Friday, 17 Apr 2026 | 08:15 PM

Trending :

EXCLUSIVE

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं, जिनके खेतों का सेटेलाइट सर्वे होना है। यह ​जिम्मा राजस्व विभाग का है। पटवारी, आरआई को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे सर्वे पूरा कर लें, लेकिन सर्वे करने में लगातार देरी की जा रही है। यदि जरा सा भी डेटा मिसमैच ​हो रहा है तो वह पुनर्सत्यापन में चला जाता है। सर्वे पूरा नहीं होने के कारण किसान पंजीयन के लिए जाता है तो उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। मप्र के 55 जिलों में ऐसे करीब 3 लाख किसान हैं। किसानों ने बताया कि तहसील में जवाब दिया जाता है कि पुनरीक्षण होना है, इसलिए अटका है। सेटेलाइट सर्वे में वे किसान उलझे हुए हैं, जिनके पास दो एकड़ से अधिक जमीन है। इस मामले में खाद्य विभाग से जानकारी ली तो पता चला कि मप्र में कलेक्टरों की जांच में करीब 45 हजार खसरे ऐसे सामने आए हैं, जिनमें कोई निर्माण हो चुका है। मंदिर है, मकान हैं या अन्य कोई शेड है। वहीं ऐसे भी खसरे सामने आए हैं, जिनमें नदी, तालाब आ चुके हैं। ऐसे खसरों का पुर्नसत्यापन कराया जा रहा है। इसलिए सर्वे में देरी हो रही है। हालांकि पहले भी दो बार सर्वे हो चुका है। सर्वे से जुड़े पटवारियों ने बताया कि जग गिरदावरी जमा की गई थी, तब पहली सर्वे हुआ था और दूसरी बार फसल कटने पर। किसानों के सहयोग के लिए एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से शिकायत आ रही है कि किसानों की समस्या हल करने के लिए एक भी अधिकारी तकनीकी सहयोग के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। धूत ने बताया कि तीन लाख से अधिक किसान सेटेलाइट सर्वे, सर्वर में उलझकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस संबंध में जब कृषि विभाग के अफसरों से बात की तो उन्होंने क​हा कि यह राजस्व का काम है। जब राजस्व से बात करो तो बोलते हैं डेटा कृषि विभाग को भेज दिया। धूत का आरोप है कि इस सरकारी लेतलाली से किसान औने–पौने दामों में अपनी उपज बाहर बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सर्वर डाउन की भी बड़ी समस्या सभी जिलों में सहकारी समितियों को 13 अप्रैल को जिला प्रबंधक की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि बिना स्लॉट बुक कोई तुलाई नहीं करें। लेकिन जब किसान पंजीयन के लिए सोसायटी जाते हैं तो बार–बार सर्वर डाउन की समस्या सामने आ जाती है। 45 हजार खसरों में गड़बड़ी संज्ञान में आया था कि कुछ खसरों में नदी, तालाब या अन्य कुछ आ रहा है। सभी कलेक्टरों को कहा है कि इसकी बारीकी से जांच करवाए। अब तक 45 हजार खसरों में गड़बड़ी सामने आई है। कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य आपू​र्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Ishaan Kishan Eyes Big Score After 3000 Runs

April 11, 2026/
9:48 am

पटना50 मिनट पहले कॉपी लिंक आज IPL में पहला मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और पंजाब किंग्स (PBKS) के बीच न्यू...

सागर में आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि:देर रात हवाओं के साथ हुई झमाझम बारिश; जैसीनगर, बंडा समेत आधे जिले में गेहूं की फसल को नुकसान

April 5, 2026/
10:41 am

सागर में इस समय मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कभी धूप-छांव तो कभी हवा-आंधी के साथ...

असम विधानसभा चुनाव 2026: असम चुनाव के लिए 9 अप्रैल को छुट्टी, वोटिंग के लिए घोषित की गई विशेष सुविधा

March 24, 2026/
2:15 pm

असम में विधानसभा चुनाव को लेकर सार्वभौम पार्टी तेज हो गई है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने 9 अप्रैल...

Kolkata Knight Riders vs Punjab Kings Live Score: IPL 2026 Match Today Updates From Eden Gardens Kolkata(PTI)

April 6, 2026/
6:19 pm

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 18:19 IST बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास चुनाव से पहले पहलगाम शैली में...

