सतना के वन स्टॉप सेंटर से रविवार रात तीन नाबालिग लड़कियां फरार हो गईं। लड़कियां खिड़की की ग्रिल निकालकर और तार की साढ़े पांच फीट ऊंची बाड़ी फांदकर भागी हैं। इस घटना ने सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था और लोक निर्माण विभाग (PIU) द्वारा किए गए भवन निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि 9 महीने पहले ही इस सेंटर का सिक्योरिटी ऑडिट किया गया था। नाबालिग लड़कियों ने भागने के लिए सेंटर की सुरक्षा खामियों का सीधा फायदा उठाया। वन स्टॉप सेंटर और जिला कल्याण समिति (CWC) के बीच कंक्रीट की दीवार के बजाय सिर्फ साढ़े पांच फीट ऊंची तार की बाड़ी लगी हुई है। इसी बाड़ी के पास एक पुराना पेड़ गिरा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि लड़कियों ने इसी गिरे हुए पेड़ का इस्तेमाल कर बाड़ी को पार किया और भागने में सफल रहीं। 9 महीने पहले ही हुआ था सिक्योरिटी ऑडिट
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने जुलाई में सतना का कार्यभार संभालने के बाद सेंटर का सिक्योरिटी ऑडिट कराया था। सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने वन स्टॉप सेंटर की चहारदीवारी के ऊपर कंटीले तारों की फेंसिंग भी करवाई थी, लेकिन सुरक्षा के ये सभी उपाय नाकाफी साबित हुए। भवन निर्माण की गुणवत्ता की खुली पोल
वन स्टॉप सेंटर का निर्माण लोक निर्माण विभाग की प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) ने कराया था। चार साल पहले यह भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा गया था। लड़कियों ने भागने के लिए जिस खिड़की की ग्रिल को दीवार से अलग किया, उसका हुक दीवार में ठीक से फिक्स ही नहीं किया गया था। इस खुलासे ने भवन निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन साल पहले भी भागी थी एक लड़की
सेंटर से लड़कियों के भागने का यह पहला मामला नहीं है। करीब तीन साल पहले भी यहां से एक लड़की फरार हुई थी। उस घटना के बाद सुरक्षा के लिहाज से खिड़कियों में जाली लगवाई गई थी, लेकिन 27 अप्रैल की घटना में यह उपाय भी काम नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक, मैहर की ‘पिपरा सेवा दल बिरादरी संस्थान’ वन स्टॉप सेंटर को मानव संसाधन (स्टाफ) उपलब्ध कराने का काम करती है।
















































