Friday, 12 Jun 2026 | 11:18 AM

Trending :

EXCLUSIVE

आंतों की सेहत है खराब तो बुढ़ापे में मांसपेशियां की बीमारी सारकोपेनिया का बढ़ता है रिस्क, 30-40% लोग होते हैं प्रभावित-स्टडी

authorimg

अक्सर बुजुर्गावस्था में कुछ लोगों को चलने-फिरने में समस्या आने लगती है. धीरे-धीरे शारीरिक ताकत खो देते हैं. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा बुजुर्गों में क्यों होता है? दरअसल, हाल ही में एम्स में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों की कमजोरी का संबंध आंतों (गट) की सेहत हो सकती है. बढ़ती उम्र में काफी लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी देखी जाती है, इसका सीधा संबंध आंतों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों से हो सकता है. ये अध्ययन जेरियाट्रिक्स एंड जेरॉनटोलॉजी इंटरनेशनल (Geriatrics & Gerontology International) में प्रकाशित की गई है.

इस अध्ययन का नेतृत्व सुदीप मैथ्यू जॉर्ज और प्रसून चटर्जी ने किया है. इस स्टडी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30 लोगों को शामिल किया गया. जिन लोगों को सारकोपेनिया या sarcopenia (मांसपेशियों का धीरे-धीरे कम होना) था, उनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या और विविधता कम पाई गई. यह एक खराब सेहत का संकेत है.

सारकोपेनिया कितना कॉमन है?

डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार, सारकोपेनिया एक बेहद ही कॉमन प्रॉब्लम है. लगभग 30 से 40% बुजुर्ग इससे प्रभावित होते हैं. इससे गिरने, हड्डी टूटने और दूसरों पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है. फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन हमारी स्टडी ‘गट-मसल एक्सिस’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आ रहा है.

अच्छे बैक्टीरिया की कमी
अध्ययन में ये भी पाया गया कि सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों में बिफिडोबैक्टीरियम और लैक्टोबैसिलस जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया कम थे. ये बैक्टीरिया मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैक्टीरिया समूहों में भी बदलाव देखे गए, जो इन्फ्लेमेशन से जुड़े होते हैं. यह सूजन उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या मांसपेशियों की कमजोरी रोकी जा सकती है?

अध्ययन के अनुसार, आंतों का स्वास्थ्य सुधारकर मांसपेशियों के कमजोर होने को कुछ हद तक रोका या धीमा किया जा सकता है. डॉ. चटर्जी का कहना है कि आंतों के बैक्टीरिया में ये बदलाव सूजन, मेटाबॉलिज्म और पोषण के जरिए मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना पूरी तरह से अपरिहार्य नहीं है, बल्कि कुछ हद तक इसे बदला जा सकता है.

यह अध्ययन ‘गट-मसल एक्सिस’ की उभरती अवधारणा का समर्थन करता है, जिसके अनुसार आंतों के माइक्रोब्स में गड़बड़ी, इम्यून, मेटाबॉलिक और पोषण संबंधी रास्तों के जरिए मांसपेशियों की ताकत को प्रभावित कर सकती है. अध्ययन में ये बात भी सामने आई कि इन प्रतिभागियों में से कोई भी हेल्दी नहीं थे. उनके खानपान के पैटर्न भी अलग-अलग थे. इससे ये साफ संकेत मिलता है कि आप जो भी डाइट लेते हैं, उसका आंतों की सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सही डाइट आंतों और मांसपेशियों दोनों के लिए जरूरी है. क्लिनिकल रूप से, सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम था. उनकी पकड़ (ग्रिप स्ट्रेंथ) कमजोर थी. उनकी चलने-फिरने की गति भी धीमी थी.

अध्ययन का निष्कर्ष
इस स्टडी से ये पता चलता है कि आंतों के बैक्टीरिया, पोषण और सूजन मिलकर मांसपेशियों की सेहत को प्रभावित करते हैं, इसलिए बढ़ती उम्र में फिट रहने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि गट हेल्थ का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया:50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा

April 18, 2026/
3:25 pm

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी...

राजगढ़ में स्विमिंग पूल उद्घाटन पर शुल्क विवाद:कांग्रेस ने कहा- पहले मुफ्त था, अब 200 रुपए रोज; विभाग बोला- ₹50 प्रति घंटा ही वास्तविक चार्ज

April 12, 2026/
9:46 pm

राजगढ़ में प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग गौतम टेटवाल ने रविवार को जिला मुख्यालय...

युद्ध के 3-महीनों में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया:जानें- इसका आपके डेली खर्चों, निवेश, ट्रेवल और EMI पर क्या असर पड़ता है?

May 25, 2026/
7:26 pm

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते भारतीय रुपए पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया...

ट्रेन से टुकड़ों में कटा किसान…मौत से पहले का VIDEO:बोला- पूर्व विधायक मुझसे हत्या कराना चाहते थे; शिवराज मामा को गोली मारने रिवॉल्वर दी

April 28, 2026/
12:34 am

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सोमवार शाम 4 बजे किसान ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। रेलवे...

