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Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs

Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs
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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में बुधवार की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इससे पहले छठे दिन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर किसी धार्मिक प्रथा या रिवाज पर रोक लगाता है, तो उसकी जांच कोर्ट कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही ज्यूडिशियल रिव्यू को लेकर उसकी कुछ सीमाएं हैं, लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि कोर्ट के पास कोई अधिकार ही नहीं है।

आज फैसला आने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। फैसला आने की संभावना है, या फिर कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछले 5 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

सबरीमाला केस से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

लाइव अपडेट्स

3 मिनट पहले

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7वें दिन की सुनवाई शुरू, गोपाल सुब्रण्यम ने दलीलें रखीं

एडवोकेट सुब्रमण्यम: आर्टिकल 25 धार्मिक स्वतंत्रता का विस्तार है, क्योंकि यह धार्मिक स्वतंत्रता के कई पहलुओं से संबंधित है। इसकी अवधारणा क्या है?

यह किसी व्यक्ति की वह निजी यात्रा है, जिसके तहत वह किसी दर्शन को धार्मिक दर्शन के रूप में स्वीकार करता है। इसमें किसी फैसले में दिखाई देने वाले पहलुओं से कहीं अधिक घटक शामिल हैं। इसके चार पहलू हैं, जो सभी अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता में शामिल हैं-

1. धर्म की दार्शनिक सामग्री 2. उस दर्शन की सहायता से जुड़ी प्रथाएं 3. पूजा का अधिकार 4. आस्था का विस्तार

ये सभी आर्टिकल 25 के तहत ‘धर्म’ शब्द के तहत संरक्षित हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हो सकता है कि आप उस सिद्धांत की प्रथाओं को न अपनाएं, या हो सकता है कि आप वास्तव में बाहरी पूजा-पाठ में भी शामिल न हों। लेकिन यह एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

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आज फैसला आने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। फैसला आने की संभावना है, या फिर कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

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सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

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17 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

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यह किसी व्यक्ति की वह निजी यात्रा है, जिसके तहत वह किसी दर्शन को धार्मिक दर्शन के रूप में स्वीकार करता है। इसमें किसी फैसले में दिखाई देने वाले पहलुओं से कहीं अधिक घटक शामिल हैं। इसके चार पहलू हैं, जो सभी अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता में शामिल हैं-

1. धर्म की दार्शनिक सामग्री 2. उस दर्शन की सहायता से जुड़ी प्रथाएं 3. पूजा का अधिकार 4. आस्था का विस्तार

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