ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान में सहायक रजिस्ट्रार की नियुक्ति विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति को बार-बार जांच के दायरे में लाना उचित नहीं है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह बार-बार जांच करना कर्मचारी के अधिकारों के साथ अन्याय होगा। अदालत ने यह भी माना कि एक बार वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाए तो उसे अनावश्यक रूप से विवादित नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि चयन प्रक्रिया में कोई गंभीर खामी नहीं थी। लिखित परीक्षा केवल क्वालिफाइंग थी, जबकि अंतिम चयन इंटरव्यू के आधार पर किया गया, जो नियमों के अनुरूप था। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया को पहले ही बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से मंजूरी मिल चुकी थी, ऐसे में तकनीकी त्रुटियों के आधार पर इसे चुनौती देना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि न तो किसी असफल अभ्यर्थी ने चयन को चुनौती दी और न ही पक्षपात का कोई ठोस आरोप सामने आया। SBI छोड़कर जॉइन किया था पद मामला संदीप उपाध्याय की नियुक्ति से जुड़ा है, जिन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नौकरी छोड़कर साल 2019 में संस्थान में सहायक रजिस्ट्रार पद पर जॉइन किया था। नियुक्ति के बाद कुछ शिकायतों के आधार पर संस्थान ने कई जांच समितियां गठित कीं। इन समितियों ने चयन प्रक्रिया, पे प्रोटेक्शन और प्रोबेशन अवधि पर सवाल उठाए। यहां तक कि नियुक्ति रद्द करने की सिफारिश भी कर दी गई थी।

















































