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Datura Plant benefits: धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को धतूरा का फूल और फल बेहद प्रिय माना जाता है. मंदिरों में पूजा के दौरान भक्त शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाते हैं. मगर, क्या आप जानते हैं कि यह पौधा सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में धतूरा का उपयोग कई प्रकार की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है.
आयुर्वेद में धतूरा को एक प्रभावशाली औषधीय पौधे के रूप में माना गया है. जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, इसमें दर्द निवारक (Pain Relief), सूजन कम करने (Anti-inflammatory) और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कई प्रकार की बीमारियों में लाभ पहुंचाते हैं. प्राचीन समय से वैद्य धतूरा का उपयोग विभिन्न रोगों के इलाज में करते आ रहे हैं. खासकर जोड़ों के दर्द, त्वचा रोग, सूजन और सांस से जुड़ी समस्याओं में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके पत्तों का लेप दर्द और सूजन में राहत देने के लिए लगाया जाता है, जबकि कुछ पारंपरिक उपचारों में इसके बीज और फूलों का भी उपयोग होता है.

धतूरा का उपयोग त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. इसके पत्तों या बीजों से बना लेप फोड़े-फुंसी, खुजली और दाद जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा के संक्रमण को कम करने और घाव को जल्दी भरने में सहायक माने जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं. हालांकि, धतूरा जहरीला होता है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. बेहतर है कि किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करें.

जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि धतूरा के पत्ते जोड़ों के दर्द में राहत देने के लिए पुराने समय से उपयोग किए जाता हैं. इसके पत्तों को हल्का गर्म करके दर्द वाली जगह पर बांधने से सूजन कम होती है और दर्द में आराम मिलता है. ग्रामीण इलाकों में यह आसान और असरदार घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है. धतूरा के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को राहत पहुंचाते हैं. हालांकि, इसका उपयोग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि यह पौधा जहरीला भी होता है. इसलिए इसका प्रयोग करने से पहले किसी वैद्य या डॉक्टर से सलाह जरूर लें और सीमित मात्रा में ही प्रयोग करना चाहिए.
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धतूरा एक जंगली पौधा है, जो आमतौर पर खेतों, सड़कों के किनारे और खाली जगहों पर आसानी से उग जाता है. यह पौधा बिना ज्यादा देखभाल के भी तेजी से बढ़ता है, इसलिए ग्रामीण इलाकों में यह अक्सर खुद-ब-खुद दिखाई दे जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि धतूरा के फूल सफेद या बैंगनी रंग के होते हैं, जो देखने में काफी आकर्षक लगते हैं. इसका फल गोल और कांटेदार होता है, जिसके अंदर छोटे-छोटे बीज पाए जाते हैं.

धतूरा में प्राकृतिक दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं, जिनकी वजह से इसे पारंपरिक उपचार में उपयोग किया जाता रहा है. सिर दर्द, मांसपेशियों के दर्द और चोट लगने पर इसके पत्तों का लेप लगाने से आराम मिलने की बात कही जाती है. यह दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को राहत मिलती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे एक आसान घरेलू उपाय के रूप में अपनाते हैं. हालांकि, धतूरा जहरीला होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.

धतूरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इसके पत्तों का लेप या हल्का गर्म करके लगाने से प्रभावित जगह पर राहत मिल सकती है. खासकर चोट, मोच या जोड़ों की सूजन में इसे पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है. यह सूजन के साथ-साथ दर्द को भी कम करने में सहायक माना जाता है. हालांकि, धतूरा जहरीला पौधा है, इसलिए इसका प्रयोग सावधानी से और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करें.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो भगवान शिव ने उसे ग्रहण किया था. मान्यता है कि उस विष के प्रभाव को कम करने में धतूरा का उपयोग किया गया. इसी वजह से धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और पूजा-पाठ में विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर भक्त शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और इसे पवित्र व शुभ मानते हैं.

धतूरा का उपयोग आयुर्वेद में सांस से जुड़ी समस्याओं, खासकर अस्थमा में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. पुराने समय में इसके सूखे पत्तों का धुआं लेने से सांस की तकलीफ में राहत मिलने की बात कही जाती थी. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ तत्व श्वसन मार्ग को खोलने में मदद करते हैं. हालांकि, यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि धतूरा जहरीला पौधा है. इसलिए बिना किसी विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए. वरना नुकसान भी हो सकता है.














































