नई दिल्ली8 मिनट पहले
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आईवियर रिटेलर कंपनी लेंसकार्ट ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पब्लिकली माफी मांगी है। इसके अलावा कंपनी ने अब एक नई और पारदर्शी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की है, जिसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को पहनने की पूरी अनुमति दी गई है।
लेंसकार्ट की नई पॉलिसी में अब बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे आस्था के प्रतीकों को शामिल किया गया है। कंपनी ने X पर बयान जारी कर कहा कि वे अपनी गाइडलाइंस को सार्वजनिक और पारदर्शी बना रहे हैं ताकि ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर किया जा सके।

विवाद की वजह, वायरल हुआ पुराना डॉक्युमेंट
यह पूरा विवाद इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब लेंसकार्ट की ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक डॉक्युमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी।
फाउंडर पीयूष बंसल ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने दखल देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्युमेंट एक ‘पुराना वर्जन’ था और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता।
बंसल ने कहा कि हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति के किसी भी रूप पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के लिए माफी भी मांगी है।

लेंसकार्ट बोला- हम भारतीयों के लिए बने हैं
कंपनी ने अपने नए बयान में अपनी जड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है।
कंपनी के 2,400 से ज्यादा स्टोर्स ऐसे लोगों द्वारा चलाए जाते हैं जो अपनी परंपराओं को साथ लेकर आते हैं।
कंपनी ने वादा किया है कि भविष्य की हर ट्रेनिंग और पॉलिसी में समावेशी मूल्यों का ध्यान रखा जाएगा।
क्या होता है ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’?
कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां अपने कर्मचारियों के ड्रेस कोड और व्यवहार के लिए कुछ नियम बनाती हैं, जिसे ग्रूमिंग पॉलिसी कहा जाता है।
इसका उद्देश्य ब्रैंड की एक समान पहचान बनाना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य माना जाता है।
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लेंसकार्ट अपने ड्रेस कोड को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर कंपनी का एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है। इसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है।
विवाद तब बढ़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X पर इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने कंपनी के फाउंडर से पूछा- पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? इसके बाद लोगों ने लेंसकार्ट को ट्रोल किया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाए। पूरी खबर पढ़ें…















































