Monday, 08 Jun 2026 | 12:17 PM

Trending :

ममता को पहला संसदीय झटका: टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया | भारत समाचार 5 स्टार इलेक्ट्रोनिकी डेकोरेटरी में सीलिंग फैन क्यों नहीं होते? जानिए इसके पीछे का मॉडल वाला सच शादीशुदा जिंदगी पर बोले आर माधवन:मैं डरपोक मद्रासी मिडिल क्लास आदमी हूं, इसलिए पत्नी के प्रति हमेशा वफादार रहा शादीशुदा जिंदगी पर बोले आर माधवन:मैं डरपोक मद्रासी मिडिल क्लास आदमी हूं, इसलिए पत्नी के प्रति हमेशा वफादार रहा इंडिया ब्लॉक मीट लाइव अपडेट: 23 विपक्षी दल आज दिल्ली में आगे की राह पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। क्या DMK, TVK शामिल होंगे? ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश सीरीज से ट्रैविस हेड और मिचेल मार्श बाहर:हेड छुट्टियों पर, मार्श को टखने की चोट; ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी इंग्लिस करेंगे
EXCLUSIVE

Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions

Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions | Parenting Tips

1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 7 साल का है और मैं सिंगल मदर हूं। मैंने तलाक इसलिए लिया क्योंकि मैं एक अब्यूसिव शादी में थी। पांच साल से मैं अपने बेटे के साथ अलग रहती हूं। इन सालों में मेरे एक्स ने कभी अपने बेटे से मिलने या उससे बात करने की कोशिश नहीं की।

कुछ वक्त से नोटिस कर रही हूं कि बेटा चुप रहने लगा है, जबकि पहले वह बहुत बातें करता था। अब वह अक्सर अपने पिता के बारे में मुझसे सवाल करता है। मैं उसे हर खुशी देने की कोशिश करती हूं। लेकिन समझ नहीं आता कि उसके सवालों का जवाब कैसे दूं? क्या मुझे उससे खुलकर बात करनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपने कठिन परिस्थिति में अपने और बच्चे के लिए सुरक्षित जीवन चुना, यह साहस की बात है। किसी भी अब्यूसिव रिश्ते से बाहर निकलना आसान नहीं होता। इसलिए अपने फैसले के लिए खुद को दोषी न मानें। आपने बच्चे के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का निर्णय लिया, जो किसी भी पेरेंट की जिम्मेदारी है।

आपके बेटे का पिता के बारे में सवाल पूछना स्वाभाविक है। दरअसल 6-10 साल की उम्र में बच्चों में परिवार, रिश्तों और पहचान की समझ विकसित होती है। वे दोस्तों के परिवार देखकर तुलना करते हैं और सवाल पूछते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा दुखी है या परवरिश में कमी है। यह संकेत है कि वह अपने जीवन और रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है। आपके सवाल से लगता है कि आपकी चिंता तीन मुख्य बातों को लेकर है।

  1. पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित कर सकती है?
  2. बच्चे की भावनात्मक स्थिति को हेल्दी तरीके से कैसे संभाला जाए?
  3. सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

अब इन बातों को एक-एक करके समझते हैं।

पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

  • जरूरी नहीं है कि इसका असर हमेशा नकारात्मक ही हो।
  • बच्चे के लिए सबसे जरूरी सुरक्षित और शांत माहौल है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक था, जिसके सामने बच्चा डरकर चुप हो जाता था तो इसका बच्चे की मेंटल ग्रोथ पर बुरा ही असर पड़ता।
  • ऐसे माहौल में बच्चे डर के कारण अपने आप में सिमट जाते हैं।
  • इसलिए केवल ‘पिता का होना’ जरूरी नहीं, बल्कि पॉजिटिव रोल मॉडल होना जरूरी है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक या अपमानजनक है तो उससे दूरी बच्चे को नकारात्मक अनुभवों से बचा सकती है।
  • बच्चे को पिता का अभाव महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन इसे हेल्दी तरीके से संभाला जाए तो बच्चा इमोशनली मजबूत होगा।

हालांकि पिता की अनुपस्थिति से बच्चे के मन में कुछ भावनात्मक उलझनें पैदा हो सकती हैं। जैसेकि-

बच्चे की भावनात्मक स्थिति को कैसे संभालें?

