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इस हफ्ते ईरान-अमेरिका तनाव पर होगी निवेशकों की नजर:चौथी तिमाही के नतीजों समेत 5 फैक्टर्स तय करेंगे चाल; निफ्टी के लिए 24,500 पर रेजिस्टेंस

इस हफ्ते ईरान-अमेरिका तनाव पर होगी निवेशकों की नजर:चौथी तिमाही के नतीजों समेत 5 फैक्टर्स तय करेंगे चाल; निफ्टी के लिए 24,500 पर रेजिस्टेंस

कल 11 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,936 | 23,870 | 23,820 | 23,466 | 23,335 | 22,858 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,380 | 24,450 | 24,480 | 24,535 | 24,646 | 24,685 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ईरान-इजराइल जंग से बनी ग्लोबल टेंशन अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है, जिससे स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के पास अस्थिरता बनी हुई है। वॉशिंगटन अभी भी तेहरान के जवाब का इंतजार कर रहा है ताकि शांति वार्ता आगे बढ़ सके। इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट्स पर पड़ेगा। 2. विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने ₹11,072 करोड़ के शेयर बेचे। मई महीने में अब तक यह आंकड़ा ₹14,231 करोड़ तक पहुंच गया है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक कुल ₹2.06 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं। नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। 3. 400 से ज्यादा कंपनियों के तिमाही नतीजे निफ्टी की ज्यादातर बड़ी कंपनियां अपने नतीजे दे चुकी हैं, लेकिन अब मझोली कंपनियों की बारी है। अगले छह दिनों में 400 से ज्यादा कंपनियां जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी। इनमें टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, सिप्ला, टाटा स्टील और केनरा बैंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। 4. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घरेलू बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अगर तनाव बढ़ेगा तो तेल की कीमतें ऊपर जाएंगे। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए निगेटिव होगा। 5. ग्लोबल बाजारों का भारत पर असर शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में 1.71% की तेजी रही। वहां चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में सुधार और रोजगार के अच्छे आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। भारतीय बाजार सोमवार को अमेरिकी बाजारों की इस तेजी से संकेत ले सकते हैं। अगले हफ्ते के लिए टेक्निकल लेवल निफ्टी मास्टर कैपिटल सर्विसेज के रिसर्च हेड डॉ. रवि सिंह के मुताबिक, बाजार में अभी ‘बाय ऑन डिप्स’ की रणनीति अपनाई जा सकती है। उनके अनुसार, जब तक निफ्ती 24,000 के ऊपर बना हुआ है, तब तक रिकवरी की उम्मीद है। ऊपर की तरफ 24,500 पर कड़ा रेजिस्टेंस है। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि ऊपर की तरफ 24,500 और 24,600 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, नीचे की तरफ 24,000 और 23,800 पर सपोर्ट दिख रहा है। अगर 23,800 का लेवल टूटता है, तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। सेंसेक्स सेंसेक्स के नजरिए पर चॉइस इक्विटी के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने कहा कि 76,800–77,000 के जोन में अच्छा सपोर्ट है। अगर बाजार गिरता है, तो इस लेवल पर खरीदारी लौट सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 78,000–78,300 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है।
डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें।

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डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें।

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