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किस उम्र से बच्चों की आंखें करवानी चाहिए टेस्ट? सही एज में आई चेकअप क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानिए

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When To Go for Kids Eye Test: बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे नजर से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है. नियमित आई चेकअप बच्चों के बेहतर विकास और पढ़ाई में भी मदद करता है. डॉक्टर की मानें तो 3 साल के बाद साल में एक बार बच्चे की आंखें जरूर चेक करानी चाहिए.

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3 साल की उम्र से बच्चों की आंखें चेक करवानी चाहिए.

Child Eye Check-Up Guide: आज के जमाने में बच्चों को भी आंखों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. 3 से 4 साल की उम्र में ही कई बच्चों की आंखों पर चश्मा लग जाता है और इससे बच्चे परेशान होने लगते हैं. कई बार पैरेंट्स को पता ही नहीं चलता है कि उनके बच्चे की नजर कमजोर हो गई है. इसका असर उनकी पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरी तरह पड़ता है. आजकल मोबाइल, टीवी और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों पर असर डाल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की आंखों का टेस्ट किस उम्र से कराना चाहिए और यह क्यों जरूरी है. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं.

नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया नवजात शिशु की आंखों की पहली जांच जन्म के तुरंत बाद ही कर ली जाती है, ताकि किसी जन्मजात समस्या का पता लगाया जा सके. इसके बाद 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बच्चों की आंखों का एक बेसिक चेकअप करवाना चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर यह देखते हैं कि बच्चा चीजों को सही तरीके से देख और पहचान पा रहा है या नहीं. अगर इस चरण में कोई समस्या मिलती है, तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है. कई बच्चों में आंखों से जुड़ी जन्मजात समस्याएं भी होती हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 3 से 5 साल की उम्र को बच्चों की आंखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान उनकी विजन डेवलपमेंट तेजी से होती है. इसलिए इस उम्र में नियमित रूप से आई टेस्ट कराना जरूरी है. अगर इस समय नजर की कमजोरी, भेंगापन या अन्य समस्या पकड़ में आ जाए, तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है. 5 साल के बाद हर 1 से 2 साल में बच्चों की आंखों की जांच करानी चाहिए. अगर बच्चा बार-बार आंखें मलता है, टीवी के पास बैठता है, सिरदर्द की शिकायत करता है या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाता, तो ये संकेत हैं कि उसकी नजर कमजोर हो रही है और तुरंत जांच की जरूरत है.

एक्सपर्ट के मुताबिक समय पर आंखों की जांच न कराने से मायोपिया या एंब्लायोपिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इनका इलाज शुरुआती उम्र में आसान होता है, लेकिन देर होने पर यह स्थायी भी हो सकती हैं. बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना उनकी अच्छी दृष्टि और बेहतर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. नियमित आई चेकअप से न सिर्फ आंखों की समस्याओं को रोका जा सकता है, बल्कि बच्चे की पढ़ाई और विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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3 साल की उम्र से बच्चों की आंखें चेक करवानी चाहिए.

Child Eye Check-Up Guide: आज के जमाने में बच्चों को भी आंखों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. 3 से 4 साल की उम्र में ही कई बच्चों की आंखों पर चश्मा लग जाता है और इससे बच्चे परेशान होने लगते हैं. कई बार पैरेंट्स को पता ही नहीं चलता है कि उनके बच्चे की नजर कमजोर हो गई है. इसका असर उनकी पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरी तरह पड़ता है. आजकल मोबाइल, टीवी और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों पर असर डाल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की आंखों का टेस्ट किस उम्र से कराना चाहिए और यह क्यों जरूरी है. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं.

नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया नवजात शिशु की आंखों की पहली जांच जन्म के तुरंत बाद ही कर ली जाती है, ताकि किसी जन्मजात समस्या का पता लगाया जा सके. इसके बाद 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बच्चों की आंखों का एक बेसिक चेकअप करवाना चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर यह देखते हैं कि बच्चा चीजों को सही तरीके से देख और पहचान पा रहा है या नहीं. अगर इस चरण में कोई समस्या मिलती है, तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है. कई बच्चों में आंखों से जुड़ी जन्मजात समस्याएं भी होती हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 3 से 5 साल की उम्र को बच्चों की आंखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान उनकी विजन डेवलपमेंट तेजी से होती है. इसलिए इस उम्र में नियमित रूप से आई टेस्ट कराना जरूरी है. अगर इस समय नजर की कमजोरी, भेंगापन या अन्य समस्या पकड़ में आ जाए, तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है. 5 साल के बाद हर 1 से 2 साल में बच्चों की आंखों की जांच करानी चाहिए. अगर बच्चा बार-बार आंखें मलता है, टीवी के पास बैठता है, सिरदर्द की शिकायत करता है या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाता, तो ये संकेत हैं कि उसकी नजर कमजोर हो रही है और तुरंत जांच की जरूरत है.

एक्सपर्ट के मुताबिक समय पर आंखों की जांच न कराने से मायोपिया या एंब्लायोपिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इनका इलाज शुरुआती उम्र में आसान होता है, लेकिन देर होने पर यह स्थायी भी हो सकती हैं. बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना उनकी अच्छी दृष्टि और बेहतर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. नियमित आई चेकअप से न सिर्फ आंखों की समस्याओं को रोका जा सकता है, बल्कि बच्चे की पढ़ाई और विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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