  • इस स्थिति में ओपन बातचीत सबसे जरूरी है।
  • जब बच्चा अपने पिता के बारे में सवाल पूछे तो उससे बचने या विषय बदलने की बजाय उसकी जिज्ञासा को समझें।
  • बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकता है।
  • बातचीत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें
  • बच्चे को पूरी कहानी बताने की जरूरत नहीं होती। उसकी उम्र के हिसाब से सरल और संतुलित जवाब दें।
  • उदाहरण के लिए, बच्चे से कह सकते हैं, ‘’कभी-कभी बड़े लोगों के बीच सामंजस्य नहीं बनता। इसलिए वे अलग रहने का फैसला करते हैं। इससे बच्चे के प्रति दोनों का प्यार कम नहीं होता।’’

इस स्थिति को कैसे संभालें, ग्राफिक में देखिए-

जब बच्चा यह महसूस करता है कि उसकी मां उसकी बात समझती है और उसे जज नहीं करती, तो वह अपने मन की बातें शेयर करता है।

सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

  • सिंगल पेरेंटिंग अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखें-
  • बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका परिवार भले छोटा है, लेकिन वह सुरक्षित और प्यार से भरा हुआ है।
  • उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जैसे साथ में कहानी पढ़ना, पार्क जाना, खेलना या दिन भर की बातें शेयर करना।
  • दादा-दादी, मामा-मामी, चाचा-चाची या परिवार के करीबी सदस्यों के साथ बच्चे को समय बिताने का मौका दें।
  • इससे बच्चे को अलग-अलग रिश्तों का अनुभव मिलता है और इमोशनल सपोर्ट मिलता है।

हेल्दी पेरेंटिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

बच्चे से सिंगल पेरेंटिंग पर बात करना सही?

  • पेरेंट्स सोचते हैं कि इस विषय पर बातचीत से बच्चा दुखी हो सकता है।
  • साइकोलॉजी के मुताबिक, बच्चों की भावनाओं को दबाने या नजरअंदाज करने से वे खत्म नहीं होतीं, बल्कि अंदर जमा हो जाती हैं।
  • इसलिए बेहतर है कि बच्चे को खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का स्पेस दें।
  • जब बच्चा कहे कि ‘उसे पापा की कमी महसूस होती है’ तो उसकी भावनाओं को सुनें और समझें।
  • उसे ये फील कराएं कि उसकी भावनाएं स्वाभाविक हैं।

खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग रखें

  • बच्चे की भावनात्मक स्थिति काफी हद तक उसके पेरेंट की मानसिक स्थिति से प्रभावित होती है।
  • अगर आप बार-बार यह महसूस करती हैं कि “मैं अकेली हूं,’’ ‘’मुझे सब कुछ अकेले ही संभालना पड़ रहा है” तो यह भाव धीरे-धीरे बच्चे तक भी पहुंच सकता है।
  • बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे पेरेंट्स की भावनाओं को जल्दी महसूस करते हैं।
  • इसलिए जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से संतुलित, खुश और स्वस्थ रहें।
  • बच्चा मां के आत्मविश्वास को देखकर सीखता है कि वह सुरक्षित और मजबूत है।
  • आपकी पॉजिटिव एनर्जी ही बच्चे को यह भरोसा देगी कि परिस्थितियां भले अलग हों, लेकिन हम साथ मिलकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

पेरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए?

पेरेंट्स भावनात्मक तनाव में कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं, जो बच्चे के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन बातों से बचना जरूरी है-

  • बच्चे के सवालों को नजरअंदाज न करें।
  • हर बार विषय न बदलें।
  • पिता के बारे में नकारात्मक बातें न कहें।
  • अपनी झुंझलाहट बच्चे पर न निकालें।
  • बच्चे की जिज्ञासा को झूठ से शांत करने की कोशिश न करें।
  • बच्चे को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें।

अंत में यही कहूंगी कि एक सिंगल मॉम के रूप में आपने पिछले कई सालों से अपने बेटे की परवरिश अकेले की है। यह अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी और साहस की बात है। याद रखें, बच्चों को ‘परफेक्ट फैमिली’ से ज्यादा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है, जो आप दे रही हैं। ये अपने आप में पर्याप्त है।

……………………

पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे

10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Pakistan vs Australia Live Cricket Score, 2nd ODI: Stay updated with PAK vs AUS Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Gaddafi Stadium in Lahore. (Picture Credit: X/@cricketcomau)

June 2, 2026/
8:37 pm

आखरी अपडेट:02 जून, 2026, 20:37 IST चुनाव में हार के बाद से, पार्टी आंतरिक तनाव के संकेतों और अपने नेतृत्व...

