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MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार है। हालांकि, प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका की बात करें तो यहां भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39% तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी में मध्यप्रदेश 31% के साथ सबसे आगे है। छोटा राज्य होने के बावजूद सिक्किम में भी यह आंकड़ा 33% तक है। वहीं हिंदी पट्टी में तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों (करीब 31%) के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे है। यह हिंदी पट्टी का इकलौता बड़ा राज्य है, जहां आंकड़ा 30% के पार है। ओडिशा (3%) और तेलंगाना (39%) के बीच करीब 10 गुना का अंतर है।
महिला कलेक्टरों में यूपी-झारखंड पीछे तेलंगाना 39% तमिलनाडु 38% केरल 36% आंध्र प्रदेश 35% सिक्किम 33% कर्नाटक 32% मध्यप्रदेश 31% मेघालय 27% मिजोरम 27% प.बंगाल 26% बिहार 18% उत्तर प्रदेश 16% हरियाणा 18% गुजरात 18% झारखंड 16% ओडिशा 8% ——————————— ये खबर भी पढ़ें… संजय कुमार का कॉलम:महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार है। हालांकि, प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका की बात करें तो यहां भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39% तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी में मध्यप्रदेश 31% के साथ सबसे आगे है। छोटा राज्य होने के बावजूद सिक्किम में भी यह आंकड़ा 33% तक है। वहीं हिंदी पट्टी में तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों (करीब 31%) के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे है। यह हिंदी पट्टी का इकलौता बड़ा राज्य है, जहां आंकड़ा 30% के पार है। ओडिशा (3%) और तेलंगाना (39%) के बीच करीब 10 गुना का अंतर है।
महिला कलेक्टरों में यूपी-झारखंड पीछे तेलंगाना 39% तमिलनाडु 38% केरल 36% आंध्र प्रदेश 35% सिक्किम 33% कर्नाटक 32% मध्यप्रदेश 31% मेघालय 27% मिजोरम 27% प.बंगाल 26% बिहार 18% उत्तर प्रदेश 16% हरियाणा 18% गुजरात 18% झारखंड 16% ओडिशा 8% ——————————— ये खबर भी पढ़ें… संजय कुमार का कॉलम:महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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