Saturday, 12 Sep 2026 | 11:02 PM

Trending :

EXCLUSIVE

What is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason

What is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • What Is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason

5 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है, जिसके सिर या दाढ़ी में गोल पैच हों? यानी एक ही जगह से अचानक सारे बाल झड़ गए हों। यह ‘एलोपेशिया एरियाटा’ हो सकता है।

ये एक ऑटोइम्यून हेयर लॉस कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से हेयर फॉलिकल्स को दुश्मन मानकर उसे नुकसान पहुंचाने लगता है। इसके कारण सिर से गोल–गोल पैचेज में बाल झड़ने लगते हैं। यह आइब्रो, दाढ़ी और शरीर के सभी अंगों के बालों को भी प्रभावित कर सकता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 2% लोग जीवन में कभी-न-कभी एलोपेशिया से प्रभावित होते हैं। अमेरिका में ही करीब 68 लाख लोग इस कंडीशन का सामना कर रहे हैं।

इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज एलोपेशिया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • यह गंजेपन से कैसे अलग है?
  • एलोपेशिया के लक्षण क्या हैं?
  • एलोपेशिया का इलाज क्या है?

सवाल- एलोपेशिया क्या है?

जवाब- एलोपेशिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़) पर हमला करने लगता है।

इसके कारण बाल अचानक झड़ने लगते हैं और गोल या पैची गंजापन दिखने लगता है। यह सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। एलोपेशिया में बालों की जड़ स्थायी रूप से नष्ट नहीं होती, बल्कि अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती है। इसलिए सही समय पर पहचान और इलाज से बाल दोबारा उगने की संभावना रहती है।

सवाल- यह सामान्य गंजेपन से कैसे अलग है?

जवाब- सामान्य गंजापन हॉर्मोन और जेनेटिक कारणों से धीरे-धीरे होता है। इसमें बाल पतले होते जाते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसकती है। वहीं एलोपेशिया में बाल अचानक झड़ते हैं और उन जगहों पर गोल पैच बन जाते हैं। सामान्य गंजेपन में हेयर फॉलिकल्स स्थायी रूप से कमजोर हो जाते हैं, जबकि एलोपेशिया में जड़ जीवित रहती है। यही कारण है कि एलोपेशिया में बाल वापस उग सकते हैं। दोनों स्थितियों का कारण, पैटर्न और इलाज एक-दूसरे से अलग है।

सवाल- एलोपेशिया के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- एलोपेशिया का सबसे पहला लक्षण अचानक बाल झड़ना होता है, खासकर सिक्के के आकार के पैच में। कंघी करते या नहाते समय बाल गुच्छों में झड़ सकते हैं। कई लोगों में स्कैल्प पर खुजली, हल्की जलन या झुनझुनी महसूस होती है।

कुछ मामलों में नाखूनों पर गड्ढे, खुरदरापन या सफेद धब्बे भी दिख सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता। इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर बीमारी की शिनाख्त इलाज को ज्यादा कारगर बना सकती है।

सवाल- क्या एलोपेशिया सिर्फ सिर के बालों को प्रभावित करता है?

जवाब- नहीं, ऐसा नहीं है। यह शरीर के किसी भी हिस्से के बालों को प्रभावित कर सकता है। इसमें भौंहें, पलकें, दाढ़ी, मूंछ, हाथ-पैर और यहां तक कि शरीर के रोएं भी झड़ सकते हैं।

कुछ गंभीर मामलों में पूरे शरीर के बाल झड़ जाते हैं, जिसे ‘एलोपेशिया यूनिवर्सेलिस’ कहते हैं। हालांकि हर मरीज में यह स्थिति नहीं होती। किस हिस्से पर असर पड़ेगा, यह इम्यून रिएक्शन की तीव्रता पर निर्भर करता है।

सवाल- एलोपेशिया एक ऑटोइम्यून बीमारी है। ऑटोइम्यून बीमारी क्या होती है?

