
4:28 pm

भोपाल के बिलखिरिया इलाके में बुधवार रात तेज रफ्तार यात्री बस ने बाइक सवार दो लोगों को टक्कर मार दी।...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

मूवी रिव्यूः टोस्टर:कंजूसी का मजेदार आइडिया, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले फिल्म को बना देता है बोझिल

रेटिंग: 2/5 कास्टः राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा डायरेक्टरः विवेक दास चौधरी टोस्टर का कॉन्सेप्ट सुनने में दिलचस्प है और फिल्म की शुरुआत भी उम्मीद जगाती है। पहले कुछ मिनटों में एक अलग तरह का टोन दिखता है, जिसमें हल्की कॉमेडी के साथ एक अजीब सा सस्पेंस भी है। लेकिन यह इंटरेस्ट ज्यादा देर टिक नहीं पाता। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अपनी पकड़ खोती चली जाती है और जो शुरुआत में ताजगी लगती है, वही बाद में बोझ बन जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस इंसान है और अपनी दी हुई चीजें भी वापस लेने से नहीं हिचकता। शादी में दिया हुआ एक टोस्टर जब वह वापस मांगता है, तो वही टोस्टर एक मर्डर केस से जुड़ जाता है। इसके बाद रामाकांत उसे छुपाने और वापस पाने की कोशिश में उलझता जाता है। कहानी में मर्डर, ब्लैकमेल और सीक्रेट्स जैसे कई एलिमेंट्स आते हैं, लेकिन ये सब बार-बार रिपीट होते रहते हैं, जिससे कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूमती नजर आती है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार राव पूरी फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं और कई जगहों पर सफल भी होते हैं। उनका किरदार इरिटेटिंग होते हुए भी रिलेटेबल लगता है और कुछ सीन में वे हंसाने में कामयाब रहते हैं। सान्या मल्होत्रा का रोल सीमित है और उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन की वजह से असर नहीं छोड़ पाते। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? डायरेक्शन की बात करें तो विवेक दास चौधरी का आइडिया नया जरूर था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरह से उतारने में कमी रह गई। फिल्म का सेकेंड हाफ खिंचा हुआ लगता है और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ नजर आता है। क्लाइमैक्स में बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है, जिससे कहानी का असर खत्म हो जाता है। तकनीकी तौर पर सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को सपोर्ट नहीं कर पाते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दोनों ही कमजोर हैं और फिल्म के इमोशनल या कॉमिक मोमेंट्स को उभार नहीं पाते। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? कुल मिलाकर, टोस्टर एक अच्छा आइडिया लेकर आती है, लेकिन कमजोर लेखन और ढीले निर्देशन की वजह से असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म पूरे समय बांधे रखने में नाकाम रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.