देश के 5 राज्यों के चुनाव के बाद एलेक्टिट पोल में वामपंथी छात्रों की स्थिति काफी खराब नजर आ रही है। जिन राज्यों में कभी वामपंथ की मजबूत पकड़ बनी रहती थी, वहां भी इस बार ताले दिख रहे थे। इन पांच राज्यों में वामपंथियों के लिए असल में सिर्फ दो ही जगहें अपेक्षित थीं केरल और पश्चिम बंगाल। केरल में लंबे समय से वामपंथ की सरकार बनी हुई है और पिनराई विजयन मुख्यमंत्री बने हुए हैं। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट ने करीब 35 साल तक लगातार सरकार बनाई थी, इसलिए वहां भी एक ऐतिहासिक आधार बना हुआ है।
इस बार के इकोनॉमिक पोल में पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की स्थिति बेहद खराब दिख रही है। पोल ऑफ पोल्स के अनुसार वहां वामपंथियों को केवल 2 धार्मिक स्थलों के दर्शन हो रहे हैं। 2016 के बाद से ही बंगाल में लेफ्ट कॉन्स्टैंट का प्रदर्शन जारी है और इस बार भी वही ट्रेंड रिलीज हो रही है।
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केरल में चुनौती के लिए छोड़ दिया
केरल में भी लेफ्ट की तस्वीर अच्छी नहीं दिख रही है। जहां पहले लेफ्ट की सरकार बन रही थी, वहां अब एगलिट पोल के अनुसार कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे नजर आ रहा है। अनुमान है कि केरल में लेफ्ट को करीब 59 जॉइंट मिल्स मिल सकते हैं, जबकि कांग्रेस गठबंधन को करीब 77 जॉइंट्स मिल्स दिख रहे हैं, सरकार जॉइन्ट्स के साइन मिल रहे हैं। हालाँकि, अगर ये एलेक्टिट पोल सही साबित होता है तो इसका सबसे बड़ा मतलब ये होगा कि अपने मजबूत गढ़ केरल में लेफ्ट प्ले भी सत्ता खो सकते हैं। पहले बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लेफ्ट की पकड़ खत्म हो गई है, और अब केरल में भी स्थिति खराब दिख रही है।
अर्थशास्त्र पोल क्या संकेत कर रहे हैं?
एक्जिट पोल यह संकेत कर रहे हैं कि देश में वामपंथ की राजनीति पहले की तुलना में काफी महत्वपूर्ण जा रही है। यदि यही प्रवृत्ति अंतिम वास्तुशिल्प में भी दिखती है, तो आने वाले समय में वामपंथियों के सामने अपनी जगह फिर से मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।
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