जवाब- लूपस, हाशिमोटो (एक प्रकार की थायरॉइड कंडीशन) और रुमेटॉइड आर्थराइटिस की तरह ही एलोपेशिया भी एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसके कारण बॉडी में इंफ्लेमेशन होता है। फिर सेल्स और ऑर्गन्स सही तरीके से काम नहीं करते हैं। ऑटोइम्यून बीमारियां संक्रामक नहीं होतीं, लेकिन ये क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली बीमारी) होती हैं।

सवाल- एलोपेशिया क्यों होता है? इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

जवाब- एलोपेशिया का मुख्य कारण इम्यून सिस्टम का असंतुलन है। इसके पीछे जेनेटिक कारण, तनाव, वायरल इंफेक्शन, हॉर्मोनल बदलाव और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

मानसिक तनाव इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे एलोपेशिया ट्रिगर हो सकता है। कुछ मामलों में विटामिन-D, आयरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी वजह बन सकती है। हालांकि हर मरीज में कारण एक जैसा नहीं होता। इसलिए सही इलाज के लिए पर्सनलाइज्ड जांच और मेडिकल हिस्ट्री जानना जरूरी है।

सवाल- क्या मरीज को छूने या साथ रहने से एलोपेशिया फैल सकता है?

जवाब- नहीं, एलोपेशिया संक्रामक बीमारी नहीं है। यह न तो छूने से, न साथ रहने से और न ही खाने-पीने की चीजें शेयर करने से फैलती है। यह एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जो व्यक्ति के अपने शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है।

समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण कई बार मरीजों को सामाजिक दूरी या मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से एलोपेशिया का संक्रमण से कोई संबंध नहीं है। इसके मरीज सामान्य सामाजिक जीवन जी सकते हैं।

सवाल- क्या एलोपेशिया बच्चों और युवाओं में भी हो सकता है?

जवाब- हां, बिल्कुल हो सकता है। कई बार यह 10–20 साल की उम्र में ही शुरू हो जाता है। बच्चों में अचानक पैच में बाल झड़ना माता-पिता के लिए चिंताजनक हो सकता है। कम उम्र में एलोपेशिया होने पर भावनात्मक असर भी ज्यादा पड़ता है।

हालांकि बच्चों में इलाज का रिस्पॉन्स अक्सर बेहतर होता है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर बाल दोबारा उगने की संभावना रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चों में काउंसलिंग भी इलाज का अहम हिस्सा होती है।

सवाल- क्या एलोपेशिया अनुवांशिक भी हो सकता है?

जवाब- एलोपेशिया पूरी तरह जेनेटिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक वजह जरूर हो सकती है। अगर परिवार में किसी को एलोपेशिया या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी रही है, तो जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी जरूर होगी। जेनेटिक कारणों के साथ तनाव, इंफेक्शन या हॉर्मोनल बदलाव ट्रिगर का काम करते हैं। इसलिए इसे जेनेटिक और एनवायर्नमेंटल बीमारी माना जाता है। सही लाइफस्टाइल और समय पर इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

सवाल- क्या एलोपेशिया के कारण झड़े बाल फिर से उग सकते हैं?

जवाब- हां, इसके ज्यादातर मामलों में झड़े बाल फिर से उग सकते हैं, क्योंकि इसमें हेयर फॉलिकल्स स्थायी रूप से नष्ट नहीं होते। जैसे ही इम्यून अटैक कम होता है, बालों की ग्रोथ दोबारा शुरू हो सकती है। शुरुआत में नए बाल पतले या सफेद हो सकते हैं, जो समय के साथ सामान्य हो जाते हैं।

हालांकि हर मरीज में रिजल्ट एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों में बार-बार झड़ना और उगना चलता रहता है। जल्दी इलाज शुरू करने से रिकवरी की संभावना ज्यादा रहती है।

सवाल- एलोपेशिया का इलाज क्या है?

जवाब- एलोपेशिया का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर स्टेरॉइड क्रीम, इंजेक्शन या दवाएं दी जाती हैं, जो इम्यून रिएक्शन को कम करती हैं। इस तरह के ट्रीटमेंट बालों की ग्रोथ में मदद कर सकते हैं। कुछ मामलों में इम्यूनोथेरेपी या ओरल मेडिसिन भी दी जाती है। साथ ही पोषण, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नींद पर ध्यान देना जरूरी है।

सवाल- क्या इलाज के बिना भी एलोपेशिया ठीक हो सकता है?

