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केन-बेतवा परियोजना के प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमति:पारदर्शी सर्वे, मुआवजा बढ़ाने पर प्रशासन राजी; आंदोलनकारी बोले- भरोसा नहीं जारी रहेगा आंदोलन

केन-बेतवा परियोजना के प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमति:पारदर्शी सर्वे, मुआवजा बढ़ाने पर प्रशासन राजी; आंदोलनकारी बोले- भरोसा नहीं जारी रहेगा आंदोलन

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी और किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को “पंचतत्व सत्याग्रह” के तहत हुए भावनात्मक और आक्रामक प्रदर्शन ने प्रशासन को वार्ता के लिए मजबूर कर दिया। खासतौर पर सांकेतिक फांसी सत्याग्रह के बाद हालात ऐसे बने कि अधिकारियों को तत्काल बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। पांच तत्वों में विरोध, नया तरीका अपना रहे प्रदर्शनकारी आंदोलनकारियों ने जल, मिट्टी, अग्नि (चिता), वायु (सांकेतिक फांसी) और उपवास के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। केन नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह, जमीन पर मिट्टी सत्याग्रह, चिता आंदोलन के जरिए विस्थापन को “मृत्यु” का प्रतीक बताया गया। वहीं पूरे गांव में चूल्हा बंद रखकर भूख हड़ताल की गई। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब 5 आंदोलनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर चेतावनी दी। इस घटनाक्रम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को हिला दिया और तुरंत बातचीत शुरू करनी पड़ी। प्रशासन ने मानी प्रमुख मांगें लगातार दबाव और बढ़ते जनसमर्थन के बीच छतरपुर और पन्ना जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ लंबी बैठक हुई। इसमें कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी— विस्थापन प्रभावित गांवों का पूरी तरह पारदर्शी सर्वे होगा। स्थानीय एसडीएम को हटाकर बाहरी अधिकारियों की तैनाती। हर गांव में एसडीएम/डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी सर्वे करेंगे। 7 दिनों में सर्वे पूरा करने का आश्वासन दिया। बिजावर एसडीएम का हस्तक्षेप समाप्त होगा। गांव के बदले सुविधायुक्त नया गांव बसाने पर सहमति। कट-ऑफ डेट अप्रैल 2026 करने पर विचार। मुआवजा राशि बढ़ाने पर चर्चा (12.30 लाख से 25 लाख तक) आदिवासी महिलाओं के लिए विशेष पैकेज पर सहमति। आंदोलन अब भी जारी रख रहे प्रदर्शनकारी हालांकि प्रशासन ने कई मांगों पर सहमति जताई है, लेकिन आंदोलनकारियों का भरोसा अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार लिखित आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हुआ। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा, “यह सिर्फ अधिकार की नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक फैसले जमीन पर लागू नहीं होंगे, आंदोलन जारी रहेगा।” आंदोलन में हजारों आदिवासी महिलाएं और किसान शामिल हो चुके हैं। लगातार बढ़ती भीड़ और समर्थन से यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। प्रशासनिक दबाव के बावजूद आंदोलन और तेज होता नजर आ रहा है। आंदोलनकारियों का साफ संदेश है-“मिट्टी हमारी, नदी हमारी, गांव हमारा… मनमानी अब नहीं चलेगी।” गुरूवार आगे की रणनीति तय होगी गुरुवार को आंदोलनकारियों की बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें तय किया जाएगा कि आंदोलन स्थगित किया जाए या और तेज किया जाए। देखें प्रदर्शन की तस्वीरें

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