आगर के मोड़ी में ग्राम चौपाल लगी:अफसरों ने बिजली-जमीन का मुआवजा नहीं मिलने की समस्याएं सुनी; हेलमेट बांटे

April 28, 2026/
9:38 pm

आगर मालवा जिले के ग्राम मोड़ी में मंगलवार रात ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें जिला प्रशासन की टीम...

रंगपंचमी की सुबह स्कॉर्पियो ने मारी थी टक्कर:100 से ज्यादा कैमरे देखने के बाद पकड़ाया आरोपी ड्राइवर

March 11, 2026/
12:33 am

छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में रंगपंचमी की सुबह तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर से एक युवक की मौत हो गई, जबकि...

नेपाली पीएम के 100 में से 88 वादे अधूरे:शपथ के 30 दिन में 2 मंत्रियों ने सरकार छोड़ी, जेन-जी बोले- क्या काबिल लोग नहीं

May 29, 2026/
10:40 am

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता संभाले अभी सिर्फ दो महीने हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार पर सवाल उठने...

क्लीनमैक्स एनवायरो एनर्जी का IPO 23 फरवरी से ओपन होगा:25 फरवरी तक बोली लगा सकेंगे, मिनिमम ₹14,742 निवेश करने होंगे

February 18, 2026/
2:13 pm

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस अपना इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) 23 फरवरी को खुलेगा। निवेशक 25 फरवरी...

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर पर हेल्थकेयर फ्रॉड का आरोप, 130 करोड़ रुपए में समझौता

April 7, 2026/
11:31 am

अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर जितेंद्र पटेल और उनकी अटलांटा स्थित क्लिनिक ने हेल्थकेयर फ्रॉड के आरोपों को लेकर...

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

April 11, 2026/
3:47 am

चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट...

राजनीति

Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions

Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions | Parenting Tips

1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 7 साल का है और मैं सिंगल मदर हूं। मैंने तलाक इसलिए लिया क्योंकि मैं एक अब्यूसिव शादी में थी। पांच साल से मैं अपने बेटे के साथ अलग रहती हूं। इन सालों में मेरे एक्स ने कभी अपने बेटे से मिलने या उससे बात करने की कोशिश नहीं की।

कुछ वक्त से नोटिस कर रही हूं कि बेटा चुप रहने लगा है, जबकि पहले वह बहुत बातें करता था। अब वह अक्सर अपने पिता के बारे में मुझसे सवाल करता है। मैं उसे हर खुशी देने की कोशिश करती हूं। लेकिन समझ नहीं आता कि उसके सवालों का जवाब कैसे दूं? क्या मुझे उससे खुलकर बात करनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपने कठिन परिस्थिति में अपने और बच्चे के लिए सुरक्षित जीवन चुना, यह साहस की बात है। किसी भी अब्यूसिव रिश्ते से बाहर निकलना आसान नहीं होता। इसलिए अपने फैसले के लिए खुद को दोषी न मानें। आपने बच्चे के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का निर्णय लिया, जो किसी भी पेरेंट की जिम्मेदारी है।

आपके बेटे का पिता के बारे में सवाल पूछना स्वाभाविक है। दरअसल 6-10 साल की उम्र में बच्चों में परिवार, रिश्तों और पहचान की समझ विकसित होती है। वे दोस्तों के परिवार देखकर तुलना करते हैं और सवाल पूछते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा दुखी है या परवरिश में कमी है। यह संकेत है कि वह अपने जीवन और रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है। आपके सवाल से लगता है कि आपकी चिंता तीन मुख्य बातों को लेकर है।

  1. पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित कर सकती है?
  2. बच्चे की भावनात्मक स्थिति को हेल्दी तरीके से कैसे संभाला जाए?
  3. सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

अब इन बातों को एक-एक करके समझते हैं।

पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

  • जरूरी नहीं है कि इसका असर हमेशा नकारात्मक ही हो।
  • बच्चे के लिए सबसे जरूरी सुरक्षित और शांत माहौल है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक था, जिसके सामने बच्चा डरकर चुप हो जाता था तो इसका बच्चे की मेंटल ग्रोथ पर बुरा ही असर पड़ता।
  • ऐसे माहौल में बच्चे डर के कारण अपने आप में सिमट जाते हैं।
  • इसलिए केवल ‘पिता का होना’ जरूरी नहीं, बल्कि पॉजिटिव रोल मॉडल होना जरूरी है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक या अपमानजनक है तो उससे दूरी बच्चे को नकारात्मक अनुभवों से बचा सकती है।
  • बच्चे को पिता का अभाव महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन इसे हेल्दी तरीके से संभाला जाए तो बच्चा इमोशनली मजबूत होगा।

हालांकि पिता की अनुपस्थिति से बच्चे के मन में कुछ भावनात्मक उलझनें पैदा हो सकती हैं। जैसेकि-

बच्चे की भावनात्मक स्थिति को कैसे संभालें?