जवाब- कुछ हल्के-फुल्के मामलों में एलोपेशिया अपने आप भी ठीक हो सकता है, खासकर जब छोटे पैच हों। इम्यून सिस्टम के संतुलित होने पर बाल वापस उग सकते हैं।

हालांकि, इलाज नहीं लेने से बीमारी बढ़ सकती है और नए पैच बन सकते हैं। इसलिए ऐसी किसी भी कंडीशन में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सही समय पर इलाज से बाल झड़ने की गति को कम किया जा सकता है।

सवाल- क्या घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया के इलाज में मदद करते हैं?

जवाब- घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया का इलाज नहीं हैं, लेकिन सहायक भूमिका निभा सकते हैं। जैसेकि–

  • संतुलित आहार, प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन-D की पर्याप्त मात्रा जरूरी है।
  • योग, ध्यान और स्ट्रेस मैनेजमेंट इम्यून बैलेंस में मदद करते हैं।
  • प्याज का रस, एलोवेरा या नारियल तेल स्कैल्प की हेल्थ सुधार सकते हैं, लेकिन ये इम्यून अटैक को नहीं रोकते हैं।
  • इन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के विकल्प की बजाय सपोर्ट के रूप में ही अपनाना चाहिए।

……………….

फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- डकार क्यों आती है: ये हेल्दी होने की निशानी या किसी बीमारी का संकेत, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें डकार का साइंस

खाना खाने के बाद डकार आना कॉमन बात है। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का संकेत है, लेकिन क्या सच में ऐसा ही होता है? सवाल ये है कि डकार क्यों आती है, क्या इसके पीछे शरीर का कोई संकेत छिपा है? पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार:गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी

June 26, 2026/
11:28 am

मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के...

ask search icon

May 14, 2026/
9:53 pm

Last Updated:May 14, 2026, 21:53 IST भारत में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं जिनका उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक...

सेंटीपीड हटाने की युक्तियाँ

April 26, 2026/
2:41 pm

26 अप्रैल 2026 को 14:41 IST पर अपडेट किया गया सेंटीपीड रिमूवल टिप्स: घर के किचन, नौकर और शौचालय में...

ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद

June 5, 2026/
12:20 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार को लेकर कहा कि लंबे समय तक भारत ने अमेरिका पर...

इंग्लैंड के घरेलू खिलाड़ी बने पाक पेसर मोहम्मद आमिर:टी20 ब्लास्ट में नॉटिंघमशायर के लिए खेलेंगे; आईपीएल खेलने की भी उम्मीद,पाकिस्तान से खेला था लास्ट वर्ल्डकप

June 27, 2026/
2:46 pm

क्रिकेट में खिलाड़ियों की पहचान अक्सर उनके प्रदर्शन से बनती है। लेकिन कई बार मैदान के बाहर लिया गया एक...

Govt Jobs 2026: Gujarat 11000 Vacancies & More

April 14, 2026/
8:00 pm

49 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी SSC में 3003 पदों पर भर्ती की। बॉर्डर रोड...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

What is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason

What is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • What Is Alopecia Areata? Causes, Symptopms & Treatment; Autoimmune Disease, Bald Patches Reason

5 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है, जिसके सिर या दाढ़ी में गोल पैच हों? यानी एक ही जगह से अचानक सारे बाल झड़ गए हों। यह ‘एलोपेशिया एरियाटा’ हो सकता है।

ये एक ऑटोइम्यून हेयर लॉस कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से हेयर फॉलिकल्स को दुश्मन मानकर उसे नुकसान पहुंचाने लगता है। इसके कारण सिर से गोल–गोल पैचेज में बाल झड़ने लगते हैं। यह आइब्रो, दाढ़ी और शरीर के सभी अंगों के बालों को भी प्रभावित कर सकता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 2% लोग जीवन में कभी-न-कभी एलोपेशिया से प्रभावित होते हैं। अमेरिका में ही करीब 68 लाख लोग इस कंडीशन का सामना कर रहे हैं।

इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज एलोपेशिया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • यह गंजेपन से कैसे अलग है?
  • एलोपेशिया के लक्षण क्या हैं?
  • एलोपेशिया का इलाज क्या है?

सवाल- एलोपेशिया क्या है?

जवाब- एलोपेशिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़) पर हमला करने लगता है।

इसके कारण बाल अचानक झड़ने लगते हैं और गोल या पैची गंजापन दिखने लगता है। यह सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। एलोपेशिया में बालों की जड़ स्थायी रूप से नष्ट नहीं होती, बल्कि अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती है। इसलिए सही समय पर पहचान और इलाज से बाल दोबारा उगने की संभावना रहती है।

सवाल- यह सामान्य गंजेपन से कैसे अलग है?

