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इटली बन रहा दुनिया के रईसों का नया पसंदीदा ठिकाना:दुबई जैसे टैक्स-फ्री ठिकानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, लोग विकल्प तलाश रहे

इटली बन रहा दुनिया के रईसों का नया पसंदीदा ठिकाना:दुबई जैसे टैक्स-फ्री ठिकानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, लोग विकल्प तलाश रहे

दुनियाभर के हाई नेटवर्थ वाले अमीर लोग फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों को छोड़कर इटली में बस रहे हैं। वजह है फ्लैट टैक्स और आसान नियम। विदेशी आय पर तय सालाना टैक्स लगता है, चाहे कमाई कितनी भी हो। इसकी अधिकतम सीमा 3 लाख यूरो (करीब 3 करोड़ रु.) है, जो पहले 1 लाख और फिर 2 लाख यूरो थी। इटली में प्रॉपर्टी और इनहेरिटेंस टैक्स में भी राहत के साथ अन्य कटौतियों का भी लाभ मिलता है। मिडिल ईस्ट के तनाव ने ट्रेंड तेज किया है। दुबई जैसे टैक्स-फ्री विकल्प पर अनिश्चितता बढ़ी है। बड़े पैमाने पर माइग्रेशन अभी नहीं हुआ है। लोग विकल्प तलाश रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक टैक्स स्थिरता और यूरोप में लोकेशन इटली को बढ़त दे रही है। इटली भौगोलिक रूप से यूरोप के बीचों-बीच स्थित है। यहां रहने वाले अरबपतियों के लिए पेरिस, लंदन, बर्लिन या ज्यूरिख जैसे प्रमुख बिजनेस सेंटर्स तक पहुंचना बहुत आसान है। यह दुबई या अन्य टैक्स हेवन देशों की तुलना में यात्रा के समय और कनेक्टिविटी के लिहाज से ज्यादा सुविधाजनक है। इटली में पहली प्रॉपर्टी खरीदने पर स्टाम्प ड्यूटी या वसीयत चार्ज नहीं लगता है। इसके विपरीत फ्रांस में घर लेते समय सरकारी खजाने में भारी शुल्क जमा करना पड़ता है। वहां राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वेल्थ टैक्स को रियल एस्टेट टैक्स में बदलकर अमीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इटली में पहले घर पर प्रॉपर्टी टैक्स से पूरी राहत दी गई है। हालांकि कचरा प्रबंधन के लिए मोटी फीस चुकानी होती है। निवेश के नजरिए से सबसे बड़ा आकर्षण इनहेरिटेंस टैक्स का अंतर है। इटली में 10 लाख यूरो तक की पैतृक संपत्ति हस्तांतरण पर शुल्क शून्य है। इस सीमा के पार भी मात्र 4% की मामूली दर लागू होती है। वहीं, फ्रांसीसी नियमों में टैक्स-फ्री छूट का दायरा महज 1 लाख यूरो तक सीमित है। इसके बाद टैक्स की दरें बढ़ते हुए 45% तक पहुंच जाती हैं। पेरिस के कर वकील जेरोम बर्रे के अनुसार हर हफ्ते कारोबारी फ्रांस छोड़ने की सलाह ले रहे हैं। लोग मौजूदा वित्तीय माहौल से नाखुश हैं। उन्हें भविष्य में नियम सख्त होने का डर है। 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद हालात और कठिन हो सकते हैं। मिडिल ईस्ट तनाव का असर, यूएई से ध्यान इटली पर शिफ्ट हो रहा हेनली एंड पार्टनर्स के पीटर फेरिग्नो के अनुसार पिछले साल दुबई करोड़पतियों की पहली पसंद था, क्योंकि वहां टैक्स नहीं लगता। मध्य-पूर्व तनाव के कारण 2026 में यह संख्या घट सकती है। बिना टैक्स वाले देश से कर देने वाले देश में जाना आसान नहीं होता। जीरो-टैक्स जीवनशैली के आदी लोगों को प्रशासनिक औपचारिकताएं भारी लगती हैं।

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