Monday, 10 Aug 2026 | 04:18 AM

Trending :

EXCLUSIVE

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
authorimg

April 24, 2026/
6:57 pm

हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट में ब्लॉकेज जैसे तमाम हेल्थ कंडीशन से आपने लोगों को सामना करते देखा होगा, लेकिन...

Karan Aujla Delhi Show Controversy

February 27, 2026/
8:41 am

करन औजला के दिल्ली शो से पहले विवाद बढ़ा। नोटिस जारी हुआ। (फाइल फोटो) पंजाबी सिंगर करन औजला दिल्ली में...

RR Vs MI, IPL 2026 Live Score: Follow latest match updates. (PTI Photo)

April 7, 2026/
5:05 pm

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 17:05 IST 2019 और 2024 के बीच, मार्टिन की कंपनी, फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने...

बच्ची से रेप-हत्या करने वाले को फांसी की सजा:प्रयागराज में जज बोले- ये झकझोरने वाला अपराध, दोषी सजा-ए-मौत के काबिल

March 30, 2026/
11:58 pm

प्रयागराज में 8 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या करने वाले को सोमवार को फांसी की सजा सुनाई...

रंगपंचमी पर महाकाल को एक लोटा केसर जल अर्पित होगा:भस्म आरती में अर्पित होगा रंग, चेकिंग के बाद ही भक्तों को प्रवेश मिलेगा

March 7, 2026/
11:06 am

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी पर भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को इस बार सिर्फ एक लोटा केसर...

आज CSK-SRH की भिड़ंत, प्लेऑफ का टिकट लेने उतरेगी ईशान:शाम 7:30 बजे खेला जाएगा मुकाबला, चेन्नई के लिए प्लेऑफ की उम्मीद बरकरार

May 18, 2026/
12:32 pm

आज IPL में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच चेन्नई के एमए चिदंबरम (चेपॉक) स्टेडियम में...

मंडला में 8 एकड़ गेहूं की फसल जली:शॉर्ट सर्किट से तिन्दुआ बम्हनी में हादसा; प्रशासनिक अमले ने शुरू किया सर्वे

April 8, 2026/
8:26 pm

मंडला जिले की नैनपुर तहसील के ग्राम तिन्दुआ बम्हनी में शॉर्ट सर्किट से लगी आग से 8 एकड़ में खड़ी...

घेवर रेसिपी

July 18, 2026/
10:47 pm

18 जुलाई 2026 को 22:47 IST पर अपडेट किया गया घेवर रेसिपी: घेवर राजस्थान की सबसे मशहूर मिठाइयों में से...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

SC- प्राइवेट स्कूल EWS-कोटे में एडमिशन नहीं रोक सकते:स्टूडेंट को एडमिशन देने से इनकार करने की अपील को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने एक फैसले में कहा कि प्राइवेट (नॉन एडेड) स्कूल कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को EWS कोटे में एडमिशन देने से मना नहीं कर सकते। उन्हें एडमिशन से रोकना राइट टू एजुकेशन (RTE) का उल्लंघन है। ये बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार आर्टिकल 21A का सीधा उल्लंघन होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने छात्रा को एडमिशन देने से इनकार की अपील को खारिज करते ये फैसला सुनाया। लखनऊ पब्लिक स्कूल ने एडमिशन देने से मना किया था लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज किया था, जिसमें इलाहाबाद कोर्ट ने स्कूल को EWS कोटे में बच्ची को एडमिशन देने का आदेश दिया था। दरअसल, लखनऊ पब्लिक स्कूल ने स्टेट की फाइनल लिस्ट में नाम होने के बावजूद एक छात्रा की एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई गई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडमिशन देने के आदेश को बरकरार रखा और स्कूल को एडमिशन देने को कहा था। इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में हुई थी सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने के फैसले के खिलाफ स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते SC ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि ‘राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन एक्ट 2009’ (RTE) सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय मिशन’ है। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना कंपल्सरी है। कोर्ट के मुताबिक, ये सिर्फ नियम नहीं, बल्कि बच्चों में समानता (इक्वॉलिटी), गरिमा (डिग्निटी) और समावेशिता (इंक्लुजन) को बढ़ावा देने के लिए है। इसके लिए ही RTE में ‘नेबरहुड स्कूल’ का कॉन्सेप्ट यानी आसपास के बच्चों को साथ पढ़ाना लाया गया है। इससे सामाजिक दूरी और भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि एडमिशन में देरी या इनकार बच्चे की पढ़ाई को रोकता है। उसके मौलिक अधिकार को कमजोर करता है। इसलिए स्कूल पहले एडमिशन दें, फिर आपत्ति उठाएं। न कि इसका उल्टा करें। 25% सीटें EWS/DG/CWSN के लिए रिजर्व 2009 में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कंप्लसरी एजुकेशन (RTE) एक्ट पास हुआ। इसके सेक्शन 12(1)(c) में प्राइवेट नॉन-एडेड स्कूलों में कम से कम 25% सीटें माइनॉरिटी और रिजर्व्ड कैटेगरीज के लिए रिजर्व रखी गई। प्राइवेट और नॉन-एडेड स्कूलों में नए दाखिले यानी एंट्री लेवल क्लास जैसे क्लास 1, या प्री-प्राइमरी की कम से कम 25% सीटें रिजर्व्ड कैटेगरी के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। ये 25% सीटें आमतौर पर तीन तरह के बच्चों के बीच बांटी जाती हैं। EWS (इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन) में जिनकी इनकम और आर्थिक स्थिति के आधार पर केंद्र/राज्य सरकारें आर्थिक रूप से कमजोर घोषित करती हैं, वे बच्चे शामिल होते हैं। DG (डिस्एडवांटेज्ड ग्रुप्स) में आमतौर पर उन वर्गों के बच्चे शामिल होते हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, जैसे कि SC/ST/OBC‌ (NCL – नॉन क्रिमी लेयर)। CWSN (चिल्ड्रेन विद स्पेशन नीड्स) में दिव्यांग या स्पेशल नीड्स वाले बच्चे शामिल हैं। EWS और DG, दोनों को मिलाकर 22% सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा CWSN के लिए 3% सीटें रिजर्व्ड हैं। इन बच्चों के स्कूल की फीस की व्यवस्था राज्य सरकारें करती हैं। 25% कोटे में एप्लीकेशन और सिलेक्शन प्रोसेस क्या है? 25% कोटा में अप्लाई करने के लिए पेरेंट्स को अपने बच्चे के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है। इस पूरे एडमिशन प्रोसेस में स्कूल किसी बच्चे को मना करने या किसी दूसरे को प्राथमिकता देने का अधिकार नहीं रखता। स्कूल स्टेट लिस्ट में लॉटरी से अलॉट हुए बच्चों को 25% कोटा में एडमिशन देने के लिए बाध्य है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… एग्जाम से 2 दिन पहले सब धुंधला दिख रहा था:दुनिया को सिर्फ 10% देखने वाली अनिष्का CBSE में 92% लाई, मैग्निफायर डिवाइस से पढ़ाई की अनिष्का गोयल दुनिया को सिर्फ 10% देख पाती हैं यानी वो 90% दृष्टिबाधित हैं। फिर भी उन्होंने CBSE में ज्यादातर स्टूडेंट्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की अनिष्का ने इस साल CBSE 10वीं बोर्ड में 92.6% अंक हासिल किए हैं, वो भी किसी कोटे से नहीं, बल्कि जनरल कैटेगरी से। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.