सतना जिला अस्पताल का अंतिम मूल्यांकन:टीम ने बिस्तरों पर साफ चादरें पाईं, अतिक्रमण पर जताई नाराजगी

February 21, 2026/
8:52 am

सतना में कायाकल्प अभियान के तहत शुक्रवार को सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय जिला चिकित्सालय का अंतिम मूल्यांकन किया गया। इस...

शिवपुरी के बदरवास में दो दुकानों में लगी आग:जेसीबी से शटर-दीवार तोड़ी, ढाई घंटे में पाया काबू, डिफ्रीजर, माइक्रोवेव समेत लाखों का सामान जला

April 3, 2026/
1:57 pm

शिवपुरी जिले के बदरवास कस्बे में गुरुवार देर रात दो दुकानों में आग लग गई। किराना और बेकरी की इन...

हरियाणवी एक्ट्रेस की कमर छूने का मामला पहुंचा महिला आयोग:अंजलि राघव ने कहा- पवन सिंह की टीम ने बदनाम किया; सीता का रोल छिना

March 20, 2026/
5:00 am

हरियाणवी एक्ट्रेस अंजलि राघव की स्टेज पर भोजपुरी सिंगर-एक्टर द्वारा कमर छूने का मामला फिर तूल पकड़ गया है। अंजिल...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं, जिनके खेतों का सेटेलाइट सर्वे होना है। यह ​जिम्मा राजस्व विभाग का है। पटवारी, आरआई को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे सर्वे पूरा कर लें, लेकिन सर्वे करने में लगातार देरी की जा रही है। यदि जरा सा भी डेटा मिसमैच ​हो रहा है तो वह पुनर्सत्यापन में चला जाता है। सर्वे पूरा नहीं होने के कारण किसान पंजीयन के लिए जाता है तो उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। मप्र के 55 जिलों में ऐसे करीब 3 लाख किसान हैं। किसानों ने बताया कि तहसील में जवाब दिया जाता है कि पुनरीक्षण होना है, इसलिए अटका है। सेटेलाइट सर्वे में वे किसान उलझे हुए हैं, जिनके पास दो एकड़ से अधिक जमीन है। इस मामले में खाद्य विभाग से जानकारी ली तो पता चला कि मप्र में कलेक्टरों की जांच में करीब 45 हजार खसरे ऐसे सामने आए हैं, जिनमें कोई निर्माण हो चुका है। मंदिर है, मकान हैं या अन्य कोई शेड है। वहीं ऐसे भी खसरे सामने आए हैं, जिनमें नदी, तालाब आ चुके हैं। ऐसे खसरों का पुर्नसत्यापन कराया जा रहा है। इसलिए सर्वे में देरी हो रही है। हालांकि पहले भी दो बार सर्वे हो चुका है। सर्वे से जुड़े पटवारियों ने बताया कि जग गिरदावरी जमा की गई थी, तब पहली सर्वे हुआ था और दूसरी बार फसल कटने पर। किसानों के सहयोग के लिए एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से शिकायत आ रही है कि किसानों की समस्या हल करने के लिए एक भी अधिकारी तकनीकी सहयोग के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। धूत ने बताया कि तीन लाख से अधिक किसान सेटेलाइट सर्वे, सर्वर में उलझकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस संबंध में जब कृषि विभाग के अफसरों से बात की तो उन्होंने क​हा कि यह राजस्व का काम है। जब राजस्व से बात करो तो बोलते हैं डेटा कृषि विभाग को भेज दिया। धूत का आरोप है कि इस सरकारी लेतलाली से किसान औने–पौने दामों में अपनी उपज बाहर बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सर्वर डाउन की भी बड़ी समस्या सभी जिलों में सहकारी समितियों को 13 अप्रैल को जिला प्रबंधक की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि बिना स्लॉट बुक कोई तुलाई नहीं करें। लेकिन जब किसान पंजीयन के लिए सोसायटी जाते हैं तो बार–बार सर्वर डाउन की समस्या सामने आ जाती है। 45 हजार खसरों में गड़बड़ी संज्ञान में आया था कि कुछ खसरों में नदी, तालाब या अन्य कुछ आ रहा है। सभी कलेक्टरों को कहा है कि इसकी बारीकी से जांच करवाए। अब तक 45 हजार खसरों में गड़बड़ी सामने आई है। कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य आपू​र्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.