राशन वितरण को लेकर पूर्व सरपंच-कोटेदार के बेटे में मारपीट:शहडोल में कम राशन देने और हाथ से लिखी पर्ची बांटने का आरोप

March 17, 2026/
1:46 pm

शहडोल के ग्राम हिरवार में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण को लेकर विवाद के बाद पूर्व सरपंच और...

कर्नाटक में कांग्रेस को हराने के लिए मतदाताओं से अपील करते हुए कहा- मरते दम तक याद रखूंगा

April 1, 2026/
10:24 am

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को दावणगेरे दक्षिण...

Nawazuddin Siddiqui Clarifies Fake Films Statement

April 27, 2026/
3:07 pm

47 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने धुरंधर 2 की रिलीज के समय दिए गए अपने नकली और...

Arsenal's Piero Hincapie vies for the ball with PSG's Ousmane Dembele, right, during the Champions League final soccer match between Paris Saint-Germain and Arsenal in Budapest, Hungary, Saturday, May 30, 2026. (AP Photo/Petr Josek)

May 31, 2026/
1:16 am

आखरी अपडेट:31 मई, 2026, 01:16 IST अस्पताल प्रांगण से सीधे मीडिया से बात करते हुए, हिली हुई दिख रही ममता...

राजनीति

आंतों की सेहत है खराब तो बुढ़ापे में मांसपेशियां की बीमारी सारकोपेनिया का बढ़ता है रिस्क, 30-40% लोग होते हैं प्रभावित-स्टडी

authorimg

अक्सर बुजुर्गावस्था में कुछ लोगों को चलने-फिरने में समस्या आने लगती है. धीरे-धीरे शारीरिक ताकत खो देते हैं. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा बुजुर्गों में क्यों होता है? दरअसल, हाल ही में एम्स में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों की कमजोरी का संबंध आंतों (गट) की सेहत हो सकती है. बढ़ती उम्र में काफी लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी देखी जाती है, इसका सीधा संबंध आंतों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों से हो सकता है. ये अध्ययन जेरियाट्रिक्स एंड जेरॉनटोलॉजी इंटरनेशनल (Geriatrics & Gerontology International) में प्रकाशित की गई है.

इस अध्ययन का नेतृत्व सुदीप मैथ्यू जॉर्ज और प्रसून चटर्जी ने किया है. इस स्टडी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30 लोगों को शामिल किया गया. जिन लोगों को सारकोपेनिया या sarcopenia (मांसपेशियों का धीरे-धीरे कम होना) था, उनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या और विविधता कम पाई गई. यह एक खराब सेहत का संकेत है.

सारकोपेनिया कितना कॉमन है?

डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार, सारकोपेनिया एक बेहद ही कॉमन प्रॉब्लम है. लगभग 30 से 40% बुजुर्ग इससे प्रभावित होते हैं. इससे गिरने, हड्डी टूटने और दूसरों पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है. फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन हमारी स्टडी ‘गट-मसल एक्सिस’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आ रहा है.

अच्छे बैक्टीरिया की कमी
अध्ययन में ये भी पाया गया कि सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों में बिफिडोबैक्टीरियम और लैक्टोबैसिलस जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया कम थे. ये बैक्टीरिया मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैक्टीरिया समूहों में भी बदलाव देखे गए, जो इन्फ्लेमेशन से जुड़े होते हैं. यह सूजन उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या मांसपेशियों की कमजोरी रोकी जा सकती है?

अध्ययन के अनुसार, आंतों का स्वास्थ्य सुधारकर मांसपेशियों के कमजोर होने को कुछ हद तक रोका या धीमा किया जा सकता है. डॉ. चटर्जी का कहना है कि आंतों के बैक्टीरिया में ये बदलाव सूजन, मेटाबॉलिज्म और पोषण के जरिए मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना पूरी तरह से अपरिहार्य नहीं है, बल्कि कुछ हद तक इसे बदला जा सकता है.

यह अध्ययन ‘गट-मसल एक्सिस’ की उभरती अवधारणा का समर्थन करता है, जिसके अनुसार आंतों के माइक्रोब्स में गड़बड़ी, इम्यून, मेटाबॉलिक और पोषण संबंधी रास्तों के जरिए मांसपेशियों की ताकत को प्रभावित कर सकती है. अध्ययन में ये बात भी सामने आई कि इन प्रतिभागियों में से कोई भी हेल्दी नहीं थे. उनके खानपान के पैटर्न भी अलग-अलग थे. इससे ये साफ संकेत मिलता है कि आप जो भी डाइट लेते हैं, उसका आंतों की सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सही डाइट आंतों और मांसपेशियों दोनों के लिए जरूरी है. क्लिनिकल रूप से, सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम था. उनकी पकड़ (ग्रिप स्ट्रेंथ) कमजोर थी. उनकी चलने-फिरने की गति भी धीमी थी.

अध्ययन का निष्कर्ष
इस स्टडी से ये पता चलता है कि आंतों के बैक्टीरिया, पोषण और सूजन मिलकर मांसपेशियों की सेहत को प्रभावित करते हैं, इसलिए बढ़ती उम्र में फिट रहने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि गट हेल्थ का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.