स्वच्छ भारत अभियान में अपना लोहा मनवाने के बाद अब इंदौर एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के मानचित्र पर चमकने के लिए तैयार है। भारत द्वारा 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) की मेजबानी के तहत कृषि क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण बैठक मध्य प्रदेश की
.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए व्यक्तिगत रूप से इंदौर का चयन किया है। पिछले दिनों दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस फैसले से अवगत कराया था, जिसके बाद से ही राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर को इस आयोजन के संभावित स्थल के रूप में देखा जा रहा है, जहां इससे पहले जी-20 और प्रवासी भारतीय सम्मेलन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।
पांच दिनों तक चलेगा मंथन का दौर
इंदौर में होने वाला यह आयोजन दो मुख्य चरणों में विभाजित होगा।
- मंत्रियों के आगमन से पहले 9 से 11 जून तक तीन दिवसीय अधिकारियों की बैठक होगी, जिसमें कृषि क्षेत्र से जुड़े तकनीकी पहलुओं और रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
- 12 और 13 जून को मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। इस बार के शिखर सम्मेलन की थीम ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ रखी गई है।
ब्रिक्स का बदलता स्वरूप और MP की भूमिका
ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद अब इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी शामिल हैं।
वैश्विक आबादी का 45 फीसदी और दुनिया की अर्थव्यवस्था का 28 फीसदी हिस्सा रखने वाले इन देशों का जमावड़ा इंदौर में होना शहर की ब्रांडिंग के लिए मील का पत्थर साबित होगा। 2025 में ब्राजील द्वारा की गई मेजबानी के बाद अब भारत इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ा रहा है, जिससे मध्य प्रदेश के कृषि विकास को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी।















