  • इस स्थिति में ओपन बातचीत सबसे जरूरी है।
  • जब बच्चा अपने पिता के बारे में सवाल पूछे तो उससे बचने या विषय बदलने की बजाय उसकी जिज्ञासा को समझें।
  • बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकता है।
  • बातचीत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें
  • बच्चे को पूरी कहानी बताने की जरूरत नहीं होती। उसकी उम्र के हिसाब से सरल और संतुलित जवाब दें।
  • उदाहरण के लिए, बच्चे से कह सकते हैं, ‘’कभी-कभी बड़े लोगों के बीच सामंजस्य नहीं बनता। इसलिए वे अलग रहने का फैसला करते हैं। इससे बच्चे के प्रति दोनों का प्यार कम नहीं होता।’’

इस स्थिति को कैसे संभालें, ग्राफिक में देखिए-

जब बच्चा यह महसूस करता है कि उसकी मां उसकी बात समझती है और उसे जज नहीं करती, तो वह अपने मन की बातें शेयर करता है।

सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

  • सिंगल पेरेंटिंग अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखें-
  • बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका परिवार भले छोटा है, लेकिन वह सुरक्षित और प्यार से भरा हुआ है।
  • उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जैसे साथ में कहानी पढ़ना, पार्क जाना, खेलना या दिन भर की बातें शेयर करना।
  • दादा-दादी, मामा-मामी, चाचा-चाची या परिवार के करीबी सदस्यों के साथ बच्चे को समय बिताने का मौका दें।
  • इससे बच्चे को अलग-अलग रिश्तों का अनुभव मिलता है और इमोशनल सपोर्ट मिलता है।

हेल्दी पेरेंटिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

बच्चे से सिंगल पेरेंटिंग पर बात करना सही?

  • पेरेंट्स सोचते हैं कि इस विषय पर बातचीत से बच्चा दुखी हो सकता है।
  • साइकोलॉजी के मुताबिक, बच्चों की भावनाओं को दबाने या नजरअंदाज करने से वे खत्म नहीं होतीं, बल्कि अंदर जमा हो जाती हैं।
  • इसलिए बेहतर है कि बच्चे को खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का स्पेस दें।
  • जब बच्चा कहे कि ‘उसे पापा की कमी महसूस होती है’ तो उसकी भावनाओं को सुनें और समझें।
  • उसे ये फील कराएं कि उसकी भावनाएं स्वाभाविक हैं।

खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग रखें

  • बच्चे की भावनात्मक स्थिति काफी हद तक उसके पेरेंट की मानसिक स्थिति से प्रभावित होती है।
  • अगर आप बार-बार यह महसूस करती हैं कि “मैं अकेली हूं,’’ ‘’मुझे सब कुछ अकेले ही संभालना पड़ रहा है” तो यह भाव धीरे-धीरे बच्चे तक भी पहुंच सकता है।
  • बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे पेरेंट्स की भावनाओं को जल्दी महसूस करते हैं।
  • इसलिए जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से संतुलित, खुश और स्वस्थ रहें।
  • बच्चा मां के आत्मविश्वास को देखकर सीखता है कि वह सुरक्षित और मजबूत है।
  • आपकी पॉजिटिव एनर्जी ही बच्चे को यह भरोसा देगी कि परिस्थितियां भले अलग हों, लेकिन हम साथ मिलकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

पेरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए?

पेरेंट्स भावनात्मक तनाव में कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं, जो बच्चे के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन बातों से बचना जरूरी है-

  • बच्चे के सवालों को नजरअंदाज न करें।
  • हर बार विषय न बदलें।
  • पिता के बारे में नकारात्मक बातें न कहें।
  • अपनी झुंझलाहट बच्चे पर न निकालें।
  • बच्चे की जिज्ञासा को झूठ से शांत करने की कोशिश न करें।
  • बच्चे को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें।

अंत में यही कहूंगी कि एक सिंगल मॉम के रूप में आपने पिछले कई सालों से अपने बेटे की परवरिश अकेले की है। यह अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी और साहस की बात है। याद रखें, बच्चों को ‘परफेक्ट फैमिली’ से ज्यादा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है, जो आप दे रही हैं। ये अपने आप में पर्याप्त है।

……………………

पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे

10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.