Thursday, 23 Jul 2026 | 03:18 AM

Trending :

EXCLUSIVE

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्‌टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
माराडोना की मौत मामले में फिर जांच शुरू हो रही:मेडिकल टीम पर इलाज में लापरवाही के आरोप; पहला ट्रायल रद्द हुआ था

April 14, 2026/
6:36 pm

फुटबॉल दिग्गज डिएगो माराडोना की मौत के मामले की जांच दोबारा मंगलवार से शुरू हो रहा है। उनकी मेडिकल टीम...

दावा- पाकिस्तान में धुरंधर 2 नंबर-1 ट्रेंडिंग फिल्म बनी:पाकिस्तानी क्रिएटर बोले- नेटफ्लिक्स पर 24 घंटे में 20 करोड़ व्यू मिले, सर्वर क्रैश

May 16, 2026/
9:37 am

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 के पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद प्लेटफॉर्म का सर्वर क्रैश हो...

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत:सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी

June 8, 2026/
8:40 pm

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारती एयरटेल लिमिटेड और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पर केंद्र सरकार के लगाए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज...

तस्वीर का विवरण

April 21, 2026/
10:05 pm

वैध हवा में कमी: एसी के काफी देर बाद भी कमरा ठंडा नहीं हो रहा है, या फिर हवा का...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्‌टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.