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रोज इस्तेमाल कर रहे हैं ये तकिया? बन सकता है दर्द और एलर्जी की बड़ी वजह, जानें कब चेंज करना सही

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When to change pillow: अच्छी नींद के लिए सही तकिया चुनना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत या पुराना तकिया आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है. समय रहते इसे बदलना कई समस्याओं से बचा सकता है.

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तकिए की उम्र उसके मटेरियल पर निर्भर करती है.

हम अच्छी नींद पाने के लिए अक्सर महंगे गद्दे, आरामदायक बिस्तर और शांत कमरे पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक अहम चीज को नजरअंदाज कर देते हैं और वह है तकिया. रिसर्च के मुताबिक गलत या पुराना तकिया सिर्फ नींद की क्वालिटी ही खराब नहीं करता, बल्कि शरीर के पोश्चर और सांस से जुड़ी कई समस्याओं को भी बढ़ा सकता है. यही कारण है कि तकिए का सही चुनाव और समय पर उसे बदलना उतना ही जरूरी है जितना एक अच्छे गद्दे का होना. अगर तकिया सही सपोर्ट नहीं देता, तो इसका असर सीधे आपकी सेहत पर पड़ सकता है.

सबसे पहले बात करें पोश्चर की, तो हमारी रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक रूप से सीधी स्थिति में रहने के लिए बनी होती है, खासकर सोते समय. यदि तकिया बहुत ऊंचा या बहुत पतला होता है, तो यह गर्दन को सही सहारा नहीं दे पाता, जिससे रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका सीधा असर गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर पड़ता है, जिससे सुबह उठते ही दर्द, अकड़न या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए ऐसा तकिया चुनना जरूरी है, जो आपकी गर्दन और सिर को सही पोजिशन में रखे, ताकि शरीर को पूरी तरह आराम मिल सके और नींद भी बेहतर हो.

तकिया कब बदलें?
तकिए को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से उसमें धूल, पसीना, मृत त्वचा के कण और सूक्ष्म जीव जमा होने लगते हैं, जिन्हें डस्ट माइट्स कहा जाता है. ये एलर्जी, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. भले ही आप तकिए का कवर नियमित रूप से बदलते हों या उसे साफ करते हों, लेकिन अंदर की गंदगी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती. यही वजह है कि विशेषज्ञ हर 2 से 3 साल में तकिया बदलने की सलाह देते हैं.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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सबसे पहले बात करें पोश्चर की, तो हमारी रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक रूप से सीधी स्थिति में रहने के लिए बनी होती है, खासकर सोते समय. यदि तकिया बहुत ऊंचा या बहुत पतला होता है, तो यह गर्दन को सही सहारा नहीं दे पाता, जिससे रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका सीधा असर गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर पड़ता है, जिससे सुबह उठते ही दर्द, अकड़न या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए ऐसा तकिया चुनना जरूरी है, जो आपकी गर्दन और सिर को सही पोजिशन में रखे, ताकि शरीर को पूरी तरह आराम मिल सके और नींद भी बेहतर हो.

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