जवाब- सामान्य गंजापन हॉर्मोन और जेनेटिक कारणों से धीरे-धीरे होता है। इसमें बाल पतले होते जाते हैं और हेयरलाइन पीछे खिसकती है। वहीं एलोपेशिया में बाल अचानक झड़ते हैं और उन जगहों पर गोल पैच बन जाते हैं। सामान्य गंजेपन में हेयर फॉलिकल्स स्थायी रूप से कमजोर हो जाते हैं, जबकि एलोपेशिया में जड़ जीवित रहती है। यही कारण है कि एलोपेशिया में बाल वापस उग सकते हैं। दोनों स्थितियों का कारण, पैटर्न और इलाज एक-दूसरे से अलग है।

सवाल- एलोपेशिया के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- एलोपेशिया का सबसे पहला लक्षण अचानक बाल झड़ना होता है, खासकर सिक्के के आकार के पैच में। कंघी करते या नहाते समय बाल गुच्छों में झड़ सकते हैं। कई लोगों में स्कैल्प पर खुजली, हल्की जलन या झुनझुनी महसूस होती है।

कुछ मामलों में नाखूनों पर गड्ढे, खुरदरापन या सफेद धब्बे भी दिख सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता। इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर बीमारी की शिनाख्त इलाज को ज्यादा कारगर बना सकती है।

सवाल- क्या एलोपेशिया सिर्फ सिर के बालों को प्रभावित करता है?

जवाब- नहीं, ऐसा नहीं है। यह शरीर के किसी भी हिस्से के बालों को प्रभावित कर सकता है। इसमें भौंहें, पलकें, दाढ़ी, मूंछ, हाथ-पैर और यहां तक कि शरीर के रोएं भी झड़ सकते हैं।

कुछ गंभीर मामलों में पूरे शरीर के बाल झड़ जाते हैं, जिसे ‘एलोपेशिया यूनिवर्सेलिस’ कहते हैं। हालांकि हर मरीज में यह स्थिति नहीं होती। किस हिस्से पर असर पड़ेगा, यह इम्यून रिएक्शन की तीव्रता पर निर्भर करता है।

सवाल- एलोपेशिया एक ऑटोइम्यून बीमारी है। ऑटोइम्यून बीमारी क्या होती है?

जवाब- लूपस, हाशिमोटो (एक प्रकार की थायरॉइड कंडीशन) और रुमेटॉइड आर्थराइटिस की तरह ही एलोपेशिया भी एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसके कारण बॉडी में इंफ्लेमेशन होता है। फिर सेल्स और ऑर्गन्स सही तरीके से काम नहीं करते हैं। ऑटोइम्यून बीमारियां संक्रामक नहीं होतीं, लेकिन ये क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली बीमारी) होती हैं।

सवाल- एलोपेशिया क्यों होता है? इसके पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

जवाब- एलोपेशिया का मुख्य कारण इम्यून सिस्टम का असंतुलन है। इसके पीछे जेनेटिक कारण, तनाव, वायरल इंफेक्शन, हॉर्मोनल बदलाव और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

मानसिक तनाव इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे एलोपेशिया ट्रिगर हो सकता है। कुछ मामलों में विटामिन-D, आयरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी वजह बन सकती है। हालांकि हर मरीज में कारण एक जैसा नहीं होता। इसलिए सही इलाज के लिए पर्सनलाइज्ड जांच और मेडिकल हिस्ट्री जानना जरूरी है।

सवाल- क्या मरीज को छूने या साथ रहने से एलोपेशिया फैल सकता है?

जवाब- नहीं, एलोपेशिया संक्रामक बीमारी नहीं है। यह न तो छूने से, न साथ रहने से और न ही खाने-पीने की चीजें शेयर करने से फैलती है। यह एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जो व्यक्ति के अपने शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है।

समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण कई बार मरीजों को सामाजिक दूरी या मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से एलोपेशिया का संक्रमण से कोई संबंध नहीं है। इसके मरीज सामान्य सामाजिक जीवन जी सकते हैं।

सवाल- क्या एलोपेशिया बच्चों और युवाओं में भी हो सकता है?

