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अब एंट्री लेवल जॉब्स सफलता की गारंटी नहीं:नौकरी के भरोसे नहीं सीधे बिजनेस से करिअर लॉन्च कर रहे युवा

अब एंट्री लेवल जॉब्स सफलता की गारंटी नहीं:नौकरी के भरोसे नहीं सीधे बिजनेस से करिअर लॉन्च कर रहे युवा

अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी से 2024 में ग्रेजुएट हुई एशले टेरेल ने सोचा था कि मार्केटिंग में अच्छी नौकरी मिलेगी। डिग्री, इंटर्नशिप और अनुभव के बावजूद महीनों कोशिश के बाद उन्हें सिर्फ एक ऑफर स्टोर में काम करने का मिला। वह हर दिन नौकरी ढूंढती रहीं, यहां तक कि व्यस्त समय में भी आवेदन करती थीं। लेकिन उन्हें पसंदीदा नौकरी नहीं मिली। यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंट्री-लेवल नौकरियां तेजी से घट रही हैं। ऐसे में युवा विकल्प के तौर पर अब एआई टूल्स का उपयोग करके कंटेंट क्रिएशन, ऐप डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी के जरिए अपना रास्ता खुद बना रहे हैं। अमेजन में काम करने वाली 25 वर्षीय मैडिसन, खाली समय में एआई की मदद से सोशल मीडिया एप बना रही हैं। उन्होंने बताया कि बिना एआई यह काम महीनों और बड़ी टीम के बिना संभव नहीं था, लेकिन अब एक महीने में प्रोटोटाइप तैयार हो गया। इसी तरह सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़े सुहित अग्रवाल को बड़ी कंपनियों से जवाब नहीं मिला, तो स्टार्टअप्स में काम शुरू किया और एआई टूल्स की मदद से बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। अब इनके लिए तकनीक सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि खुद कुछ नया करने का साधन भी बन रही है। 22 वर्षीय सेलेस्टे अमाडॉन ने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जेपी मॉर्गन की इंटर्नशिप छोड़ खुद का डेटिंग एप ‘नोन’ शुरू किया। शुरू में परिवार ने विरोध किया, लेकिन बाद में जब उन्हें निवेश मिला, तो वही समर्थक बन गया। एलिजाह खासाबो, जो पहले कपड़े फोल्ड करते थे, आज अपनी टीम संभाल रहे हैं। हालांकि इसमें स्थिर आमदनी बड़ी चुनौती है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर जोसेफ फुलर के मुताबिक खुद का काम शुरू करना आसान नहीं है। ज्यादातर स्टार्टअप स्थिर आमदनी के अभाव में फेल होते हैं, फिर भी युवा इसमें करियर पर नियंत्रण देख रहे हैं। फुलर कहते हैं, एआई ने पारंपरिक नौकरियां घटाने के साथ नए काम के औजार भी दिए हैं। युवाओं के लिए बड़ा बदलाव यह है कि जॉब सुरक्षा कम हुई है, अपने दम पर कुछ बनाने का भरोसा भी बढ़ा है। नई पीढ़ी के लिए जॉब्स का पहला पड़ाव ही मुश्किल- एक्सपर्ट फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 22-27 साल के युवाओं में बेरोजगारी कोविड के बाद ऊंचे स्तर पर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे एंट्री-लेवल जॉब्स प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि इनमें दोहराव वाले काम अब एआई कर रहा है। अर्थशास्त्री डैनियल झाओ कहते हैं ‘पहली सीढ़ी पर पैर रखना ही मुश्किल हो गया है।’ कई युवाओं को डिग्री के बाद भी रिटेल व पार्ट-टाइम काम करना पड़ रहा है।

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