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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी डाबर इंडिया ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कंपनी का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल की बढ़ती कीमतों और मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है।

डाबर के अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और नेस्ले जैसी कंपनियां भी महंगाई के दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में आपके घर का बजट बिगड़ सकता है और साबुन, तेल, बिस्किट जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

अगली तिमाही में फिर बढ़ सकती हैं कीमतें

डाबर इंडिया के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा के मुताबिक, कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कीमतें बढ़ा सकती है। हालांकि, डाबर ने मौजूदा तिमाही में ही कीमतें करीब 4% बढ़ाई थीं, लेकिन कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है।

डाबर का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट चौथी तिमाही (Q4 FY26) में सालाना आधार पर 15.75% बढ़ा है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इन्फ्लेशन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

मिडिल-ईस्ट तनाव और कच्चे तेल का असर

कंपनियों की चिंता की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुई गोलीबारी ने ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर डर बढ़ा दिया है।

क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग और केमिकल्स पर पड़ता है। अगर ये तनाव लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे FMCG कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग और माल ढुलाई की लागत और बढ़ जाएगी।

ग्रामीण इलाकों में डिमांड लौटी, लेकिन मार्जिन पर दबाव

चौथी तिमाही के नतीजों में एक अच्छी बात यह रही कि ग्रामीण बाजारों में डिमांड में सुधार देखने को मिला है। लंबे समय के बाद छोटे शहरों और गांवों से वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ी है। लेकिन जैसे ही खपत बढ़ना शुरू हुई, कंपनियों के सामने कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया। खाने के तेल, दूध और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें दोबारा बढ़ने लगी हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।

बड़ी कंपनियां कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रहीं

सिर्फ डाबर ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), नेस्ले इंडिया, मैरिको, आईटीसी, ब्रिटानिया और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों के कमेंटरी से साफ है कि इंडस्ट्री मुश्किल दौर के लिए तैयार हो रही है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मानसून औसत से कम रहता है और ग्लोबल हालात नहीं सुधरते, तो घरों के मंथली बिल में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हॉर्मुज रूट बंद होने का खतरा

पिछली तिमाही में मिडिल-ईस्ट संघर्ष और हॉर्मुज रूट के बंद होने का पूरा असर इकोनॉमी पर नहीं दिखा था। लेकिन अब इसका असर सप्लाई चेन पर नजर आने लगा है।

माल ढुलाई महंगी हो गई है। FMCG सेक्टर के लिए यह दोहरी मार जैसा है- एक तरफ मांग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ लागत उसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है।

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डाबर के अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और नेस्ले जैसी कंपनियां भी महंगाई के दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में आपके घर का बजट बिगड़ सकता है और साबुन, तेल, बिस्किट जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

अगली तिमाही में फिर बढ़ सकती हैं कीमतें

डाबर इंडिया के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा के मुताबिक, कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कीमतें बढ़ा सकती है। हालांकि, डाबर ने मौजूदा तिमाही में ही कीमतें करीब 4% बढ़ाई थीं, लेकिन कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है।

डाबर का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट चौथी तिमाही (Q4 FY26) में सालाना आधार पर 15.75% बढ़ा है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इन्फ्लेशन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

मिडिल-ईस्ट तनाव और कच्चे तेल का असर

कंपनियों की चिंता की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुई गोलीबारी ने ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर डर बढ़ा दिया है।

क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग और केमिकल्स पर पड़ता है। अगर ये तनाव लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे FMCG कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग और माल ढुलाई की लागत और बढ़ जाएगी।

ग्रामीण इलाकों में डिमांड लौटी, लेकिन मार्जिन पर दबाव

चौथी तिमाही के नतीजों में एक अच्छी बात यह रही कि ग्रामीण बाजारों में डिमांड में सुधार देखने को मिला है। लंबे समय के बाद छोटे शहरों और गांवों से वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ी है। लेकिन जैसे ही खपत बढ़ना शुरू हुई, कंपनियों के सामने कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया। खाने के तेल, दूध और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें दोबारा बढ़ने लगी हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।

बड़ी कंपनियां कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रहीं

सिर्फ डाबर ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), नेस्ले इंडिया, मैरिको, आईटीसी, ब्रिटानिया और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों के कमेंटरी से साफ है कि इंडस्ट्री मुश्किल दौर के लिए तैयार हो रही है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मानसून औसत से कम रहता है और ग्लोबल हालात नहीं सुधरते, तो घरों के मंथली बिल में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हॉर्मुज रूट बंद होने का खतरा

पिछली तिमाही में मिडिल-ईस्ट संघर्ष और हॉर्मुज रूट के बंद होने का पूरा असर इकोनॉमी पर नहीं दिखा था। लेकिन अब इसका असर सप्लाई चेन पर नजर आने लगा है।

माल ढुलाई महंगी हो गई है। FMCG सेक्टर के लिए यह दोहरी मार जैसा है- एक तरफ मांग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ लागत उसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है।

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