पूर्व मंत्री महेश जोशी को ACB ने गुरुवार सुबह करीब 5 बजे जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया।
भष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया है। जल जीवन मिशन (JJM) में हुए करीब 900 करोड़ रुपए के घोटाले में एसीबी की SIT ने यह कार्रवाई की है। आज ही जोशी की शादी की सालगिरह भी है।
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DIG डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया- ACB SIT सुबह करीब साढ़े चार बजे सैन कॉलोनी, पावर हाउस रोड, जयपुर रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गई थी। यहां महेश जोशी को उनके आवास से पकड़ा गया।
सुबह करीब 10 बजे जयपुरिया हॉस्पिटल में मेडिकल कराया गया। यहां से एसीबी कोर्ट ले जाया गया।
उधर, जोशी ने कहा- मैं निर्दोष हूं, मेरी कोई गलती नहीं। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।
पूर्व मंत्री महेश जोशी को एसीबी सुबह जयपुरिया हॉस्पिटल लेकर पहुंची। यहां उन्होंने कहा- मैं निर्दोष हूं, मेरी कोई गलती नहीं है।
नहाकर मंदिर जाने की मोहलत मांगी
शादी की सालगिरह की वजह से जोशी का आज विभिन्न मंदिरों में दर्शन करने जाने का कार्यक्रम था। इससे पहले ही सुबह 5:00 बजे एसीबी की टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
जोशी के रिक्वेस्ट करने पर टीम ने उन्हें स्नान करने के बाद शिव मंदिर में जल चढ़ाने की अनुमति भी दे दी थी। घर के पास ही गली में स्थित शिव मंदिर में उन्होंने जलाभिषेक किया। इसके बाद जोशी को ACB मुख्यालय लाया गया। यहां से उन्हें जयपुरिया हॉस्पिटल ले जाया गया।
जोशी बोले- मुझसे किसी तरह की पूछताछ नहीं हुई
जयपुरिया हॉस्पिटल में मीडिया से जोशी ने कहा- मैं निर्दोष हूं मेरी कोई गलती नहीं। एसीबी सुबह 4:30 बजे मेरे घर पहुंची थी। एसीपी ने मुझसे किसी भी तरह की पूछताछ नहीं की और न ही कोई नोटिस दिया। मुझे गिरफ्तार कर लेकर आ गए।
मैं राजस्थान की जनता को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैंने कोई गलती नहीं की। मुझे दो बार जनता ने विधायक बनाया है। एक बार एमपी बनाया। उनके विश्वास पर खड़ा उतारूंगा। राजनीतिक षड्यंत्र के चलते मुझे फंसाया जा रहा है।

जयपुर रेलवे स्टेशन के पास सैन कॉलोनी, पावर हाउस रोड के इसी घर में पूर्व मंत्री महेश जोशी रहते हैं। गुरुवार सुबह करीब 5 बजे यहीं से उनकी गिरफ्तारी हुई।
पिछले साल अप्रैल में ED ने गिरफ्तार किया था
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अप्रैल-2025 में महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरेस्ट किया था। पिछले साल महेश जोशी 7 महीने जेल में रहे थे। 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
आरोप है कि पीएचईडी (PHED) मंत्री के पद का दुरुपयोग कर उन्होंने टेंडर के बदले रिश्वत ली थी। एसीबी की ओर से साल-2024 के अंत में पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी।
इस घोटाले की साल 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी फरार हैं।

अप्रैल-2025 में पूर्व मंत्री महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अरेस्ट किया था। (फाइल फोटो)

पूर्व मंत्री महेश जोशी की राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। (फाइल फोटो)
पूर्व मंत्री सहित 22 अधिकारियों पर हुई थी FIR
जल जीवन मिशन (JJM) में हुए घोटाले को लेकर ACB की ओर से पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन चीफ इंजीनियर राम करण मीणा, दिनेश गोयल, एडिशनल चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विशाल सक्सेना के नाम शामिल हैं।
इस पूरे मामले में एसीबी को ईमेल आईडी से बड़ी लीड मिली थी। एक-एक आईडी की जांच करने पर सभी अधिकारियों के नामों का खुलासा हुआ। आरोप है कि ये लोग फेक सर्टिफिकेट पर टेंडर देकर भ्रष्टाचार कर रहे थे।
9 अप्रैल को पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था
जेजेएम घोटाले में 9 अप्रैल को एसीबी ने जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। सुबोध अग्रवाल के बाद इस कड़ी में एसीबी अब मंत्री तक पहुंची है। एसीबी ने सुबोध अग्रवाल से जलदाय मंत्री रहते महेश जोशी की इस घोटाले में भूमिका को लेकर भी पूछताछ की थी।

जेजेएम घोटाले में पिछले महीने 9 अप्रैल को एसीबी ने जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था।
ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी सर्टिफिकेट से हासिल किए थे टेंडर
जेजेएम घोटाला केंद्र सरकार की हर घर नल पहुंचाने वाली ‘जल जीवन मिशन योजना’ से जुड़ा है। साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपए के 4 टेंडर हासिल किए थे।
श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाण पत्रों से पीएचईडी की 68 निविदाओं में भाग लिया था। उनमें से 31 टेंडर में एल-1 के रूप में 859.2 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे।
श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया और 73 निविदाओं में एल -1 के रूप में भाग लेकर 120.25 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे।
घोटाले का खुलासा होने पर एसीबी ने जांच शुरू की। कई भ्रष्ट अधिकारियों को दबोचा। फिर ईडी ने केस दर्ज कर महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बड़ाया सहित अन्य के ठिकानों पर दबिश दी थी।
इसके बाद सीबीआई ने 3 मई 2024 को केस दर्ज किया। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को सबूत और दस्तावेज एसीबी को सौंप दिए थे। जेजेएम घोटाले में पीयूष जैन, पदम चंद जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।


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