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एंजायटी और डिप्रेशन में क्या अंतर है? दोनों में क्या ज्यादा खतरनाक, साइकेट्रिस्ट से जान लीजिए

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Anxiety and Depression Difference: एंजायटी और डिप्रेशन दोनों मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, लेकिन इनके लक्षण और प्रभाव अलग होते हैं. एंजायटी में अत्यधिक चिंता और डर होता है, जबकि डिप्रेशन में गहरी उदासी और निराशा महसूस होती है. दोनों ही कंडीशन खतरनाक होती हैं और सही समय पर साइकेट्रिस्ट से मिलकर ट्रीटमेंट कराना जरूरी होता है.

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एंजायटी और डिप्रेशन के बीच बड़ा अंतर है, जिसे समझना जरूरी है.

Anxiety vs Depression Symptoms: आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एंजायटी और डिप्रेशन सबसे कॉमन मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं. करोड़ों की संख्या में लोग इन परेशानियों से जूझ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि अधिकतर लोग एंजायटी और डिप्रेशन के बीच अंतर नहीं समझ पाते हैं. इसकी वजह से परेशानी बढ़ती रहती है और सही समय पर एक्सपर्ट की मदद नहीं ले पाते हैं. एंजायटी और डिप्रेशन के बीच अंतर जानना बहुत जरूरी है, ताकि इनकी वक्त रहते पहचान की जा सके. काउंसिलिंग और दवाओं की मदद से दोनों प्रॉब्लम्स को ठीक किया जा सकता है.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया एंजायटी एक मेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें लोग फ्यूचर की अनिश्चितताओं को लेकर अत्यधिक चिंता और डर महसूस करते हैं. इसमें व्यक्ति को लगातार बेचैनी, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं. कई बार यह डर बिना किसी स्पष्ट कारण के भी महसूस होता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है. यह स्थिति अक्सर तनावपूर्ण परिस्थितियों में बढ़ जाती है. अगर थोड़ा बहुत एंजायटी हो, तो यह नॉर्मल है. ज्यादा होने लगे, तब यह डिसऑर्डर बन जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर प्रेरणा ने बताया डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदास और निराश महसूस करता है. उसे किसी भी चीज में इंट्रेस्ट नहीं रहता और किसी भी काम में मन नहीं लगता. इससे आत्मविश्वास कम हो जाता है और कई बार जीवन के प्रति नकारात्मक विचार भी आने लगते हैं. डिप्रेशन केवल मूड की समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोच, व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है. दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि एंजायटी में व्यक्ति भविष्य की चिंता से जूझता है, जबकि डिप्रेशन में व्यक्ति वर्तमान की निराशा से परेशान रहता है. एंजायटी में शरीर हाइपर एक्टिव रहता है, जबकि डिप्रेशन में एनर्जी कम हो जाती है. कई मामलों में दोनों एक साथ भी हो सकते हैं, जिसे मिक्स्ड एंजायटी-डिप्रेशन कहा जाता है.

अगर गंभीरता की बात करें, तो दोनों ही कंडीशन खतरनाक हो सकती हैं. हालांकि डिप्रेशन को अक्सर ज्यादा गंभीर माना जाता है, क्योंकि इसमें आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं. एंजायटी लंबे समय तक रहने पर हार्ट डिजीज, नींद की समस्याएं और मानसिक थकान पैदा हो सकती है. इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर इलाज लेना जरूरी है. इन दोनों परेशानियों का इलाज संभव है. थेरेपी, काउंसलिंग, लाइफस्टाइल बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाइयों से मरीज की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. समय पर पहचान और इलाज से इन्हें पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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Anxiety vs Depression Symptoms: आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एंजायटी और डिप्रेशन सबसे कॉमन मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं. करोड़ों की संख्या में लोग इन परेशानियों से जूझ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि अधिकतर लोग एंजायटी और डिप्रेशन के बीच अंतर नहीं समझ पाते हैं. इसकी वजह से परेशानी बढ़ती रहती है और सही समय पर एक्सपर्ट की मदद नहीं ले पाते हैं. एंजायटी और डिप्रेशन के बीच अंतर जानना बहुत जरूरी है, ताकि इनकी वक्त रहते पहचान की जा सके. काउंसिलिंग और दवाओं की मदद से दोनों प्रॉब्लम्स को ठीक किया जा सकता है.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया एंजायटी एक मेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें लोग फ्यूचर की अनिश्चितताओं को लेकर अत्यधिक चिंता और डर महसूस करते हैं. इसमें व्यक्ति को लगातार बेचैनी, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं. कई बार यह डर बिना किसी स्पष्ट कारण के भी महसूस होता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है. यह स्थिति अक्सर तनावपूर्ण परिस्थितियों में बढ़ जाती है. अगर थोड़ा बहुत एंजायटी हो, तो यह नॉर्मल है. ज्यादा होने लगे, तब यह डिसऑर्डर बन जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर प्रेरणा ने बताया डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदास और निराश महसूस करता है. उसे किसी भी चीज में इंट्रेस्ट नहीं रहता और किसी भी काम में मन नहीं लगता. इससे आत्मविश्वास कम हो जाता है और कई बार जीवन के प्रति नकारात्मक विचार भी आने लगते हैं. डिप्रेशन केवल मूड की समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोच, व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है. दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि एंजायटी में व्यक्ति भविष्य की चिंता से जूझता है, जबकि डिप्रेशन में व्यक्ति वर्तमान की निराशा से परेशान रहता है. एंजायटी में शरीर हाइपर एक्टिव रहता है, जबकि डिप्रेशन में एनर्जी कम हो जाती है. कई मामलों में दोनों एक साथ भी हो सकते हैं, जिसे मिक्स्ड एंजायटी-डिप्रेशन कहा जाता है.

अगर गंभीरता की बात करें, तो दोनों ही कंडीशन खतरनाक हो सकती हैं. हालांकि डिप्रेशन को अक्सर ज्यादा गंभीर माना जाता है, क्योंकि इसमें आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं. एंजायटी लंबे समय तक रहने पर हार्ट डिजीज, नींद की समस्याएं और मानसिक थकान पैदा हो सकती है. इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर इलाज लेना जरूरी है. इन दोनों परेशानियों का इलाज संभव है. थेरेपी, काउंसलिंग, लाइफस्टाइल बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाइयों से मरीज की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. समय पर पहचान और इलाज से इन्हें पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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