जवाब- हां, बिल्कुल हो सकता है। कई बार यह 10–20 साल की उम्र में ही शुरू हो जाता है। बच्चों में अचानक पैच में बाल झड़ना माता-पिता के लिए चिंताजनक हो सकता है। कम उम्र में एलोपेशिया होने पर भावनात्मक असर भी ज्यादा पड़ता है।

हालांकि बच्चों में इलाज का रिस्पॉन्स अक्सर बेहतर होता है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर बाल दोबारा उगने की संभावना रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चों में काउंसलिंग भी इलाज का अहम हिस्सा होती है।

सवाल- क्या एलोपेशिया अनुवांशिक भी हो सकता है?

जवाब- एलोपेशिया पूरी तरह जेनेटिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक वजह जरूर हो सकती है। अगर परिवार में किसी को एलोपेशिया या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी रही है, तो जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी जरूर होगी। जेनेटिक कारणों के साथ तनाव, इंफेक्शन या हॉर्मोनल बदलाव ट्रिगर का काम करते हैं। इसलिए इसे जेनेटिक और एनवायर्नमेंटल बीमारी माना जाता है। सही लाइफस्टाइल और समय पर इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

सवाल- क्या एलोपेशिया के कारण झड़े बाल फिर से उग सकते हैं?

जवाब- हां, इसके ज्यादातर मामलों में झड़े बाल फिर से उग सकते हैं, क्योंकि इसमें हेयर फॉलिकल्स स्थायी रूप से नष्ट नहीं होते। जैसे ही इम्यून अटैक कम होता है, बालों की ग्रोथ दोबारा शुरू हो सकती है। शुरुआत में नए बाल पतले या सफेद हो सकते हैं, जो समय के साथ सामान्य हो जाते हैं।

हालांकि हर मरीज में रिजल्ट एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों में बार-बार झड़ना और उगना चलता रहता है। जल्दी इलाज शुरू करने से रिकवरी की संभावना ज्यादा रहती है।

सवाल- एलोपेशिया का इलाज क्या है?

जवाब- एलोपेशिया का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर स्टेरॉइड क्रीम, इंजेक्शन या दवाएं दी जाती हैं, जो इम्यून रिएक्शन को कम करती हैं। इस तरह के ट्रीटमेंट बालों की ग्रोथ में मदद कर सकते हैं। कुछ मामलों में इम्यूनोथेरेपी या ओरल मेडिसिन भी दी जाती है। साथ ही पोषण, स्ट्रेस मैनेजमेंट और नींद पर ध्यान देना जरूरी है।

सवाल- क्या इलाज के बिना भी एलोपेशिया ठीक हो सकता है?

जवाब- कुछ हल्के-फुल्के मामलों में एलोपेशिया अपने आप भी ठीक हो सकता है, खासकर जब छोटे पैच हों। इम्यून सिस्टम के संतुलित होने पर बाल वापस उग सकते हैं।

हालांकि, इलाज नहीं लेने से बीमारी बढ़ सकती है और नए पैच बन सकते हैं। इसलिए ऐसी किसी भी कंडीशन में डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सही समय पर इलाज से बाल झड़ने की गति को कम किया जा सकता है।

सवाल- क्या घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया के इलाज में मदद करते हैं?

जवाब- घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया का इलाज नहीं हैं, लेकिन सहायक भूमिका निभा सकते हैं। जैसेकि–

  • संतुलित आहार, प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन-D की पर्याप्त मात्रा जरूरी है।
  • योग, ध्यान और स्ट्रेस मैनेजमेंट इम्यून बैलेंस में मदद करते हैं।
  • प्याज का रस, एलोवेरा या नारियल तेल स्कैल्प की हेल्थ सुधार सकते हैं, लेकिन ये इम्यून अटैक को नहीं रोकते हैं।
  • इन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के विकल्प की बजाय सपोर्ट के रूप में ही अपनाना चाहिए।

……………….

फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- डकार क्यों आती है: ये हेल्दी होने की निशानी या किसी बीमारी का संकेत, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें डकार का साइंस

खाना खाने के बाद डकार आना कॉमन बात है। बड़े-बूढ़े कहते हैं कि यह पेट भरने का संकेत है, लेकिन क्या सच में ऐसा ही होता है? सवाल ये है कि डकार क्यों आती है, क्या इसके पीछे शरीर का कोई संकेत छिपा है? पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.